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रायपुर - स्मृतियों के झरोखे से -1 - प्रभाकर चौबे ..कुछ नहीं मालूम दिल्ली-- पी चितंबरम.बुद्धिजीवियों ने किया हांसदा की किताब पर प्रतिबंध का विरोध..नफ़रत के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ की आवाज : *बहुरंगी भारत* द्वारा मौन प्रदर्शन का आयोजन..जब देश का प्रधानमंत्री ही गाली-गलौज करने वालों को फॉलो करेगा तो उन पर लगाम कौन लगाएगा..जहाँ लक्ष्मी कैद है --- राजेंद्र यादव मुक्तिबोध ः पत्रकारिता के प्रगतिशील प्रतिमान -जीवेश प्रभाकर---जब पहली बार खेला गया 'जिस लाहौर... | नोटबंदी पर देश कहां जा रहा, मोदी भी नहीं जानते : अमेरिकी अर्थशास्‍त्री सत्ता के खेल में वतन की आबरू पर हमले- आलोक मेहता शहीद लेखकों के गृह नगरों के भ्रमण पर हिंदी लेखक अमेरिकी वित्तीय पूंजीपतियों की सलाह पर मोदी जी ने नोटबंदी का अपराध किया --अरुण माहेश्वरी भारतीय तबला वादक संदीप दास ने जीता ग्रैमी अवॉर्ड क्‍लॉड ईथरली--- गजानन माधव मुक्तिबोध Trump, Modi and a Shaft of Worrying Similarities मधुबनी पेंटिंग की जादूगर :बौआ देवी | चुनाव घोषणापत्र या प्रलोभन पत्र- प्रभाकर चौबे | विमर्श सिद्धांतों की व्यर्थता--- हरिशंकर परसाई विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ निकले लोगों और पहले से बाहर लोगों ने जनमोर्चा बनाया था। ये लोग आदर्शवाद के मूड के थे। विश्वनाथ प्रताप को आदर्शवाद का नशा आ गया था। मोर्चे के नेता की हैसियत से उन्होंने घोषणा की ------------- | तमिल लेखक पेरूमल मुरुगन पुनरुज्जीवित होंगे--- तमिल लेखक पेरूमल मुरुगन ने १४ जनवरी को फेसबुक पर लिखा, लेखक पेरूमल मुरुगन मर गया.वह भगवान नहीं है, लिहाजा वह खुद को पुनरुज्जीवित नहीं कर सकता. ------------------ | अध्यादेश सरकार---प्रभाकर चौबे---- कार्पोरेट पूरा परिवेश अपने हित में चाहता है। वह दिखाता है कि वह लोकतंत्र की मजबूती का पक्षधर है---------------- | ग्वालियर के दिग्गज लक्ष्मण पंडित हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में ग्वालियर घराना अन्य सभी घरानों की गंगोत्री माना जाता है. इस घराने की गायनशैली की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हद्दू खां, हस्सू खां और नत्थू खां नाम के तीन भाइयों ने की थी.इनके शिष्य शंकर पंडित और उनके पुत्र कृष्णराव शंकर पंडित अपने समय के दिग्गज गायकों में थे. कृष्णराव शंकर पंडित के पुत्र लक्ष्मण कृष्णराव पंडित ने भी अपने पिता और दादा की तरह गायन के क्षेत्र में खूब नाम कमाया.......... | लंदन में नाटकघरों का सुनहरा युग देश के लीग फुटबॉल से तुलना की जाए तो लंदन के थियेटर हॉल में नाटक देखने ज्यादा लोग आते हैं.सोसाइटी ऑफ लंदन थियेटर एंड नेशनल थियेटर की एक रिपोर्ट के अनुसार इस समय ब्रिटेन में थियेटर का स्वर्णयुग चल रहा है.......... | अपनी भाषा से उदासीनता नहीं: ओरसिनी More Sharing ServicesShare | Share on facebook Share on myspace Share on google Share on twitter फ्रांचेस्का ओरसिनी इटली की हैं और हिन्दी भाषा और समाज की गंभीर अध्येता हैं. उनका कहना है कि भूमंडलीकरण के बावजूद अपनी भाषा से उदासीनता नहीं बरतनी चाहिए.फ्रांचेस्का ओरसिनी अपनी मातृभाषा इटैलियन के अतिरिक्त हिन्दी, उर्दू, फारसी, अंग्रेजी और जर्मन बहुत अच्छी तरह जानती हैं. | मध्यपूर्व पर बदलता भारतीय रुख भारत ने रूस, ब्राजील, दक्षिणी अफ्रीका और चीन के साथ मिल कर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पेश फलिस्तीनी प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जबकि यूरोपीय देशों ने वोट में हिस्सा नहीं लिया और अमेरिका ने उसके खिलाफ वोट डाला......... |

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गुजरात में वीवीपीएटी पर्चियों और ईवीएम डेटा के मिलान में सामने आयीं गड़बड़ियां
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नई दिल्ली। आखिर जिस बात की आशंका थी वही हुआ। गुजरात चुनाव में वीवीपीएटी पर्चियों और ईवीएम के वोटों में मिलान में चार पोलिंग स्टेशनों पर गड़बड़ी पायी गयी है। ये बात पीटीआई के हवाले से आयी खबर में खुद राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त बीबी स्वैन ने स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि सोमवार को मतगणना के दिन वागरा, द्वारका, अंकलेश्वर और भावनगर-ग्रामीण सीट पर नये तरह का मामला सामने आया है। उन्होंने बताया कि यहां के चार बूथों पर मिलान में कुछ वोटों का हेर-फेर था। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि रिटर्निंग अफसर ने निश्चित तौर पर वही गलती की (9 और 14 दिसंबर को हुए मतदान से पहले मॉक पोल के वोटों को ईवीएम से न हटा पाना) होगी लेकिन इसे पहले चिन्हित नहीं किया जा सका। इसलिए हमने इस मामले को हल करने के लिए इन बूथों में वीवीपीएटी स्लिप की गणना को आधार माना। जनचौक ने मतगणना के दिन इसी तरफ इशारा किया था। जिसमें केद्रीय चुनाव आयोग ने खुद अपनी तरफ से हिमाचल और गुजरात के मुख्य चुनाव आयुक्तों को हर विधानसभा क्षेत्र के कम से कम एक पोलिंग स्टेशन की वीवीपीएटी पर्चियों का ईवीएम में पड़े वोटों से मिलान करने का निर्देश दिया था। जनचौक ने इस कवायद को बेहद अहम बताया था। इसमें पोलिंग स्टेशन को बेतरतीब तरीके से लाटरी के जरिये चुना जाना था। मुख्य चुनाव आयुक्त स्वैन ने कहा कि 182 विधानसभा में इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद इन चार क्षेत्रों में इस तरह की गड़बड़ी देखने को मिली है। इसके साथ ही उनका कहना था कि सात विधानसभा क्षेत्रों के 10 बूथों में भी वीवीपीएटी की पर्चियों को मतगणना का आधार बनाया गया है। क्योंकि यहां भी 9 और 14 तारीख के मतदान से पहले हुए ईवीएम माक पोल के डाटा को मिटाना मतदान अधिकारी भूल गए थे। लिहाजा वहां भी वीवीपीएटी के जरिये ही मतगणना हुई। हालांकि स्वैन ने वीवीपीएटी पर्चियों के मिलान की प्रक्रिया पूरे होने के बाद 100 फीसदी शुद्ध होने का दावा किया है। लेकिन उनके ही बयान में उपरोक्त गड़बड़ियां भी सामने आयी हैं। गौरतलब है कि मतगणना से पहले गुजरात कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कुल मतदान के 20 फीसदी ईवीएम में पड़े वोटों की हाथ से मतगणना करने की अपील की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था। उसने कहा था कि कोर्ट तब तक उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता जब तक कि ईवीएम-वीवीपीएटी स्लिप के मिलान में कोई गड़बड़ी या फिर पक्षपात नजर नहीं आता है। पास नेता हार्दिक पटेल समेत दूसरे लोग पहले से ही ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगा रहे हैं। इन तथ्यों के सामने आने के बाद उनके दावे और पुख्ता होते जा रहे हैं। सौजन्य जन चौक


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