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3 मार्च को दिल्ली संसद मार्ग पर मज़दूर अधिकार संघर्ष रैली
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मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) के आह्वान पर 3 मार्च, 2019 को देश के अलग-अलग हिस्सों से मज़दूर दिल्ली में एकजुट होंगे, मोदी सरकार के खिलाफ हुंकार भरेंगे और अपनी माँगें बुलंद करेंगे। मज़दूर अधिकार संघर्ष रैली द्वारा केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा मजदूर वर्ग पर किए जा रहे हमलों व श्रम कानून में मज़दूर विरोधी बदलाव का विरोध, 25000 रुपये न्यूनतम मजदूरी और ठेका व असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का मुद्दा सहित 17 सूत्रीय श्रमिक मांगपत्र को लेकर पूँजीपरस्त सरकार को ललकारेंगे। विरोध प्रदर्शन के माध्यम से सरकारों, नौकरशाहों, पूंजीपतियों के समक्ष तैयार मांग पत्र प्रेषित होगा। रैली की तैयारी के लिए मासा के विभिन्न घटक संगठनों द्वारा प्रचार अभियान तेज कर दिया गया है। 9 फरवरी को दिल्ली में मासा कमेटी की बैठक और वर्तमान भारत में मज़दूर आंदोलन : अनुभव, मुद्दे व चुनौतियां विषय पर खुली चर्चा हुई। उधर हैदराबाद में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटका, तमिलनाडु, महाराष्ट्र के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया। बिहार, बंगाल, उडीसा, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, दमन दीव आदि में भी तैयारियां जोरों पर है। गौरतलब है कि मजदूरों पर बढ़ते हमले एवं पूंजीपति वर्ग के हित में केंद्र तथा विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा लागू किए जा रहे नव उदारवादी नई आर्थिक नीतियों के हमलों के प्रतिकार स्वरूप देशभर के जुझारू मज़दूर संगठन एक संघर्षशील मंच पर एकत्रित हुए। समझौताहीन जुझारू संघर्ष व देश में मजदूर आंदोलन का एक वैकल्पिक ताकत खड़ा करने के लिए मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) का गठन हुआ था, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों से 15 से ज्यादा घटक संगठन शामिल हैं। श्रमक़ानूनो में मज़दूर विरोधी बदलावों के खिलाफ, न्यूनतम मजदूरी 25000 रुपये घोषित करने तथा ठेका मज़दूरों व असंगठित मज़दूरों के हित के लिए विभिन्न राज्य सम्मेलनों के बाद 27 अक्टूबर, 2018 को विजयवाड़ा सम्मेलन में 3 मार्च, 2019 की दिल्ली रैली का आह्वान हुआ था। इसी कड़ी में विगत 22-23 दिसम्बर को अहमदाबाद मज़दूर कार्यशाला में 3 प्रमुख माँगों के साथ 17 सूत्रीय मज़दूर माँगपत्रक जारी हुआ।


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