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संस्कृति -परसाई | कथाकार प्रियंवद को राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान, कथाकार रणेन्द्र और भगवानदास मोरवाल को वनमाली कथा सम्मान | हांगकांग में हो रहे प्रदर्शनों पर चीनी लोगों की राय | टीपू सुल्तानः नायक या खलनायक? ---राम पुनियानी | फिल्म आर्ट कल्चर एंड थिएट्रिकल सोसायटी FACTS रायपुर *मौजूदा मज़हबी जुनून और उर्दू सहाफत पर ब यादगारे कामरेड अकबर द्वारा गुफ्तगू का आयोजन* | प्रधानमंत्री पांच मिनट के लिए भी राजनीति बंद नहीं कर सकते, हमारे बीच यही अंतर है : राहुल गांधी | 3 मार्च को दिल्ली संसद मार्ग पर मज़दूर अधिकार संघर्ष रैली | 10 वां पटना फिल्मोत्सव | अजीत जोगी : न किंग बने न किंगमेकर -दिवाकर मुक्तिबोध | उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में दम तोड़ती खेती ---रोहित जोशी |

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कथाकार प्रियंवद को राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान, कथाकार रणेन्द्र और भगवानदास मोरवाल को वनमाली कथा सम्मान
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वनमाली सृजन पीठ द्वारा प्रत्येक दो वर्षों में दिये जाने वाले प्रति‍ष्ठित वनमाली कथा सम्मान, वनमाली कथा आलोचना सम्मान और वनमाली साहित्यिक पत्रिका सम्मान की घोषणा कर दी गयी है. इस वर्ष चर्चित कथाकार प्रियंवद को राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान, कथाकार रणेन्द्र और भगवानदास मोरवाल को वनमाली कथा सम्मान, युवा कथाकार मनोज पांडेय, तरुण भटनागर और गौरव सोलंकी को वनमाली युवा कथा सम्मान दिये जाने की घोषणा हुई है. पीठ ने वरिष्ठ आलोचक विनोद शाही को वनमाली कथा आलोचना सम्मान और युवा आलोचक राहुल सिंह को वनमाली कथा युवा आलोचना सम्मान के लिए चुना है, वनमाली साहित्यिक पत्रिका सम्मान `समकालीन भारतीय साहित्य' को दिये जाने की घोषणा की गयी है. जबकि इस वर्ष वनमाली विशिष्ट कथा सम्मान से किरण सिंह और उपासना चौबे को सम्मानित किया जा रहा है. झारखंड के लिए इस वर्ष का सम्मान समारोह इसलिए खास है क्योंकि यहां के दो रचनाकारों कथाकार रणेन्द्र और युवा आलोचक राहुल सिंह का नाम पुरस्कार पाने वालों की सूची में शामिल है.प्रसिद्ध कथाकार रणेन्द्र ने कहा कि पुरस्कारों से जहां आत्मविश्वास बढ़ता है, वहीं आपकी जिम्मेदारी भी बढ़ती है. इसमें कोई दो राय नहीं कि पुरस्कारों से सृजशीलता को संबल मिलता है और उसमें निरंतरता आती है. लेकिन एक संतोष भी है कि झारखंड जैसे छोटे राज्य से किया गया लेखन लोगों तक पहुंच रहा है और लोग उसे पसंद कर रहे हैं. बेशक जिम्मेदारी बढ़ी है और यथार्थ लेखन के लिए प्रोत्साहन भी मिला है. खुशी की बात यह है कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों यह सम्मान मिलेगा. कथाकार रणेन्द्र देश के शीर्षस्थ साहित्यकारों में शामिल हैं और उनकी रचनाओं का केंद्र आदिवासी विमर्श और यथार्थवादी लेखन रहा है.


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