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मुंबई में ब्रिटिशकाल का बंकर बना भारत का पहला भूमिगत संग्रहालय
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करीब सवा सौ साल पहले अंग्रेजों के वक्त में बने इस बंकर को अंग्रेजी शासन के ताकतवर गवर्नर को दुश्मनों से बचाने और राजभवन से सुरक्षित बचाकर निकालने के बनाया गया था. महाराष्ट्र के राजभवन परिसर में इतिहास का एक टुकड़ा ब्रिटिशकाल के बंकर के रूप में तीन साल पहले सामने आया था, जिसे अब आम जनता के देखने के लिए अक्टूबर 2019 से खोल दिया जाएगा. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 18 अगस्त को भारत के पहले भूमिगत संग्रहालय का अनावरण किया. यह सदी पुराना बंकर 15 हजार स्कावयर फीट में फैला है, जिसमें 13 कमरे और एक 20 फीट ऊंचा राजसी द्वार है. राजभवन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "कई दशकों से सब कुछ दफन था, लेकिन एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने राज्यपाल सीवी राव को सूचित किया कि राजभवन के परिसर में एक बंकर है." उन्होंने बताया कि राज्यपाल ने बंकर को खोलने और इसे संग्रहालय के रूप में तैयार करने के आदेश दिए. 2016 में इस बंकर मिलने के बाद इसकी मरम्मत का काम कराया गया. हालांकि बंकर परिसर की सटीक ऐतिहासिक साख इतिहासकारों और विशेषज्ञों द्वारा खोजी जा रही है, लेकिन कहा जा रहा है कि इसका निर्माण प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के इरादे से कराया गया होगा. अधिकारी ने बताया, "सावधानीपूर्वक खुदाई करने के बाद हमने पाया कि एक सदी से भी अधिक समय से अरब सागर, बारिश और नमी के टपकने के कारण इसके ऊपरी हिस्से के लॉन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ा. राज्यपाल ने इच्छा जताई कि आसपास की संरचनाओं की सुरक्षा से समझौता किए बिना इसे संरक्षित किया जाना चाहिए." बंकर का प्रवेशद्वार किसी महल जैसा लगता है और इसके अंदर कई कमरे हैं, जिनके नाम शेल स्टोर, गन शेल, कार्टिरेज स्टोर, शेल लिफ्ट, पंप, सेंट्रल आर्टिलरी स्टोर, वर्कशॉप आदि हैं. सन 1802 में ब्रिटिश हुकूमत के दौरान गवर्नर्स हाउस यानि राजभवन का निर्माण हुआ था. बंकर निर्माण के लिए बेहतरीन निर्माण तकनीक का इस्तेमाल किया गया.


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