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बनारस से लेकर दिल्ली तक 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ छात्र-शिक्षक
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राष्ट्रीय आह्वान पर बनारस से लेकर दिल्ली तक 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ छात्र और शिक्षक सड़कों पर उतरे। बनारस में विभागवार रोस्टर के विरोध में BHU के विश्वनाथ मंदिर से मुख्य द्वार लंका तक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शांतिपूर्ण बंद के आह्वान के साथ आक्रोश मार्च का आयोजन किया गया। यह आयोजन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के साथ विभिन्न सम्बद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों व नागरिक समाज के संयुक्त प्रयास किया गया। 13 प्वाइंट रोस्टर के विरोध और ओबीसी, एससीएसटी को उनकी जनसंख्या के अनुपात मे सुनिश्चित संवैधानिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिये बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के बहुजन छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों ने विश्वविद्यालय का मुख्यद्वार बंद कर दिया और बंद मुख्यद्वार के सम्मुख ही आक्रोश सभा का आयोजन हुआ। इसमें बीएचयू एवं बनारस के अनेक साथी मौजूद रहे। आक्रोश मार्च में युवा ओबीसी एससी एसटी जिन्दाबाद, यूजीसी होश में आओ, MHRD होश मे आओ,, जय भीम! हूल जोहार!, जय मंडल। लड़ेंगे! जीतेंगे! नारे लगा रहे थे। मार्च के दौरान रविन्द्र प्रकाश भारतीय द्वारा केंद्र की मोदी सरकार से मांग की गई कि उच्च शिक्षण संस्थानों में विभागवार आरक्षण को रद्द करके इन संस्थाओं को एक इकाई मानते हुए कुल स्वीकृत पदों के अनुपात में अनुसूचित जाति जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु संसद में अविलंब बिल लाया जाए।देश की समस्त शिक्षण संस्थाओं के सभी पदों अर्थात प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर एससी एसटी ओबीसी का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाय और सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षित वर्ग के बैकलॉग के पदों को चिन्हित कर विशेष भर्ती अभियान के माध्यम से भरा जाय। वहीं कुलपति, निदेशक, प्राचार्य आदि के सभी पदों पर आरक्षित वर्गों को चक्रानुक्रम में समानुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाय और उच्च शिक्षा संस्थानों की कार्यकारिणी/परिषद/बोर्ड/कोर्ट आदि में आरक्षित वर्गों का समुचित प्रतिनिधित्व अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाय। इसी के साथ दिल्ली में प्वाइंट रोस्टर के विरोध में यूजीसी से एमएचआरडी तक न्याय मार्च निकाल रहे छात्रों और शिक्षकों को पुलिस बल ने एमएचआरडी से पहले ही गिरफ्तार करके संसद मार्ग थाने में रखा। सवाल है कि विरोध करने वाले छात्रों और शिक्षकों से सरकार को क्या खतरा था कि एक शांतिपूर्ण मार्च को उसके गंतव्य पर पहुंचने से पहले ही बलपूर्वक रोक दिया गया।बीएचयू के मार्च में बहुजन चिन्तक तथा शिक्षकों में प्रो एमपी अहिरवार, प्रमोद बांगड़े, प्रो आरएन खरवार, सुजाता, बृजेश अस्थवल, राकेश भारती, राजकिरण आदि ने भी इस आन्दोलन को संबोधित एवं नेतृत्व प्रदान किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के रविन्द्र प्रकाश भारतीय, राहुल यादव, विनय संघर्ष, प्रवीण यादव, नीतीश, सूर्यमणि, राजकुमार डायमंड, भुवाल यादव, रीना कुमारी, विवेकानंद, चंद्रभान ने सभा को संबोधित किया। इस दौरान राहुल भारती, चंचल, दीपक युगांती, सारिका, बबिता पटेल, बेबी पटेल, अर्चना, चंदन सागर, हर्षित, सौरभ यादव, बालगोविंद, मनीष भारती, रणधीर सिंह, मारुती मानव, शिवशंकर प्रजापति, विश्वनाथ, अभिषेक दिवाकर,आलोक यादव, विकास यादव, संजय कुमार प्रजापति, सतीश कुमार प्रजापति,सीपी, हरेन्द्र कुमार, देवानन्द गुप्ता,गौतमी समेत कई लोग मौजूद रहे।


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