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रायपुर स्मृतियों के झरोखे से- 4 शशि कपूर रायपुर में.... प्रभाकर चौबे
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पृथ्वीराज कपूर के साथ रायपुर आए थे शशि कपूरःःःप्रभाकर चौबे हाल ही में मशहूर अभिनेता शशिकपूर का निधन हुआ । बहुत कम लोगों को पता होगा कि शशि कपूर रायपुर आए थे । निधन पर अखबारों या सोशल मीडिया में भी इस बात का ज़िक्र नहीं दिखा । शशि कपूर 1956 में पृथ्वीराज कपूर की नाटक मंडली पृथ्वी थिएटर के साथ रायपुर आए थे। उनके साथ उनके भाई शम्मी कपूर भी थे । यह उल्लेखनीय है कि पृथ्वीराज कपूर उस ज़माने में अपनी नाटक मंडली पृथ्वी थिएटर के बैनर तले पूरे देश में नाटक किया करते थे । पठान, दीवार जैसे उनके प्रसिद्ध नाटक रहे जिसे वे देश भर में प्रदर्शन किया करते । यहां रायपुर में शारदा टॉकीज (बाद में इसका नाम जयराम टॉकीज हो गया) को सात दिनों के लिए बुक किया। वे रोज एक नाटक का प्रदर्शन करते। पृथ्वीराज कपूर के साथ उनके दो पुत्र शशि कपूर व शम्मी कपूर भी आए थे। बाद में शशि कपूर ने इसी पृथ्वी थिएटर के नाम पर मुंबई में प्रेक्षागृह की स्थापना की जो आज भी मुंबई में हिन्दी रंगमंच के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है । पृथ्वी राज अपनी टीम के साथ कांकेर बाड़ा (गोकुल चंद्रमा मार्ग), बुढ़ापारा में ठहरे थे। शम्मी कपूर और शशि कपूर दोनों रोज ही बूढा तालाब में तैरने जाते -जमकर तैरते और तैरते हुए बूढ़ा तालाब के टापू तक पहुंच जाते और वहां से घाट तक वापस आते दोनों भाईयों में मानो काम्पटीशन होता कि कौन पहले टापू तक पहुंचकर वापस घाट तक आता है। कुछ स्थानीय युवक भी उनके साथ शामिल हो जाते । तालाब के घाट पचरी में दर्शकों की भीड़ लगी रहती। पृथ्वी राज कपूर ने एक सप्ताह तक शो किया । सातो दिन उनके नाटक में भारी भीड़ रही। सामने की टिकिट 5 रूपए का तथा बालकनी की 2 रूपए थी। एक और बात वे अपनी के साथ कांकेर बाड़ा से (जहां रूके थे) शारदा टॉकीज (प्रदर्शन स्थल) टांगे से आते-जाते। यह भी उल्लेखनीय है कि नाटक के बीच सामने की सीट पर कोई व्यक्ति बात करते दिखता तो वे वहीं उसी सीन पर नाटक का प्रदर्शन रोक देते- कहते या तो आप बातें कर लीजिए या नाटक देख लीजिए, खलल न डालिए। नाटक खत्म होने के बाद वे शारदा टॉकीज के सामने गेट पर हाथ में कपड़ा फैलाकर खड़े हो जाते, आंखे बंद कर लेते लोग उसमें पैसे डालते। पृथ्वीराज कपूर जहां ठहरे थे, कांकेर बाड़ा में, वहां किसी तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। सामान्य नागरिक की तरह रूके । शहर में नाटक प्रेमी युवा उनसे बेरोकटोक मिलने जाते । उनसे मिलने का समय सुबह 7 बजे से 10 बजे तक का निर्धारित था। दोपहर को वे रिहर्सल करते। इन्हीं सात दिनों के दौरान एक दिन उन्हें छत्तीसगढ़ कॉलेज के छात्रसंघ के पदाधिकारीयों को प्रमाण-पत्र देने हेतु आमंत्रित किया गया। आमंत्रण देने प्राचार्य श्री योगानंदन गए थे।कार्यक्रम दोपहर एक बजे रखा गया था। छात्र संघ पदाधिकारियों को प्रमाण-पत्र देने के बाद उन्होंने नाटक पर काफी बातें की । छात्र-छात्राओं के प्रश्नों के उत्तर दिए । शशि कपूर के निधन पर ये बातें याद हो आईं। और इसलिए भी कि शहर वालों को ये पता चले ।


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