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परसाई जयंती पर प्रभाकर चौबे की व्यंग्य रचनाओं पर चर्चा
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प्रगतिशील लेखक संघ रायपुर के तत्वावधान में हरिशंकर परसाई की जयंन्ती पर वरिष्ठ व्यंग्यकार प्रभाकर चौबे की सद्य प्रकाशित व्यंग्य पुस्तकों गांधी जी मिले तथा हे विदूषक तुम मेरे प्रिय पर चर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया प्रगतिशील लेखक संघ के जीवेश प्रभाकर द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. बाबूलाल शुक्ल थे तथा डॉ. सच्चिदानंद जोशी , कुलपति ,कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकाुरता विश्वविद्यालय, प्रसिध्द व्यंग्यकार प्रो.विनोदशंकर शुक्ल तथा युवा समीक्षक प्रो. जय प्रकाश ,दुर्ग ने अपने आलेख पढ़े । प्रारंभ में इ प्टा के नाटय संयोजक सुभाष मिश्रा ने प्रभाकर चौबे का परिचय देते हुए कहा कि वे लगातार पचास वर्षों से लिख रहे हैं और आज भी सक्रिय हैं। सुभाष मिश्र ने प्रभाकर चौबे की व्यंग्य रचनाओं में से कुछ उदाहरण प्रस्तुत कर कहा कि प्रभाकर चौबे हरिशंकर परसाई की परम्परा के लेखक हैं । प्रभाकर चौबे की व्यंग्य रचनाओं पर अ्पने आलेख में प्रो. विनोद शंकर शुक्ल ने कहा कि प्रभाकर की व्यंग्य रचनाओं में व्यवस्था की विसंगतियों की जबरदस्त पड़ताल है और उन पर तीखा प्रहार किया गया है । इसी क्रम में युवा समीक्षक प्रो. जयप्रकाश (दुर्ग) ने हिन्दी साहित्य में व्यंग्य पर विस्तार से उल्लेख करते हुए भारतेंदु हरिचंद्र से लेकर बालमुकुंद गुप्त के व्यंग्य की चर्चा की और कहा कि हरिशंकर परसाई ने समाज पर सतर्क व सोदेश्य दृष्टि डालते हुए व्यंग्य को ऊँचाइयाँ प्रदान की हैं । प्रभाकर चौबे भी हरिशंकर परसाई की तरह समाज की पक्षधरता व विचारधारा से सम्पन्न व्यंग्य लेखक हैं । कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्व विणद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने पुस्तक हे विदूषक तुम मेरे प्रिय पर चर्चा करते हुए कहा कि इनमें व्यवस्था सरकार व प्रशासन पर तीखा व्यगंय किया गया है और यह किसी सीरियल के ऐपीसोड की तरह नाटय मंच पर प्रस्तुत किया जा सकता है । गांधी जी मिले व्यंग्य रचनाओं का संकलन है जिनमें शिक्षा, चुनाव तथा समाज के हर क्षेत्र में व्याप्त विसंगतियों पर पैनी नजर डाली गई है । चर्चा में अपनी बात रखते हुए प्रो. हरिशकंर शुक्ल ने कहा कि प्रभाकर चौबे की व्यंग्य रचनाओं में कटुता न होकर व्यंगय की तीखी मार है। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. बाबूलाल शुक्ल ने दोनों पुस्तकों की रचनाओं को श्रेष्ठ व्यंग्य का उदाहरण बताया । अंत में प्रगतिशील लेखक संघ, रायपुर के सचिव कथाकार आनंद हर्षुल ने आभार व्यक्त किया । प्रगतिशील लेखक संघ रायपुर इकाई के अध्यक्ष डॉ. आलोक वर्मा ने गोष्ठी की अध्यक्षता की तथा युवा कवि संजय शाय ने कार्यक्रम का संचालन किया । गरिमामय गोष्ठी में बड़ी संख्या में राजधानी के साहित्यकार व संस्कृत कर्मी तथा पत्रकार उपस्थित थे ।


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