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जब देश का प्रधानमंत्री ही गाली-गलौज करने वालों को फॉलो करेगा तो उन पर लगाम कौन लगाएगा | साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता सौवेंद्र शेखर की किताब पर झारखंड में प्रतिबंध | क्या सीपीएम में बहुमतवादियों ने पार्टी को फिर एक बार तोड़ने का निर्णय ले लिया है? -अरुण माहेश्वरी | समय जैसा है, उसे ही लिखा जाए-- अरुण माहेश्वरी | समय जैसा है, उसे ही लिखा जाए--- | Protest against Mob Lynchings and the Role of Civil Society in Breaking the Silence | जहां कहीं भी भीड़ बनती है, वहीं हिटलर का जर्मनी बन जाता है- रवीश कुमार | मजीठिया आयोग की सिफारिशों पर जो हो रहा है वह त्रासदी का सिर्फ एक सिरा है--प्रियदर्शन | सऊदी अरब में बुरे फंसे भारतीय | अमेरिकी वित्तीय पूंजीपतियों की सलाह पर मोदी जी ने नोटबंदी का अपराध किया --अरुण माहेश्वरी |

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साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता सौवेंद्र शेखर की किताब पर झारखंड में प्रतिबंध
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अंग्रेजी अखबार The Telegraph में छपी खबर के मुताबिक, लेखक पर आरोप लगाया है कि इस किताब में संथाल जनजाति की महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई गई है। यह किताब नवम्बर 2015 में प्रकाशित हुई थी। लेखक झारखंड के पकूर जिले में डॉक्टर हैं। शुक्रवार को झारखंड विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा था। संथाल जनजाति से आने वाली विपक्ष की नेता सीता सोरेन ने कहा कि इस किताब में संथाल महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी किताब पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग की है। हालांकि, शेखर के समर्थन में कई लोग आगे आए हैं और उनकी किताब पर प्रतिबंध की निंदा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बाद में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को किताब की प्रतियों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया। पीटीआई के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने शेखर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी दिया है। इससे पहले शेखर के आलोचकों और सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने यह कहते हुए उन्हें ट्रोल किया था कि आदिवासियों के बारे में उनकी लिखी किताब अश्लील है। गत 4 अगस्त को पकूर जिले में विरोधियों ने उनका पुतला फूंका और उनकी दो किताबों को जलाया था। लेखक हंसदा शेखर को 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है।


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