नेहरू जी ने कहा था कि वंदे मातरम और जन गण मन एक आयोजन में बिलकुल गाए जाने चाहिए। होना यह चाहिए कि वंदेमातरम से कार्यक्रम की शुरुआत हो और जनगणमन से समाप्ति। आज भी देश में नेहरूजी की दी हुई यह परंपरा कायम है।
- बंगाली भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 ईसवी में वंदेमातरम गीत की रचना की।
- बाद में इस गीत को 1881 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंद मठ में शामिल गया।
- भारत की आजादी के आंदोलन में इस गीत का प्रवेश पहली बार 1886 ईसवी में हुआ, जब कविवर रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया।
- इस तरह से अपनी स्थापना के अगले ही साल कांग्रेस पार्टी ने वंदेमातरम को राष्ट्रीय गीत के तौर पर मान्यता दी।
- अंग्रेजों ने 1905 में जब बंगाल का विभाजन किया तो उस समय के राष्ट्रवादी कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में जनता ने विभाजन के खिलाफ आंदोलन किया। इस आंदोलन की अगुवाई सुरेंद्रनाथ बनर्जी, बिपिन चंद्र पाल, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय (यह सभी नेता कांग्रेस के अध्यक्ष रहे) जैसे महान कांग्रेस नेताओं ने की।
- बंगभंग आंदोलन के दौरान ही रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 16 अक्तूबर 1905 को विभाजन के दिन को शोक‑और‑एकता दिवस के रूप में मनाने, राखी बाँधने और वन्दे मातरम् के सामूहिक गायन जैसे प्रतीकों के माध्यम से जन‑एकता खड़ी करने में विशेष भूमिका निभाई और यहीं से वंदेमातरम का जयघोष भारत की आजादी का नारा बन गया।
- इस तरह वंदेमातरम को आजादी का नारा बनाने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया।
- कांग्रेस ने अपने अधिवेशनों और कार्यक्रमों में वंदेमातरम के नियमित गायन की परंपरा शुरू कर दी।
- महात्मा गांधी ने जब 1921 में असहयोग आंदोलन छेड़ा तो लाखों कांग्रेसी स्वतंत्रता सेनानी भारत माता की जय, महात्मा गांधी की जय और वंदेमातरम का नारा लगाते हुए जेल गए।
- कांग्रेस पार्टी ने जहां 1885 में अपनी स्थापना के अगले साल से ही वंदेमातरम को अपना लिया, वहीं 1925 में अपनी स्थापना के बावजूद आरएसएस वंदेमातरम से दूर रहा। वंदेमातरम का नारा लगाने पर अंग्रेजों की लाठियां और गोलियां खानी पड़ती थीं, इसलिये आरएसएस ने अपनी अलग प्रार्थना बनाई।
- कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं की तरह पंडित जवाहरलाल नेहरू के लिये भी वंदेमातरम आजादी के आंदोलन अभिन्न हिस्सा था।
- 1929 में पहली बार कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनने के बाद 29 दिसंबर 1929 के अपने अध्यक्षीय भाषण के अंत में पंडित नेहरू ने वंदेमातरम का जयघोष किया। यहीं नहीं, अधिवेशन के समापन भाषण में 1 जनवरी 1930 को भी पंडित नेहरू ने वंदेमातरम का नारा लगाया।
- नेहरू जी को वंदेमातरम गीत कितना प्रिय था, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि अगस्त 1942 में जब मुंबई में भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा होनी थी, तब नेहरू जी ने पत्र लिखकर आयोजकों को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय गीतों में सबसे पहले वंदेमातरम का गायन किया जाए।
- इसी तरह जब 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को भारत स्वतंत्र होने वाला था, तब भी नेहरू जी को सबसे पहले वंदेमातरम की याद आई। 4 अगस्त 1947 को उन्होंने संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद को पत्र लिखकर कार्यक्रम की रूपरेखा भेजी। उसमें सबसे पहला बिंदु था कि आजादी के कार्यक्रम की शुरुआत वंदेमातरम गीत से हो। और हुआ भी यही।
- 24 जनवरी 1950 को भारत की संविधान सभा ने जन गण मन को राष्ट्र गान और वंदेमातरम को राष्ट्रगीत के रूप में सर्वसम्मति से स्वीकार किया।
- नवंबर 1955 में जब तत्कालीन मध्य प्रांत की सरकार ने यह सवाल पूछा कि क्या एक ही सरकारी कार्यक्रम में जनगणमन और वंदेमारतम गाए जा सकते हैं तो नेहरू जी ने कहा कि बिलकुल गाए जाने चाहिए। होना यह चाहिए कि वंदेमातरम से कार्यक्रम की शुरुआत हो और जनगणमन से समाप्ति। आज भी देश में नेहरूजी की दी हुई यह परंपरा कायम है।
(नेहरू वांग्मय खंड 31 पेज 543)
