विविध

कोरोना काल में धर्म और ईश्वर- डॉ क्रांतिभूषण बंसोड़े

May 12, 2021

धर्म की विभिन्न परिभाषाएँ अनेक लोगों ने प्रस्तुत की हैं । धर्म को विभिन्न अर्थों में चाहे जैसे प्रस्तुत किया जाए लेकिन वह अपने कर्मकांड के स्वरूप में व्यापार ही है । व्यापार अथवा दुकानदारी का मतलब ही किसी वस्तु को उसके वास्तविक मूल्य से अधिक मूल्य पर बेचना होता है । वास्तविक मूल्य से […]

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उत्तर प्रदेश में भी हिंसा लेकिन कोई चर्चा नहीं -अपूर्वानंद

May 8, 2021

उत्तर प्रदेश में अलग-अलग प्रकार के अपराध और हिंसा की घटनाएँ किसी राज्य से कम नहीं बल्कि इस मामले में वह हर प्रकार की हिंसा में अगली पंक्ति में पाया जाता है। इसलिए चुनाव के बाद हिंसा आश्चर्यजनक नहीं। क्या आपको उत्तर प्रदेश में पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनावों के बाद की हिंसा और […]

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मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबडे पर कुछ चिंतन-इंदिरा जयसिंह

April 27, 2021

भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान न्यायदर्शन के साथ-साथ वर्षों से उनके पेशेवर कार्यकलापों को रेखांकन करते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह 47 वें सीजेआई के रूप में न्यायमूर्ति एसए बोबडे की जटिल विरासत पर नज़र डाल रही हैं और उन्हें एक ऐसे ग़ैर-परंपरागत न्यायायिक अधिकारी के […]

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जहां हमेशा धर्म संकट में रहता है, वहां वैज्ञानिक दृष्टिकोण की ज़रूरत आन पड़ी!

April 25, 2021

राज कुमार इस समय वैज्ञानिक सोच की बड़ी ज़रूरत महसूस की जा रही है। उस अख़बार में भी वैज्ञानिक सोच का इश्तिहार छप रहा है जिस अख़बार को लोग ख़रीदते ही राशिफल देखने के लिये हैं।देश का स्वास्थ्य ढांचा चरमराया हुआ है। ऑक्सीजन, बेड और वेंटिलेटर के लिये हाहाकार मचा है। लोगों को लगातार संदेश […]

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कोविशिल्ड की कीमतों का रहस्य

April 24, 2021

प्रोसेनजीत दत्ता केंद्र-राज्य सरकारों  एवं निजी अस्पतालों के लिए कोविशिल्ड वैक्सीन के अलग-अलग और बढ़े हुए दामों की सीरम इंस्टीट्यूट की  घोषणा ने अशांत कर देने वाले कुछ सवाल खड़े कर दिये हैं। केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और अंत में, निजी अस्पतालों से कोविशिल्ड के लिए क्या दाम लिये जाएंगे, इसको लेकर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया […]

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क्यों जनता की नज़र में गिरता जा रहा है चुनाव आयोग

April 18, 2021

एन.के. सिंह क्या आज के चुनाव आयोग में शेषन जैसी हिम्मत है? शायद नहीं, क्योंकि उस समय तक मोदी और अमित शाह की जगह अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी हुआ करते थे और राजनीति में कुछ परदे अभी भी बचे थे। सुप्रीम कोर्ट तक ने हाल ही में एक सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से […]

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चुनाव आयोग क्या सरकार का ‘आज्ञाकारी सेवक’ है?

April 17, 2021

अनिल जैन केरल हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से एक ग़लत नज़ीर कायम होने से बच गई। मगर सवाल है कि क्या चुनाव आयोग भविष्य के लिए इससे कोई सबक़ लेगा। पिछले छह-सात सालों के दौरान केंद्र सरकार की करतूतों से वैसे तो देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं की साख और विश्वसनीयता पर बट्टा लगा है, लेकिन […]

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कोरोना और महाकुंभ : धर्म से बड़ा है मनुष्य

April 16, 2021

शंभूनाथ शुक्ल कोरोना कोई ढोल बजा कर नहीं आता। अगर कुंभ स्थगित हो जाता तो न धर्म का लोप होता न हिंदू समाज का। अलबत्ता एक मैसेज यह जाता कि हिंदू एक सहिष्णु और सभ्य व वैज्ञानिक चेतना वाली क़ौम है। कोई भी धर्म, कोई भी कर्मकांड, कोई भी विचार मनुष्य से ऊपर नहीं हो […]

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ऐतिहासिक ख़ुदाबख़्श खां लाइब्रेरी को तोड़ने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ बढ़ता विरोध!

April 12, 2021

अनिल अंशुमन इस पुस्तकालय में अरबी, फ़ारसी व अंग्रेजी की 21 हज़ार से भी अधिक दुर्लभ प्राच्य पांडुलिपियाँ और 25 लाख से भी अधिक मुद्रित पुस्तकों का अद्भुत संग्रह मौजूद हैं।   “वर्षों पूर्व अपने समय के चर्चित अध्ययन व ज्ञान–संस्कृति के केंद्र नालंदा विश्वविद्यालय में रखी ऐतिहासिक धरोहर पुस्तकों–पांडुलिपियों को सत्ता साजिश के तहत आग […]

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महामारी की दूसरी लहर को संभालो, जनता के स्वास्थ्य और आजीविकाओं को बचाओ!

April 11, 2021

प्रकाश करात 2021-22 के बजट में स्वास्थ्य के क्षेत्र में 137 फीसद बढ़ोतरी का बहुत लंबा-चौड़ा दावा किया गया है। जबकि वास्तव में 2021-22 के बजट में स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण विभाग के लिए बजट प्रावधान में, 2020-21 के वास्तविक खर्च के मुकाबले, 9.6 फीसद की कटौती ही हुई है। कोविड-19 के संक्रमणों की दूसरी […]

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