न कोई पार्टी सिंबल, न पार्टी का झंडा न पारंपरिक प्रचार पोस्टर , राहुल गांधी ने युवाओं के साथ रूबरू संवाद करते हुए राजनैतिक विमर्श और बहस को एक नई दिशा देते हुए सामाजिक बदलाव और समरसता की ओर मोड़ कर नए दौर का आग़ाज़ किया है।
Girl Power के नाम छात्रों की गूंज, पुणे … न कोई पार्टी सिंबल, न पार्टी का झंडा न पारंपरिक प्रचार पोस्टर , संवाद और विमर्श के एक नए दौर का आग़ाज़…
मैने लगभग चार दशक के अपने राजनैतिक कालखंड में पहली बार किसी राजनेता को महिलाओं विशेषकर छात्राओं के लिए विशेष सभा करते देखा। पहले की गारंटी मैं नहीं लेता। मैं बहुत ज्यादा अतीतजीवी नहीं हूं, आज की बात करता हूं, आज में जीता हूं।
आज राहुल गांधी में जबरदस्त बदलाव दिख रहा है,पूर्ववर्ती राहुल गांधी क्या और कैसे थे वो सब अतीत की बातें हैं। बोले तो जिसे पप्पू कहते रहे वो अब जबरदस्त पॉपुलर होता जा रहा है।
राहुल गांधी जो छात्रों की गूंज के नाम पर छात्रों, जेन Z, से सीधा संवाद कर रहे हैं वो उनकी सबसे महत्वपूर्ण पहल है जिसका अभिनंदन करना आज जरूरी है ।
राहुल गांधी ने राजनैतिक विमर्श और बहस को एक नई दिशा देते हुए सामाजिक बदलाव और समरसता की ओर मोड़ कर नए दौर का आग़ाज़ कर दिया है ।
राहुल गांधी ने युवाओं के साथ रूबरू संवाद करते हुए “छात्रों की गूंज ” कार्यक्रम के ज़रिए धार्मिक, साम्प्रदायिक कटुता और इतिहास के गड़े मुर्दों को उखाड़ने में उलझे राजनैतिक विमर्श और बहस को एक नई दिशा देते हुए सामाजिक बदलाव और समरसता की ओर मोड़ दिया है और वे इस प्रयास में तेजी से सफल होते दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि बहुत बूढ़े होते नेताओं और उनके पारंपरिक आडंबर से ऊबता युवा वर्ग इससे आकर्षित भी हो रहा है।
यह सुखद बदलाव है जिसका सभी प्रबुद्ध और संवेदनशील लोगों को स्वागत ही नहीं करना चाहिए बल्कि इसका हिस्सा भी बनना चाहिए।
यह राजनीति का संक्रमणकाल है। यदि राहुल गांधी के साथ जेन Z इसे सकारात्मक मोड देने आगे आ रही है तो हम सबको इसका स्वागत करते हुए उन्हें स्पेस देना ही चाहिए।
छात्रों की गूंज एक सकारात्मक और प्रगतिशील पहल है। जो भी इसे डिजाइन और प्रमोट कर रहा है वो निश्चित ही इंटेलीजेंट है जिसने जेन Z की नब्ज़ पहचानकर सही दिशा पकड़ी है।
राहुल गांधी एक नए अवतार में सामने आये हैं। छात्रों की गूंज में उनका प्रेजेंटेशन का अंदाज़ और बॉडी लेंग्वेज उनकी एक बिल्कुल नई और बम्फाड़ छवि बना रही है ।
राहुल परम्परागत घिसे पिटे उबाऊ राजनैतिक भाषणों से उलट एकदम आधुनिक टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। सबसे बड़ी और आकर्षक बात ये है कि वो स्वयं बोलने एकतरफा मन की बात करने की बजाय वार्तालाप की शैली अपना रहे हैं इसमें वेवज्यादा से ज्यादा युवाओं की सुन रहे हैं जो युवा वर्ग को सीधे अट्रैक्ट कर रहा है कनेक्ट कर रहा है और इसीलिए उनके दिल में उतर रहा है।
छात्रों की गूंज इतनी लाउड हो चुकी है कि सत्ता पक्ष के कान फट रहे हैं । देखिये अब भागवत के बाद बीजेपी की नई कार्यकारिणी भी छात्रों के बीच जाने का प्लान बना रही है। इसका जेन Z कैसा रिस्पॉन्स देगी ये तो भविष्य ही बताएगा।
राहुल गांधी के ये प्रयास चुनावी रणक्षेत्र में कितने सफल होंगे ये भविष्य ही तय करेगा। इसकी चिंता तो संभवतः राहुल गांधी खुद भी नहीं करते दिख रहे हैं। इसका प्रमाण ये है जो महत्वपूर्ण और ध्यान देने योग्य है कि छात्रों की गूंज आयोजन में वो न तो अपनी पार्टी का झंडा या सिंबल , न बड़े बड़े पार्टी नेताओं से अटे पटे गाड़ियों पोस्टर भी इस्तेमाल नहीं कर रहे और न ही कोई चुनावी जुमला, प्रलोभन या रेवड़ी की बातें करते दिख रहे हैं।
ये निश्चित ही विचारशून्य और जड़ होते लोकतंत्र के बदलाव की ओर अग्रसर एक क्रांतिकारी पहल है जिसका हमें स्वागत और सहयोग करना चाहिए, शामिल होना चाहिए।
