
नगर के रचनाकारों, संस्स्कृतिकर्मियों से अनौपचारिक भेंट मुलाकात और बातचीत का सिलसिला प्रारंभ करने की मंशा से बहुत उत्साहजनक माहौल में आज राजधानी रायपुर में सांस्कृतिक चौपाल की शुरुवात की गई।
नगर के रचनाकारों, संस्स्कृतिकर्मियों से अनौपचारिक भेंट मुलाकात और बातचीत का सिलसिला प्रारंभ करने की मंशा से बहुत उत्साहजनक माहौल में आज राजधानी रायपुर में चौपाल की शुरुवात की गई।
बहुत ही अनौपचारिक रूप से शुरू किए गए एमएम इस चौपाल के पहले कार्यक्रम में हिंदी के अग्रणी व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई की जयंती के अवसर पर उनको याद करते हुए एक अंतरंग स्मरण सभा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर परसाई जी पर एक डॉक्यूमेंट्री और उनकी रचना पर आधारित दो लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। लघु फिल्मों के पश्चात परसाई की रचनाओं पर विचार विमर्श एवं अनौपचारिक बातचीत की गई। इस विमर्श में उपस्थित दर्शकों ने भी अपनी बातें रखीं।
FACTS , रायपुर के इस पहले आयोजन में चौपाल के नियमित आयोजन पर उपस्थित सभी सुधिजनों से खुली एवं विस्तृत चर्चा की गई। सभी ने चौपाल के नियमित आयोजन पर सहमति व्यक्त की । विचार विमर्श के दौरान यह बात विशेष रूप से रेखांकित की गई कि चौपाल को सिर्फ साहित्य पर ही केंद्रित न रखा जाए,इसे व्यापक रूप देते हुए समस्त समसामयिक विषयों पर विमर्श, बातचीत और संवाद के माध्यम के रूप में विकसित किया जाए। इस बात पर कुछ मतभिन्नता भी आई मगर ज्यादातर लोगों की राय ये रही कि इसे साहित्य संस्कृति के साथ ही रंगकर्म,संगीत संगीत,कला के विभिन्न आयामों पर भी केंद्रित किया जाना उचित होगा। आयोजक समिति की ओर से संयोजक जीवेश प्रभाकर ने सभी सुझावों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ आयोजनों के पश्चात चौपाल के प्रारूप पर आगे विचार कर सभी की राय से निर्णय लिया जाएगा।
इस पहली चौपाल में नगर के प्रबुद्धजन बड़ी तादात में उपस्थित थे।