जरूरी नहीं कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल किसी भी के द्वारा किए जा रहे हर विरोध में शामिल हो। विशेषकर ऐसे संदेहास्पद ऐसे प्रदर्शनों से तो कांग्रेस को दूर ही रहना चाहिए।
खबर है कि जंतर मंतर पर आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने राहुल गांधी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को आधिकारिक पत्र भेजा है। पत्र में अपील की गई है कि सभी दल जंतर-मंतर आकर छात्रों की मांगों का समर्थन करें।
जंतर-मंतर पर 17 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने खुद भी वीडियो जारी कर राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अन्य नेताओं को आंदोलन से जुड़ने का न्योता दिया है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष युवाओं के इस आंदोलन का समर्थन नहीं करता है, तो जनता उन्हें भी नकार देगी।
वांगचुक की सेहत को लेकर सभी चिंतित हैं और चाहते हैं कि वो अपना अनशन खत्म कर दें मगर वे और कॉकरोच जनता पार्टी मोदी जी को क्यों नहीं लिख रहे ?
उन्हें यह विश्वास है क्यों है कि मोदी सरकार द्वारा वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी की मांगों एवं अनशन के प्रति सरकार की असंवेदनशीलता एवं अनदेखी पर मोदी सरकार को सबक सिखाने की बजाय जनता विपक्ष को सबक सिखाएगी?
जिन वांगचुक को लद्दाख के मुद्दे पर मोदी सरकार द्वारा दिल्ली में नहीं घुसने दिया गया, उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में शामिल होने एवं आमरण अनशन की अनुमति आखिर कैसे मिल गई। क्यों?
क्योंकि राहुल गांधी लगातार छात्रों की सभा आयोजित कर रहे हैं। इन सभाओं में दिन ब दिन छात्रों की भीड़ बढ़ती जा रही है। राहुल गांधी के पार्टी छात्रों का आकर्षण बढ़ता जा रहा है एवं छात्रों को उम्मीद की किरण सी नजर आ रही है।
इसी का प्रमाण है कि आगामी 17 जुलाई को देहरादून में राहुल की सभा के लिए 2.5 लाख से ज्यादा रेजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।
सरकार राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता से सकते में है । इन संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता कि सरकार कॉकरोचों की आड़ में इसे मैनेज करना चाहती है। इसीलिए सब मिल जुलकर राहुल गांधी को टारगेट कर रहे हैं।
एक बड़े तबके का यह मानना है कि राहुल गांधी एवं विपक्षी दलों के समर्थन की ये मांग सत्ता पक्ष के इशारे पर कॉकरोच जनता पार्टी के माध्यम से राहुल गांधी और कांग्रेस के बढ़ते प्रभाव की धार को भोथरा करने की सोची समझी साजिश है। क्योंकि सीजेपी को सत्ता पक्ष द्वारा पहले ही पाकिस्तान परस्त एवं प्रायोजित करार देने का नैरेटिव चलाया ही जा रहा है। राहुल गांधी के समर्थन में आते ही सत्ता पक्ष वांगचुक और सीजेपी को दरकिनार कर कांग्रेस और विपक्षी दलों को निशाने पे लेने के प्रयास में सफल हो जाएगा ।
वांगचुक से सहानुभूति और उनकी सेहत की चिंता होना स्वाभाविक है मगर राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों को भी समझबूझकर निर्णय लेना चाहिए।
जरूरी नहीं कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल किसी भी के द्वारा किए जा रहे हर विरोध में शामिल हो। विशेषकर ऐसे संदेहास्पद ऐसे प्रदर्शनों से तो कांग्रेस को दूर ही रहना चाहिए, इनके झांसे में नहीं आना चाहिए। कांग्रेस को किसी का समर्थन करने की बजाय अपनी लाइन पर ही आगे बढ़ना उचित होगा।
