सरोकार

क्या धर्मनिरपेक्षता भारत की परंपराओं के लिए खतरा है?- – राम पुनियानी

March 22, 2021

भारत को एक लंबे संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश राज से मुक्ति मिली. यह संघर्ष समावेशी और बहुवादी था. जिस संविधान को आजादी के बाद हमने अपनाया, उसका आधार थे स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय के वैश्विक मूल्य. धर्मनिरपेक्षता हमारे संविधान की मूल आत्मा है और इसके संदर्भ में अनुच्छेद 14, 19, […]

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केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 75% आरक्षित पद रिक्त क्यों?

March 21, 2021

प्रीति सिंह देश के 44 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 6,074 पद रिक्त हैं, जिनमें से 75 प्रतिशत पद आरक्षित श्रेणी के हैं। अन्य पिछड़े वर्ग के आधे से ज़्यादा पद खाली पड़े हैं। प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट में ओबीसी, एससी, एसटी की स्थिति और ख़राब है, जहाँ इस वर्ग के लिए सृजित कुल पदों में 60 […]

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बैंकों का निजीकरण या निजीकरण के नाम जनता के पैसे को लूटने का रास्ता

March 18, 2021

अजय कुमार अगर प्राइवेट बैंक बहुत ही शानदार थे तो बैंकों का राष्ट्रीयकरण क्यों हुआ? क्या प्राइवेट बैंक जनकल्याण से जुड़े क्षेत्रों में पैसा लगाएंगे? जब कॉरपोरेट लोगों ने सरकारी बैंक का पैसा नहीं लौटाया तो जब वह बैंकों के मालिक होंगे, तब क्या करेंगे? बैंकों के निजीकरण का विरोध करने के लिए बैंक के […]

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बीजेपी के निशाने पर: किसान और बंगाल – अभिसार शर्मा

March 17, 2021

  न्यूज़ चक्र में अभिसार शर्मा तीन मुद्दों की चर्चा कर रहे हैं । किस तरह किसान बीजेपी को बंगाल से लेकर मध्य प्रदेश तक चुनौती देरहा है। मोदी सरकार ने किस तरह दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार की ताकत कम करने की योजना बनाई और क्या बंगाल चुनावों में बिखर रहा है बीजेपी का […]

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‘मोदी सरकार को सबसे बड़ी चुनौती किसानों ने दी है’ – आशीष नंदी, परंजॉय गुहा ठाकुरता

March 16, 2021

जाने-माने समाजशास्त्री और राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर आशीष नंदी से किसान आंदोलन के 100 दिन पूरा होने और इसके प्रभावों को लेकर परंजॉय गुहा ठाकुरता की वीडियो बातचीत के प्रमुख अंश। इसका लिप्यंतरण/अनुवाद युवा पत्रकार हिमांशु शेखर ने किया है। इस पूरी बातचीत को आप यहाँ सुन सकते हैं- किसान आंदोलन के 100 दिन हो गए हैं […]

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बैंक निजीकरण, नोटबंदी से भी बड़ी मूर्खता होगी

March 15, 2021

बी. सिवरामन  ‘‘ राष्ट्रीय हित में, बैंक कर्मियों ने शपथ ली है कि वे मोदी को उनके इस ख़तरनाक पथ पर आगे नहीं बढ़ने देंगे और वे प्रतिरोध में अब संघर्षशील किसानों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाते हुए आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ” अभी दो, इसके बाद चार, और अंत में एक छोड़कर सभी बारह! इस […]

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क्या आरएसएस भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के बिना काम कर सकती है?

March 12, 2021

अजय गुदावर्ती देश की अधिकांश राजनीतिक पार्टियां नवउदारवाद की नीतियों की समर्थक हैं, जो आरएसएस के लिए उपजाऊ ज़मीन तैयार करती है और वह सभी पार्टियों और संस्थाओं को अपने अधिपत्य की कल्पना के भीतर लाना चाहती है। समालोचक, विचारक और एक्टिविस्ट नौम चॉम्स्की ने अमेरिका को एक “कॉर्पोरेट लोकतंत्र” के रूप में संदर्भित किया […]

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खुला पत्र: मीलॉर्ड ये तो सरासर ग़लत है, नहीं चलेगा!

March 3, 2021

भाषा सिंह संभवतः पहली बार देश के मुख्य न्यायाधीश को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र देश की महिला संगठनकर्ताओं, नारीवादियों ने लिखा है—जिसमें उनसे सीधे-सीधे यह पूछा गया है कि 1 मार्च 2021 को एक बलात्कार के मामले सुनवाई करते हुए आखिरकार किस तरह से बलात्कार आरोपी के सामने यह सुझाव रखते हैं कि […]

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किसान आंदोलन के नये राग और सरकार की बढ़ती मुश्किलें

March 2, 2021

अनिल शुक्ल कृषि क़ानूनों के विरुद्ध शुरू हुए किसान आंदोलन ने आज़ादी के बाद के तेलंगाना आंदोलन के मज़दूर एकता के तत्वों को भी स्वीकार करना प्रारम्भ कर दिया है। टिकैत के सम्बोधन को इसी रौशनी में देखा जाना चाहिये। निजीकरण और बीजेपी की दूसरी आर्थिक नीतियों के विरोध में श्रमिकों का जिस प्रकार का […]

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राजद्रोह का क़ानूनः सिमटे तो दिले आशिक़ फैले तो ज़माना है

February 27, 2021

अरुण कुमार त्रिपाठी  “आज देश और दुनिया की भलाई इसी में है कि लफ़्ज़े मोहब्बत का दायरा निरंतर फैले और सारे ज़माने को अपने में समेट ले। जबकि राजद्रोह का दायरा निरंतर संकुचित हो…।”जिगर मुरादाबादी से माफ़ी मांगते हुए लफ़्ज़े मोहब्बत के बारे में कही गई उनकी प्रसिद्ध पंक्तियों की विरोधाभासी तुलना राजद्रोह के कानून […]

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