सरोकार

पुरुषोत्तम शर्मा जैसे मर्द यह क्यों मानते हैं कि घरेलू हिंसा एक ‘पारिवारिक मामला’ है ?

October 9, 2020

सोनाली खत्री अपनी पत्नी के साथ मार-पीट करना हमारे देश में कोई नई बात नहीं है। अपनी पत्नी को मारना और घरेलू हिंसा कोहमारे देश के अधिकतर घरों में एक सामान्य बात समझी जाती है। पुरुषोत्तम शर्मा का यह मामला तो बस हमें यह याद दिला रहा है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा हमारे घरों […]

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हाथरस पीड़िता को न्याय दिलाने का नैरेटिव आरोपियों को ‘इंसाफ़’ में किसने बदला?

October 9, 2020

अनिल शुक्ल / मीडिया ने गाँव के लोगों से ‘ध्वनि मत’ कराना शुरू कर दिया। हर संवाददाता अपने-अपने लाइव टेलीकास्ट पर है। सबकी अपनी-अपनी ‘ध्वनि मत सभाएँ’ सजी हैं। ‘जो आरोपियों को सजा दिए जाने के पक्ष में हैं, वे गर्दन झुका लें! गिनी-चुनी गर्दनें दिखीं। झटके से सब की सब झुक गईं। ‘जो आरोपियों […]

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ये नेता आख़िर महिलाओं को समझते क्या हैं!

October 8, 2020

सोनिया यादव हाथरस मामले में आए दिन बीजेपी मंत्री और नेता अपनी बेतुकी बातों से महिलाओं की अस्मिता को ठेस पहुंचा रहे हैं। हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है लेकिन इन बयानों पर बीजेपी महिला नेताओं की चुप्पी गंभीर सवालों के घेरे में है।  उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक दुष्कर्म और हत्या […]

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गांधी, गोडसे और हिंदुत्व के भीतर के ‘पौरुष’ की तलाश

October 6, 2020

नीलांजन मुखोपाध्याय गांधी की हत्या और उस हत्या को बहादुरी की तरह पेश किया जाना भी उसी तरह का सुबूत है, जिस तरह बाबरी मस्जिद का विध्वंस या इसी तरह की दूसरी हरक़तें हैं। गांधी की जिस छवि का इस्तेमाल राज्य काज में लगी हुई संघ परिवार की शाखा की तरफ़ से लगातार किया जा […]

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आरएसएस का हिंदू राष्ट्रवाद यानी सवर्णों का विद्रोह – ज्याँ द्रेज़

October 5, 2020

भारत में ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ लोकतंत्र की समतावादी माँगों के ख़िलाफ़ उच्च जातियों के विद्रोह के रूप में देखा जा सकता है। हिंदुत्व परियोजना उच्च जातियों के लिए एक जीवनदान है जिसमें अब तक ब्राह्मणवादी सामाजिक व्यवस्था को स्थापित करने का वादा किया गया है। भारत में ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ की हालिया उठापटक, जाति को ख़त्म करने […]

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हाथरस रेप मामले में पीड़िता को दलित लड़की कहकर पुकारना क्यों ज़रूरी है?

October 3, 2020

अजय कुमार हाथरस वाले मामले में दोहरा संयोग या ‘प्रयोग’ ये हुआ है कि एक तो वह स्त्री थी और दूसरी बात वह दलित थी। इसलिए क्रूरता ही नहीं हुई बल्कि भयानक क्रूरता हुई। इसे ऐसे समझा जाए कि लिंग के आधार पर तो मर्दों ने उस पर अपना हक माना ही साथ में जाति के आधार […]

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राम माधव को पद से हटने के बाद हिटलर और स्टालिन की याद क्यों आयी? – आशुतोष

October 3, 2020

राम माधव किसी दल, सरकार और नेता का ज़िक्र नहीं करते। लेकिन आसानी से समझा जा सकता है कि वो कहाँ पर निशाना लगा रहे हैं। कौन सी पार्टी सरकार के सामने पूरी तरह से बिछ गयी है। और वो कौन सा नेता है जिसके सत्ता में आगमन के बाद और पहले भी प्रतिद्वंद्वियों को […]

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किसानों में आक्रोश को लेकर गांधी ने जो चेतावनी दी थी क्या आज हम उसी का सामना कर रहे हैं?

October 2, 2020

अव्यक्त आजाद भारत की सत्ता में किसानों की भागीदारी की वकालत करने वाले महात्मा गांधी ने अपनी मौत से एक दिन पहले तक कहा था कि भारत का प्रधानमंत्री एक किसान होना चाहिए आधुनिक भारत में संगठित किसान आंदोलन के जनकों में से एक प्रोफेसर एनजी रंगा स्वयं एक किसान के बेटे थे. उन्होंने गुंटूर […]

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लाल बहादुर शास्त्री: जिनकी एक आवाज़ पर लाखों भारतीयों ने छोड़ दिया था एक वक़्त का खाना

October 2, 2020

रेहान फ़ज़ल वाक़या 26 सितंबर, 1965 का है. भारत-पाकिस्तान युद्ध ख़त्म हुए अभी चार दिन ही हुए थे. जब प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हज़ारों लोगों के सामने बोलना शुरू किया तो वो कुछ ज्यादा ही अच्छे मूड में थे. तालियों की गड़गड़ाहट के बीच शास्त्री ने ऐलान किया, “सदर […]

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भारत के किसानों ने सच्चाई को भांप लिया है लेकिन अर्थशास्त्री उस सच्चाई को देखने समझने में चूक कर रहे हैं-योगेंद्र यादव

October 1, 2020

खेती-बाड़ी का जो अर्थशास्त्र है उसे क्या देश के किसान, अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी से बेहतर जानते-समझते हैं ? बात आपको अटपटी लगेगी और हास्यास्पद भी लेकिन इस प्रश्न का उत्तर है- हां! प्रोफेसर अशोक गुलाटी भारत के अग्रणी कृषि-अर्थशास्त्री हैं. वे उन विद्वानों में हैं जिनका लिखा मैं गौर से पढ़ता हूं, अक्सर सलाह-मशविरा करता […]

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