सरोकार

किसान आंदोलन पर क्या मोदी और आरएसएस में मतभेद है?

January 27, 2021

रविकान्त  तीन अंक को अशुभ मानने वाले संघ ने आज़ादी के बाद दशकों तक तिरंगा नहीं फहराया। लेकिन छद्म राष्ट्रवाद के ज़रिए राष्ट्रीय राजनीति में दाखिल होने के लिए संघ ने पहले मजबूरी में तिरंगे को अपनाया और सत्ता में आते ही भगवा को आगे बढ़ा दिया। मोदी सरकार में खुलकर बीजेपी की रैलियों, उसके […]

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कुर्रतुल ऐन हैदर : उस माला का एक मनका जो अमीर खुसरो और कबीर जैसे मनकों से बनी है

January 20, 2021

अनुराग भारद्वाज कुर्रतुल ऐन हैदर मानती थीं कि मज़हबी समस्याओं का हल मिली-जुली तहज़ीब में ही है और वह किसी अखबार की सुर्ख़ी नहीं जो दूसरे दिन ही भुला दी जाए दिन… नहीं पता. महीना… वो भी नहीं पता. साल… शायद 1960. जगह… लन्दन या पाकिस्तान का कोई एक शहर… एक बड़े हॉल में दो […]

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भारत में वैक्सीन के दुष्परिणाम के लिए क्यों नहीं है मुआवज़ा स्कीम?

January 19, 2021

हरजिंदर नार्वे में जिस तरह फाइज़र की वैक्सीन लगने के बाद 29 बुजुर्गों का निधन हुआ, उसे हमें समझना होगा। भारत में भी वैक्सीन के विपरीत असर की खबरें आ रही हैं। चिकित्सा की भाषा में इस विपरीत असर को वैक्सीन इंजरी कहा जाता है और पिछले कुछ दशक में इस पर दुनिया भर में […]

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अंतरधार्मिक विवाह को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद हालात बदलेंगे?

January 15, 2021

सोनिया यादव इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि स्पेशल मैरिज ऐक्ट  के तहत शादी करने वाले जोड़ों को अब किसी सार्वजनिक नोटिस की ‘बाधा’ से नहीं गुज़रना होगा। नोटिस को अनिवार्य बनाना ‘स्वतंत्रता और निजता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन’ होगा। उत्तर प्रदेश में एक ओर बीजेपी की योगी आदित्यनाथ […]

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विवेकानंद ने बताया था कि देशभक्ति किसे कहते हैं!

January 13, 2021

अनिल जैन जयंती विशेष: स्वामी विवेकानंद अगर आज ज़िंदा होते तो उनकी नसीहतें सुनकर हिंदू कट्टरता के प्रचारक उन्हें भी सूडो सेकुलर, शहरी नक्सली या हिंदू विरोधी करार देकर पाकिस्तान चले जाने की सलाह दे रहे होते। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके पास अपना कोई […]

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एनहेडुआना : विश्व का सबसे पहला साहित्य लिखने वाली मेसोपोटामिया की महिला

January 12, 2021

श्वेता चौहान महान सर्गोन की पुत्री एनहेडुआना जिसका समय 2285 से 2250 ईसा पूर्व माना जाता है। सर्गोन, प्राचीन सुमेर सभ्यता जिसे उस समय मेसोपोटामिया और अभी इराक की भूमि कहा जाता है, का प्रतापी राजा था।  तीन महान ग्रंथों के अलावा एनहेडुआना ने लगभग 42 कवितायेँ और लिखीं हैं जिसमें उसने अपने जीवन की सारी […]

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देशभक्ति, धर्म और आरएसएस की सोच -राम पुनियानी

January 10, 2021

जो चिन्तक और लेखक हिन्दू राष्ट्रवाद में यकीन रखते हैं और आरएसएस की सोच से सहमत है, वे दिन-रात इस जुगत में लगे रहते हैं कि किसी प्रकार गाँधीजी और अन्य राष्ट्रीय नायकों के भाषणों, वक्तव्यों और लेखन से ऐसे शब्द, ऐसे वाक्य खोज निकाले जाएं जिनसे यह साबित किया जा सके कि भारतीय राष्ट्र […]

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अंधभक्तों के ज़ोर पर राष्ट्र को महान बनाने की ऐतिहासिक शर्मिंदगी

January 9, 2021

नवीन कुमार जब लोकतंत्र के रास्ते से एक कमअक्ल, मूर्ख और सनकी आदमी किसी देश की सत्ता पर काबिज हो जाता है तो वही होता है जो अमेरिका में हुआ है। रिपब्लिकन पार्टी की हार से बौखलाए हुए डोनाल्ड ट्रम्‍प के समर्थक अमेरिका माता की जय बोलकर संसद में घुस गए। सदन के सभापति की […]

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सुप्रीम कोर्ट को क्यों खटकने लगीं जनहित याचिकाएँ!

January 7, 2021

विप्लव अवस्थी “जनहित याचिकाएँ सरकार के विरोधियों और सिविल सोसाइटी के लोगों का एक औज़ार बनती जा रही हैं, जिसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है।” यह कहना है देश के सर्वोच्च न्यायालय का, जिसका मानना है कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट जनहित के मामलों में सर्वोच्च संस्था नहीं बन सकतीं। सुप्रीम कोर्ट […]

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‘सोशलिस्ट’ और ‘सेकुलर’ संविधान के 45 साल

January 6, 2021

 नित्यानंद गायेन भारतीय लोकतंत्र में आज के दिन का विशेष ऐतिहासिक महत्त्व है. 3 जनवरी 1976 को 42वें संविधान संशोधन के जरिये संविधान की प्रस्तावना में समाजवादी और पंथनिरपेक्ष शब्द जोड़े गये थे. यह संशोधन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था. संविधान के 42वें संशोधन (1976) द्वारा संशोधित यह उद्देशिका कुछ इस तरह है: […]

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