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विमर्श

“बटलर हिन्दी” – प्रभाकर चौबे

September 14, 2020

आज हिन्दी दिवस पर पढ़ें प्रभाकर चौबे का पूर्वप्रकाशित लेख ‘बटलर हिन्दी’…. आज हिन्दी भाषा के अखबार ‘बटलर हिन्दी’ लिखे जा रहे हैं और कहते हैं कि यही आज की भाषा है। लगता है मैनेजमेंट उन्हें जनता की भाषा भ्रष्ट करने के लिए ही रखती है। आज हिन्दी अखबार उठा लीजिए। आपको मजेदार ‘बटलर हिन्दी’ […]

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भारतीय मीडिया क्यों नहीं सुन रहा आने वाली क्रांति की आहट?

September 14, 2020

जस्टिस मार्कंडेय काटजू ऐतिहासिक अनुभव से पता चलता है कि क्रांतियाँ तब होती हैं जब करोड़ों लोग इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि किसी भी तरह से अब पुराने तरीक़े से रहना असंभव है। यह स्थिति भारत में तेज़ी से आ रही है। हमारा मीडिया शुतुरमुर्ग की तरह बर्ताव करना जारी रख सकता है, आने […]

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निजीकरण के दौर में शिक्षक दिवस- प्रभाकर चौबे

September 5, 2020

      5 सितंबर को प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस मनाया जाता है। अब शिक्षक दिवस ने राष्ट्रीय त्योहार का रूप ले लिया है। इसे एक तरह से राष्ट्रीय त्योहार का दर्जा मिल गया है। शिक्षक दिवस अब विद्यालयों तक ही सीमित नहीं है। पहले केवल स्कूलों में ही शिक्षक दिवस मनाया जाता था। पहले प्राथमिकता हाई स्कूल […]

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छत्तीसगढ़ विधान सभा मानसून सत्रः विपक्ष पस्त, सरकार मस्त- जीवेश चौबे

September 2, 2020

हाल ही में छत्तीसगढ़ विधान सभा का मानसून सत्र समाप्त हुआ। क्योंकि 6 माह में एक सत्र ज़रूरी होता है अतः पहले ही यह कह दिया गया था कि संवैधानिक बाध्यता और औपचारिकताओं के लिए ही यह सत्र आयोजित किया जा रहा है। चार दिन तक चले सत्र में आपात जरूरतों के बहाने अनूपूरक बजट […]

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लम्बे समय से क़ायम अमेरिका की जाति व्यवस्था पर इसाबेल विल्करसन का लेख

August 31, 2020

पुलित्जर पुरस्कार से पुरस्कृत लेखिका,इसाबेल विल्करसन द्वारा लम्बे समय से क़ायम अमेरिका की जातीय व्यवस्था पर ध्यान खींचने वाला एक लेख उनकी नयी पुस्तक, कास्ट: द लाइज़ दैट डिवाइड अस के हिस्से का एक संपादित अंश है। उस भारतीय के लिए यह लेख बेहद चौंकाने वाला है, जिसकी जाति उसके पैदा होने से लेकर मौत […]

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कोविड काल में मीडिया, पुलिस और तबलीगी जमात -राम पुनियानी

August 29, 2020

सरकार द्वारा किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद देश में कोरोना का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है. पूरे देश में इस रोग के प्रसार और उसके कारण लगाए गए प्रतिबंधों से एक बड़ी आबादी बहुत दुःख और परेशानियां झेल रही है. इस साल की फरवरी की शुरूआत में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने […]

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शांति निकेतन’ को तो सियासी अशांति का अखाड़ा न बनाएँ…

August 27, 2020

अजय बोकिल देश का एक अन्यतम और अत्यंत प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान, जो अगले साल अपनी स्थापना की शताब्दी मनाने जा रहा हो, वो इन दिनों घटिया राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो चुका है। जिसके नाम में ही ‘शांति’ हो, जिसकी स्थापना एक वैश्विक संवाद केन्द्र के रूप में की गई हो, वो ‘शांति निकेतन’ […]

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नफरत बेचो, मुनाफ़ा कमाओ: फेसबुक की इंडिया स्‍टोरी और उससे आगे- सुभाष गाताडे

August 24, 2020

कुछ वाकई में मनोरोगी जैसे दिख रहे थे। लोगों का बहुलांश चिथड़े लपेटे और निरक्षर किसानों का था, जो तुत्सी के प्रति नफरत की भावना से आसानी से उन्माद में आ सकते थे। मैं जिनसे मिला उनमें शायद सबसे भयावह लोग थे शिक्षित राजनीतिक अभिजात, आकर्षक व्यक्तित्व वाले और नफासत भरे स्त्री और पुरुष, जो […]

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परसाई : लेखन से झांकता समय – प्रभाकर चौबे

August 22, 2020

व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई के लेखन पर उन्हीं की परम्परा के प्रतिष्ठित व्यंग्यकार प्रभाकर चौबे का आलेख –  “मैं ऐसा मानता हूँ कि परसाई जी का लेखन भी एक्टीविज्म का एक जरूरी हिस्सा रहा । वे अपने लेखन को एक्टीविज्म के एक हिस्से के रूप में लेते थे और इसी कारण उनका लेखन मनोरंजन […]

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हमारे समय के हीरो? – सुभाष गाताडे

August 18, 2020

फिलिस्तीनी कवि महमूद डारविश की कविता मेमोरी फॉर फ़ॉरगेटेबिलिटी 1982 में लेबनान पर इज़राइली आक्रमण का पीछा करती है जिसमें बेरुत, जहाँ वे खुद रहते थे पर बमबारी की गई थी। उन्होंने लिखा था कि “बेरूत, इजरायल के टैंकों और आधिकारिक तौर पर लकवाग्रस्त अरब से घिरा हुआ था,”। बेरुत बड़े धैर्य से जमा हुआ […]

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