विमर्श

फ्रेडरिक एंगेल्स – व्ला. इ. लेनिन

November 28, 2020

 फ्रेडरिक एंगेल्स (जन्मतिथिः 28 नवम्बर, 1820) मज़दूर वर्ग और समस्त मानवता की मुक्ति की विचारधारा, वैज्ञानिक कम्युनिज़्म के सिद्धान्त को विकसित करने कार्ल मार्क्स के अनन्य सहयोगी और मित्र थे। आधुनिक सर्वहारा के महान शिक्षकों में कार्ल मार्क्स के बाद उनका ही नाम आता है। मार्क्स की मृत्यु के बाद एंगेल्स अंतिम साँस तक यूरोप […]

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गांधीः चमकाओ इतना कि पूरा देश, पूरी दुनिया इस चमक से भर जाए – प्रियंवद

October 2, 2020

मेरे पास गांधी की पीतल की एक प्रतिमा है। करीब सवा फिट ऊँची। बहुत पहले मेरे पिता पैंतीस रुपए में खरीद कर लाए थे। कहाँ से, यह मुझे याद नहीं। प्रतिमा तीन सीढ़ियों के ऊपर रखी है। गांधी का ‘बस्ट’ बना है। पीतल पर सारा काम है। गांधी के चादर की सलवटें, गले की झुर्रियाँ, […]

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लेनिन की किताब के उस मुड़े हुए पन्‍ने में अटकी देश की जवानी

September 28, 2020

संदीप राउज़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने बीते रविवार को अपने 69वें ‘मन की बात’ में शहीदे आज़म भगत सिंह की बहादुरी और साहस का ज़िक्र करते हुए कहा कि “क्या आज कोई कल्पना कर सकता है कि जिस अंग्रेज़ी राज में कभी सूरज नहीं डूबता था, वो 23 साल के नौजवान से भयभीत […]

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क्या सरकार अब सोशल मीडिया और न्यूज पोर्टलों का मुँह बंद करना चाहती है ? – जीवेश चौबे

September 22, 2020

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज़ चैनल की मंशा व नीयत पर सवाल उठाते हुए पर ‘यूपीएससी जिहाद’ कार्यक्रम के प्रसारण पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है, ‘आप एक धर्म विशेष को टारगेट नहीं कर सकते किसी एक विशेष तरीक़े से।’ सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के चलते […]

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“बटलर हिन्दी” – प्रभाकर चौबे

September 14, 2020

आज हिन्दी दिवस पर पढ़ें प्रभाकर चौबे का पूर्वप्रकाशित लेख ‘बटलर हिन्दी’…. आज हिन्दी भाषा के अखबार ‘बटलर हिन्दी’ लिखे जा रहे हैं और कहते हैं कि यही आज की भाषा है। लगता है मैनेजमेंट उन्हें जनता की भाषा भ्रष्ट करने के लिए ही रखती है। आज हिन्दी अखबार उठा लीजिए। आपको मजेदार ‘बटलर हिन्दी’ […]

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भारतीय मीडिया क्यों नहीं सुन रहा आने वाली क्रांति की आहट?

September 14, 2020

जस्टिस मार्कंडेय काटजू ऐतिहासिक अनुभव से पता चलता है कि क्रांतियाँ तब होती हैं जब करोड़ों लोग इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि किसी भी तरह से अब पुराने तरीक़े से रहना असंभव है। यह स्थिति भारत में तेज़ी से आ रही है। हमारा मीडिया शुतुरमुर्ग की तरह बर्ताव करना जारी रख सकता है, आने […]

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निजीकरण के दौर में शिक्षक दिवस- प्रभाकर चौबे

September 5, 2020

      5 सितंबर को प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस मनाया जाता है। अब शिक्षक दिवस ने राष्ट्रीय त्योहार का रूप ले लिया है। इसे एक तरह से राष्ट्रीय त्योहार का दर्जा मिल गया है। शिक्षक दिवस अब विद्यालयों तक ही सीमित नहीं है। पहले केवल स्कूलों में ही शिक्षक दिवस मनाया जाता था। पहले प्राथमिकता हाई स्कूल […]

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छत्तीसगढ़ विधान सभा मानसून सत्रः विपक्ष पस्त, सरकार मस्त- जीवेश चौबे

September 2, 2020

हाल ही में छत्तीसगढ़ विधान सभा का मानसून सत्र समाप्त हुआ। क्योंकि 6 माह में एक सत्र ज़रूरी होता है अतः पहले ही यह कह दिया गया था कि संवैधानिक बाध्यता और औपचारिकताओं के लिए ही यह सत्र आयोजित किया जा रहा है। चार दिन तक चले सत्र में आपात जरूरतों के बहाने अनूपूरक बजट […]

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लम्बे समय से क़ायम अमेरिका की जाति व्यवस्था पर इसाबेल विल्करसन का लेख

August 31, 2020

पुलित्जर पुरस्कार से पुरस्कृत लेखिका,इसाबेल विल्करसन द्वारा लम्बे समय से क़ायम अमेरिका की जातीय व्यवस्था पर ध्यान खींचने वाला एक लेख उनकी नयी पुस्तक, कास्ट: द लाइज़ दैट डिवाइड अस के हिस्से का एक संपादित अंश है। उस भारतीय के लिए यह लेख बेहद चौंकाने वाला है, जिसकी जाति उसके पैदा होने से लेकर मौत […]

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कोविड काल में मीडिया, पुलिस और तबलीगी जमात -राम पुनियानी

August 29, 2020

सरकार द्वारा किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद देश में कोरोना का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है. पूरे देश में इस रोग के प्रसार और उसके कारण लगाए गए प्रतिबंधों से एक बड़ी आबादी बहुत दुःख और परेशानियां झेल रही है. इस साल की फरवरी की शुरूआत में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने […]

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