आलेख | समसामायिक | विमर्श | नजरिया | सरोकार

ब्रेकिंग न्यूज़ :

नामवरी जीवन और एकांत भरा अंतिम अरण्य जीवेश प्रभाकर...............युद्धोन्माद की यह लहर उत्तर भारत में ही क्यों बहती है?..................जाति और योनि के कठघरे में जकडा भारतीय समाज........................नई करवट लेता भारत का किसान आन्दोलन.....................प्रधानमंत्री पांच मिनट के लिए भी राजनीति बंद नहीं कर सकते, हमारे बीच यही अंतर है : राहुल गांधी......................आदिवासियों की बेदखली पर सुप्रीम कोर्ट की रोक.......................3 मार्च को दिल्ली संसद मार्ग पर मज़दूर अधिकार संघर्ष रैली.......................... | रामनरेश राम : किसानों की मुक्ति के प्रति प्रतिबद्ध एक क्रांतिकारी कम्युनिस्ट-------------10 वां पटना फिल्मोत्सव ----------------असीमित अपेक्षाओं और वायदों के अमल की चुनौतियों की पहली पायदान पर ख़रे उतरे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल----------नई करवट लेता भारत का किसान आन्दोलन------------------अजीत जोगी : न किंग बने न किंगमेकर -दिवाकर मुक्तिबोध----------------------- | राजनीति का समाजशास्त्रीय अध्ययन---प्रभाकर चौबे------मुफ्त सार्वजनिक परिवहन का यह एस्तोनियाई मॉडल बाकी दुनिया के लिए कितना व्यावहारिक है?------------कितना मुमकिन हैं कश्मीर में पंचायत चुनाव---------कुलदीप नैयर का निधन-------चे गेवारा : एक डॉक्टर जिसके सपने जाने कितनों के अपने बन गए--------निराश करता है 'भावेश जोशी--------तर्कशील, वैज्ञानिक, समाजवादी विवेकानंद-- डा दत्तप्रसाद दाभोलकर-------डॉनल्ड ट्रंप पर महाभियोग का कितना खतरा----- | राजनीति में शांत रस काल चल रहा -प्रभाकर चौबे सबके हबीब - जीवेश प्रभाकर'महागठबंधन' लोगों की भावना है न कि राजनीति, बीजेपी के खिलाफ पूरा देश एकजुट:राहुल गांधीफीफा वर्ल्ड कप , जानिए कुछ रोचक तथ्यचे गेवारा : एक डॉक्टर जिसके सपने जाने कितनों के अपने बन गए..निराश करता है 'भावेश जोशी.फीफा वर्ल्ड कप , जानिए कुछ रोचक तथ्य. | | नक्सली हिंसा छोड़े तो वार्ता को तैयार : मनमोहन | केन्द्रीय निगरानी समिति के अध्यक्ष ने राजधानी में किया दो राशन दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण | मुख्यमंत्री से न्यायमूर्ति श्री वाधवा की सौजन्य मुलाकात | राशन वितरण व्यवस्था का जायजा लेंगे न्यायमूर्ति श्री डी.पी.वाधवा | सरकार कश्मीर के बारे में पूरी तरह बेखबर : करात |
आलेख
भारतीय लोकतंत्र: कमजो़र विपक्ष के चलते पनपता अधिनायकवाद ः जीवेश चौबे
एक सशक्त विपक्ष किसी भी लोकतंत्र की जीवंतता और मूल्यों की रक्षा के लिए बहुत जरूरी है।भारतीय लोकतंत्र की शुरुआत कमजोर विपक्ष से हुई और दशकों ये परंपरा बनी रही। देखा जाए तो कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़कर समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ही थे जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र में संयुक्त विपक्ष की कल्पना को साकार किया और सिखाया कि संयुक्त विपक्ष क्या होता है और उसे क्या करना चाहिए। यह बात गौरतलब है कि भारत में हमेशा से कुल मतदान का आधे से अधिक प्रतिशत मत विपक्षी दलों के पास रहा, लेकिन खण्ड-खण्ड में विभाजित होने के कारण विपक्ष की आवाज नकारी जाती रही है । हाल के दशकों में क्षेत्रीय छत्रपों के बढ़ते प्रभाव के चलते छोटे-छोटे दल भी बड़ा खेल करने की स्थिति में आ गए हैं। इस प्रवृत्ति के चलते राष्ट्रीय दल इन क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल को मजबूर होते जा रहे हैं। छोटे दायरे में सिकुड़ते चले जाने के कारण केन्द्रीकृत विपक्ष की ताकत में भारी कमी आने लगी है।
विमर्श    
अमेरिकी विपक्षी खेमे में गूंजा कश्मीर का मुद्दा, बर्नी सैंडर्स ने कहा-कश्मीर पर भारत की पाबंदी बर्दाश्त नहीं
अंतरराष्ट्रीय जगत में सत्ता पक्ष के साथ-साथ अब विपक्षी नेता भी कश्मीर के मसले पर बोलने लगे हैं। अमेरिका के लोकप्रिय विपक्षी नेता और डेमोक्रैटिक पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बर्नी सैंडर्स ने कश्मीर के मसले पर अमेरिकी सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में भारत की पाबंदी स्वीकार्य नहीं है। अमेरिका में आयोजित एक सभा में उन्होंने कहा कि मैं कश्मीर की स्थिति को लेकर भी चिंतित हूं जहां भारत सरकार ने कश्मीर की स्वायत्तता को खत्म कर दिया है। और असहमति का गला घोंट दिया है। साथ ही पूरी संचार व्यवस्था को ठप कर दिया गया है। सुरक्षा के नाम पर किए गए हमले का नतीजा यह है कि कश्मीरी मेडिकल कैंप तक नहीं जा सकते हैं।
संस्कृति --- हरिशंकर परसाई
रंगीन आदमी बोला, 'ठहरो, तुम इस प्रकार उसका हित नहीं कर सकते। तुम केवल उसके तन की भूख समझ पाते हो, मैं उसकी आत्मा की भूख जानता हूँ। देखते नहीं हो, मनुष्य-शरीर में पेट नीचे है और हृदय ऊपर। हृदय की अधिक महत्ता है।' पहला आदमी बोला, 'लेकिन उसका हृदय पेट पर ही टिका हुआ है। अगर पेट में भोजन नहीं गया तो हृदय की टिक-टिक बंद नहीं हो जाएगी!' रंगीन आदमी हँसा, फिर बोला, 'देखो, मैं बतलाता हूँ कि उसकी भूख कैसे बुझेगी!' यह कहकर वह उस भूखे के सामने बाँसुरी बजाने लगा। दूसरे ने पूछा, 'यह तुम क्या कर रहे हो, इससे क्या होगा?' रंगीन आदमी बोला, 'मैं उसे संस्कृति का राग सुना रहा हूँ। तुम्हारी रोटी से तो एक दिन के लिए ही उसकी भूख भागेगी, संस्कृति के राग से उसकी जनम-जनम की भूख भागेगी।'
आंख खोलने वाली फिल्म- द ग्रेट हैक- अरुण माहेश्वरी
गूगल, फेसबुक, अमेजन, टेस्ला आदि दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की पूंजी है उनके पास उपलब्ध लोगों के बारे में डाटा का विशाल खजाना । इनके लिये आदमी ही इनका माल है । वे आदमी संबंधी सूचनाओं का नाना रूप में इस्तेमाल करके, यहां तक कि बेच कर भी खरबों डालर का अपना कारोबार चलाते हैं । दुनिया में जितने ऑनलाइन ऐप तैयार किये जाते हैं, वे सभी इन जानकारियों के आधार पर ही होते हैं जिनसे आम लोगों की जरूरतों का पता सिलिकन वैली के ऐप तैयार करने वालों को रहता है । The Great Hack । 2016 में ट्रंप के चुनाव और फिर इंगलैंड में ब्रेक्सिट पर हुए जनमत-संग्रह में डाटा विश्लेषण के काम में लगी एक कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका (सीए) के कामों पर केंद्रित फिल्मनुमा वृत्तचित्र । इन दोनों मामलों में ही कैम्ब्रिज के कामों को यूरोप और अमेरिका की अदालतों में चरम अपराधपूर्ण पाया गया और अब तो उस कंपनी का रहस्यमय ढंग से नामो-निशान ही जैसे मिट गया है । इसके खिलाफ अपराधी मामलों में इसके अंदर के ही तमाम लोग मुखबिर बन गये थे ।
सरोकार      
हांगकांग में हो रहे प्रदर्शनों पर चीनी लोगों की राय
पत्रकार जोस कियान का मानना है कि करीब 90 प्रतिशत चीनी लोग हांगकांग में हो रहे प्रदर्शनों की निंदा करते हैं. कियान शंघाई में ही रहते हैं और कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए काम करते हैं और इस शहर की नब्ज को अच्छे से समझते हैं. वे कहते हैं कि शंघाई के लोगों को अच्छे से पता है कि हांगकांग में कुछ तो चल रहा है," वे यह तो नहीं जानते कि इसके पीछे की असल वजह क्या है या कितने लंबे समय से यह चल रहा है और इसके पीछे और क्या क्या हुआ है. उन्हें शायद यह भी ना पता हो कि इन प्रदर्शनकारियों की मांगें क्या हैं. शंघाई के लोगों की राय सिर्फ हांगकांग के लोगों की नाराजगी और वहां के हिंसा के डर तक सीमित है.हांगकांग शहर की एक पूर्व कर्मचारी कहते हैं, " मैं हांगकांग पुलिस का समर्थन करती हूं. जब से हांगकांग चीन का हिस्सा बना है तब से आर्थिक विकास तेजी से हुआ है
दुनिया का दूसरा सबसे खुशहाल देश जो अब भी राजतंत्र है
डेनमार्क भले ही एक साम्राज्य है लेकिन यहां राजशाही की शक्तियां सीमित है. राजा या रानी यहां बिना संसद की अनुमति के कोई फैसला नहीं कर सकते. डेनमार्क में संसद की एक सदनीय व्यवस्था है. 1953 तक यहां पर दो सदन हुआ करते थे. लेकिन इनको एक सदन बना दिया गया जिसे अब फोल्केटिंग के नाम से जाना जाता है. इसमें 179 सदस्य होते हैं. 175 सदस्य डेनमार्क और दो-दो सदस्य फैरो आइलैंड्स और ग्रीनलैंड से होते हैं. सभी सदस्यों का कार्यकाल चार साल का होता है. संसद सदस्यों का चुनाव समानुपातिक प्रतिनिधित्व से होता है. जिस पार्टी को चुनाव में जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं उसे उतनी सीट मिल जाती हैं. इसके लिए कम से कम दो फीसदी वोट पाना जरूरी होता है. 135 सीटों को संसदीय क्षेत्रों में बांट दिया जाता है जबकि 40 सीटें पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती हैं.
बैलाडीला अडानी खनन मामला : कछुए की चाल से चल रही है फर्जी ग्राम सभाओं की जाँच
विगत दिन 7 जून को आदिवासियों ने अपने विराजमान देवता पर्वत को अड़ानी को देने के विरोध में तीन जिले के हजारों आदिवासियों ने ऐतिहासिक हुंकार रैली और अनिश्चित कालीन प्रदर्शन कर फर्जी ग्राम सभा कर अड़ानी को ठेका में देने का विरोध किया था। एनएमडीसी और एनसीएल जॉइंट वेन्सर कपनी ने आडनी इंटरप्राइजेज कंपनी को 25 साल के लिए लौह अयस्क उत्खनन करने के लिए माइनिंग लीज ठेका में दिया है। अड़ानी के ठेकेदार के द्वरा माइनिंग करने के उस स्थान पर वनों को कटाई कर रहे थे तभी एका बड़ा आन्दोल संयुक्त पंचायत संघर्ष समिति के द्वारा हज़ारो आदिवासियों के साथ एनएमडीसी प्रशासनिक भवन के सामने 7 दिन तक अनिश्चित कालीन हड़ताल किया गया था। इस रैली को जिला प्रशासन और राज्य सरकार के द्वारा आंदोलनकरियो द्वारा उनकी दो शर्त मनाने के बाद आंदोलन को स्थगित किया गया था। जिनमे 15 दिवस के अंदर फर्जी ग्राम सभा की जांच होनी थी लेकिन दो बार जांच टलने के बाद दिनाँक 16 जुलाई को मात्र 29 लोगो का ही बयान दर्ज किया गया ।
मुंबई में ब्रिटिशकाल का बंकर बना भारत का पहला भूमिगत संग्रहालय
मुंबई में राजभवन के नीचे बना ब्रिटिश कालीन सुरंगनुमा ऐतिहासिक बंकर अब बेहद एक अंडरग्राउंड म्यूजियम बना दिया गया है. करीब सवा सौ साल पहले अंग्रेजों के वक्त में बने इस बंकर को अंग्रेजी शासन के ताकतवर गवर्नर को दुश्मनों से बचाने और राजभवन से सुरक्षित बचाकर निकालने के बनाया गया था. महाराष्ट्र के राजभवन परिसर में इतिहास का एक टुकड़ा ब्रिटिशकाल के बंकर के रूप में तीन साल पहले सामने आया था, जिसे अब आम जनता के देखने के लिए अक्टूबर 2019 से खोल दिया जाएगा. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 18 अगस्त को भारत के पहले भूमिगत संग्रहालय का अनावरण किया.यह सदी पुराना बंकर 15 हजार स्कावयर फीट में फैला है, जिसमें 13 कमरे और एक 20 फीट ऊंचा राजसी द्वार है.