क्या ऐसी तकनीक होनी चाहिए जो राज्य के लिए निजता का अतिक्रमण करे? – अपूर्वानंद

July 26, 2021

अपने बारे में जानकारियों को लेकर इतना संकोच क्यों? और क्या हम यह भी नहीं कहते रहे हैं कि हमें पारदर्शी होना चाहिए? वही अच्छा है जो बाहर और भीतर एक हो? हम ऐसा कुछ करें ही क्यों जिसे लेकर पर्दादारी करनी पड़े? निजता को लेकर दार्शनिक और क़ानूनी बहस होती रही है। मुझे मेरे व्यक्तित्व […]

Read More

व्यंग्यः तरह तरह के गुरु – प्रभाकर चौबे

July 24, 2021

चेला के साथ चांटी लगे रहते हैं, इसलिए कहा जाता है – गुरु के चेला चांटी बहुत हैं। चेला का मतलब तो समझ मे आया। चांटी का क्या अर्थ। खींच-कींचकर अर्थ निकाला छत्तीसगढ़ी मे चींटी के चांटी कहते हैं। तो चेला का मतलब प्रमुख चेला और उसके साथ-साथ जो छोटे-छोटे लोग आएं, वे चांटी, इसका […]

Read More

पेगाससगेट : हम सभी फ़िलीस्तीनियों की तरह स्वतंत्र इच्छा से वंचित हो सकते हैं

July 23, 2021

एजाज़ अशरफ़ यह सिर्फ राहुल गांधी, ममता बनर्जी, प्रशांत किशोर या पत्रकारों को फोन के माध्यम से ट्रैक किए जाने का मसला नहीं है। बल्कि चिंता इस बात की है कि दुनिया भर में कोई भी स्पाइवेयर की जासूसी/निगरानी से सुरक्षित नहीं है।यह बात संभव है कि भारत में जनता उन लोगों के नामों के […]

Read More

संसद के पास किसानों ने लगाई अपनी किसान संसदः पास किए कई प्रस्ताव

July 23, 2021

संसद भवन के निकट ऐतिहासिक किसान संसद के मानसून सत्र की जोर-शोर से शुरुआत – किसान-विरोधी एपीएमसी बाइपास अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत और अनुशासित बहस हुई। दिल्ली पुलिस द्वारा मीडिया को किसान संसद की कार्यवाही से दूर रखने की कोशिश को एसकेएम ने शर्मनाक प्रयास कहा और उसकी की निंदा की .केंद्र के […]

Read More

नए ज़माने के संत स्टेन स्वामी – राम पुनियानी

July 20, 2021

गत  5 जुलाई 2021 को भारतीय मानवाधिकार आंदोलन ने अपना एक प्रतिबद्ध, सिद्धांतवादी और अथक योद्धा खो दिया. फॉदर स्टेनीलॉस लोरडूस्वामी, जो स्टेन स्वामी के नाम से लोकप्रिय थे, ने मुंबई के होली स्पिरिट अस्पताल में अंतिम सांस ली. जिस समय वे अपनी मृत्युशैया पर थे उस समय उनकी जमानत की याचिका पर अदालत में […]

Read More

नवउदारवाद और धुर-दक्षिणपंथ की अजीबोगरीब सांठ-गांठ – प्रभात पटनायक

July 19, 2021

पहले वाले दौर के फासीवादी आंदोलनों ने अपनी शुरूआत बड़ी पूंजी के खिलाफ आंदोलनों के रूप में की थी। लेकिन अब के नव-फासीवादी तथा धुर-दक्षिणपंथी आंदोलन शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ–जो जनता को बेरोजगार बनाए रखती है-जायज गुस्से को भुनाने का कोई प्रयास करती नहीं दिखाई देती हैं।   पिछले कुछ अर्से में दुनिया भर में धुर-दक्षिणपंथी, […]

Read More

दो बूँद पानीः संक्रमण काल में तकनीकी और मनुष्य के सम्बन्ध की कहानी

July 17, 2021

“ख्वाजा अहमद अब्बास को लाल बहादुर शास्त्री ने राजस्थान में पानी की समस्या पर केंद्रित फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया और इस तरह “दो बूँद पानी” फिल्म का निर्माण हुआ। यह जिक्र अब्बास ने खुद अपनी बायोग्राफी “आय एम नॉट एन आयलैंड” में किया है जिसका हिंदी और उर्दू अनुवाद “मैं जजीरा नहीं हूँ” […]

Read More

राजद्रोह क़ानून पर सुप्रीम कोर्ट के तेवर तल्ख़ क्यों हैं?

July 16, 2021

यूसुफ़ अंसारी इस तरह की टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट कई बार कर चुका है। यह पहली बार है कि वह राजद्रोह के क़ानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा है। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट पहले कई बार राजद्रोह क़ानून को ख़त्म करने संबंधी याचिकाओं को खारिज कर चुका है।  सुप्रीम कोर्ट ने […]

Read More

स्मृति शेष: सुरेखा सीकरी उर्फ़ दादी मां यानी समानांतर सिनेमा के मज़बूत का स्तंभ का ढहना

July 16, 2021

आलोक शुक्ला बहुत कम अभिनेता या अभिनेत्री होते हैं जिनकी काया भी बोलती है, अभिनय के मामले में सुरेखा सीकरी एक ऐसी ही अभिनेत्री थीं जिन्हे आज की पीढ़ी दादी मां के रूप में जानती और खूब प्यार करती थी। रंगमंच की यह सशक्त हस्ताक्षर, समानांतर सिनेमा की मजबूत स्तंभ और जनमानस के दिलों में […]

Read More

आज़ाद भारत में गंभीर ख़तरा है राजद्रोह का क़ानून: सुप्रीम कोर्ट

July 15, 2021

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि देश के आज़ाद होने के 75 साल बाद भी क्या राजद्रोह के क़ानून की ज़रूरत है। अदालत ने कहा कि यह क़ानून औपनिवेशिक है और ब्रिटिश काल में बना था।   अदालत ने कहा है कि वह इस क़ानून की वैधता को जांचेगी और इस मामले में केंद्र सरकार का जवाब भी […]

Read More