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ब्रेकिंग न्यूज़ :

राजनीति का समाजशास्त्रीय अध्ययन---प्रभाकर चौबे------मुफ्त सार्वजनिक परिवहन का यह एस्तोनियाई मॉडल बाकी दुनिया के लिए कितना व्यावहारिक है?------------कितना मुमकिन हैं कश्मीर में पंचायत चुनाव---------कुलदीप नैयर का निधन-------चे गेवारा : एक डॉक्टर जिसके सपने जाने कितनों के अपने बन गए--------निराश करता है 'भावेश जोशी--------तर्कशील, वैज्ञानिक, समाजवादी विवेकानंद-- डा दत्तप्रसाद दाभोलकर-------डॉनल्ड ट्रंप पर महाभियोग का कितना खतरा----- | राजनीति में शांत रस काल चल रहा -प्रभाकर चौबे सबके हबीब - जीवेश प्रभाकर'महागठबंधन' लोगों की भावना है न कि राजनीति, बीजेपी के खिलाफ पूरा देश एकजुट:राहुल गांधीफीफा वर्ल्ड कप , जानिए कुछ रोचक तथ्यचे गेवारा : एक डॉक्टर जिसके सपने जाने कितनों के अपने बन गए..निराश करता है 'भावेश जोशी.फीफा वर्ल्ड कप , जानिए कुछ रोचक तथ्य. | | नक्सली हिंसा छोड़े तो वार्ता को तैयार : मनमोहन | केन्द्रीय निगरानी समिति के अध्यक्ष ने राजधानी में किया दो राशन दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण | मुख्यमंत्री से न्यायमूर्ति श्री वाधवा की सौजन्य मुलाकात | राशन वितरण व्यवस्था का जायजा लेंगे न्यायमूर्ति श्री डी.पी.वाधवा | सरकार कश्मीर के बारे में पूरी तरह बेखबर : करात | मुख्यमंत्री ने दी 'ओणम्' की बधाई | भारत ने इंटरसेप्टर मिसाइल की कामयाब लॉन्चिंग की |
आलेख
राजनीति का समाजशास्त्रीय अध्ययन---प्रभाकर चौबे
आज देश की जनता को अपोलिटिकल बनाया जा रहा है। पोलिटिकल को मानवीकरण की दिशा में सोचने का अवसर यहां खतरनाक पूंजीवादी खेल है। आज पूरा देश पूंजीवाद के गिरफ्त में आ गया। आज से 50 साल पहले जिस गैरबराबरी के लिये संघर्ष किया जा रहा है वह बंद है। हमारे संघर्ष का अर्थ ही पूंजीवाद ने बदल दिये। आज सरकार विकास के जिस रास्ते पर ले जा रही है वह अंधकार की खाई में ले जाकर पटक देगी। क्या बात है कि जब भी बात होती है क्षेत्रीय दल और राष्ट्रीय दल के बीच होती है और इनकी महत्वाकांक्षायें बढ़ भी रही हैं। वो जिस उद्देश्य के लिए खड़े किये गये वह उद्देश्य ही गायब है।
विमर्श    
मुफ्त सार्वजनिक परिवहन का यह एस्तोनियाई मॉडल बाकी दुनिया के लिए कितना व्यावहारिक है?
जो लोग एस्तोनिया में नहीं रहते, उन्हें यह जान कर आश्चर्य और थोड़ी-बहुत जलन भी ज़रूर होगी कि इस यूरोपीय देश के निवासियों को, पहली जुलाई से, देश के भीतर बस और ट्राम से कभी भी और कहीं भी आने-जाने के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ता. उन्हें केवल दो यूरो (लगभग 160 रूपये) दे कर एक चिपकार्ड ख़रीदना होता है, जिस पर - भारत में प्रचलित आधार कार्ड की तरह - उनके एस्तोनियाई पहचान-कार्ड का नंबर लिखा होना चाहिये. यह चिपकार्ड ही एक ऐसे स्थायी टिकट का काम करता है, जिसे किसी बस या ट्राम में चढ़ते ही बस या ट्राम में लगे कार्ड-रीडर को दिखा कर अपनी यात्रा की वैधता को प्रमाणित करना पड़ता है. यात्रा के दौरान बस या ट्राम बदलने पर भी हर बार इसी क्रिया को दोहराना पड़ता है. हर यात्री से अपेक्षा की जाती है कि अपनी एस्तोनियाई नागरिकता प्रमाणित करने के लिए वह अपना पहचान-कार्ड (आइडेन्टिटी कार्ड) भी हमेशा अपने पास रखे.
कितना मुमकिन हैं कश्मीर में पंचायत चुनाव
जम्मू-कश्मीर में पिछले पंचायत चुनाव 2011 में हुए थे. 33 साल के बाद. वह भी तब जब मिलिटेंट्स ने लोगों को इस चुनाव में भाग लेने की छूट दे दी थी. पहली बार ऐसा हुआ था कि मिलिटेंट्स ने कश्मीर घाटी में लोगों को किसी चुनाव में हिस्सा लेने से रोका नहीं था. यूनाइटेड जिहाद कौंसिल (यूजेसी) के पाकिस्तान में रह रहे मुखिया सैयद सलाहुद्दीन ने कहा था कि ये चुनाव एक प्रशासनिक कसरत हैं और इनका हमारी आज़ादी के संघर्ष पे कोई असर नहीं पड़ेगा. नतीजा यह हुआ कि लोगों ने बड़ी संख्या में वोट डाले. 30,000 से ज़्यादा पंच चुने गए और 4000 से ज़्यादा सरपंच. यह चुनाव अभी तक पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रमुख उपलब्धि मानी जाती है.
कुलदीप नैयर का निधन
पत्रकारिता जगत के पुरोधा माने जाने वाले 95 साल के कुलदीप नैयर का निधन हुआ. यह कहना अतिशयोक्ति न होगी कि कुलदीप नैयर के निधन के साथ ही भारतीय पत्रकारिता में एक स्वर्णिम अध्याय की समाप्ति हो गई है.
सरोकार      
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में दम तोड़ती खेती ---रोहित जोशी
नैनीताल के एक सामाजिक कार्यकर्ता रघुवर दत्त की ओर से दाख़िल इस जनहित याचिका पर फ़ैसला करते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्रदेश की बदहाल खेती और किसानों के हालात पर चिंता जताई है. अपने आदेश में पहाड़ी ज़िलों से हुए किसानों के पलायन के चिंताजनक आंकड़ों को शामिल करते हुए कोर्ट ने कहा है, ''वह समय आ गया है जब उत्तराखंड के किसानों के अधिकारों को मान्यता देते हुए अब तक चली आ रही पूरी प्रक्रिया को उलट दिया जाना चाहिए.'' अपने आदेश में अदालत ने एक रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए कहा, ''उत्तराखंड के पहाड़ी इलाक़ों में मौजूद खेती की ज़मीन में से केवल 20 प्रतिशत पर ही खेती शेष रह गई है, उसके अलावा 80 प्रतिशत खेती की ज़मीन या तो बंजर है या उसका दूसरे कार्यों के लिए प्रयोग किया जा रहा है.''
निराश करता है 'भावेश जोशी
फिल्म सवाल तो कई उठाती है और उनके फिल्मी तथा कॉमिक बुक्सनुमा हल भी देती है परंतु बांधती नहीं।जुबानी खर्च करना आसान है। जमीन पर उतरकर काम करना कठिन। यही वजह है कि भ्रष्टाचार देश में खत्म नहीं होता। नेताओं की सत्ता पर पकड़ लगातार मजबूत होती है और आम आदमी की आवाज निरंतर कमजोर होती जाती है। यह एक डार्क फिल्म के रूप में सामने आती है। मुंबई के तीन दोस्तों को आज के हालात परेशान करते हैं और वे अपने स्तर पर उनसे निपटने की सोचते है। यू-ट्यूब पर इंसाफ टीवी चैनल बना कर वे प्रशासन और सत्ता से टकराते भी हैं।
तर्कशील, वैज्ञानिक, समाजवादी विवेकानंद-- डा दत्तप्रसाद दाभोलकर
(तर्कशील, वैज्ञानिक, समाजवादी विवेकानन्द के वास्तविक विचारों को हिंदू कट्टरपंथियों ने कभी भी लोगों तक पहुँचने नहीं दिया। इसलिए विवेकानन्द को महज एक हिंदुत्ववादी (कट्टरपंथी हिंदू) संत के रूप में जाना जाता है। विवेकानन्द जैसे प्रतीकों को अपनी विचारधारा के अनुसार प्रस्तुत कर अपने कट्टरवादी विचारों को फैलाना हिंदू कट्टरपंथियों की पुरानी रणनीति रही है। उन्होंने पहले शिवाजी के विषय में यही किया, और आज अम्बेडकर के विषय में भी वे यही करने की कोशिश रहे हैं। यह लेखमाला डा दत्तप्रसाद दाभोलकर के विचारपरक मराठी साप्ताहिक साधना और लोकायत तथा जनता की ओर से प्रकाशित पुस्तिका तर्कशील, वैज्ञानिक, समाजवादी विवेकानंद पर आधारित है।द्रोहकाल कॉम ने स्वामी विवेकानंद के क्रन्तिकारी विचारों से लोगों को परिचित कराने के लिए यह लेखमाला शुरू किया है। पेश है पहला आलेख।-साभार- द्रोहकाल)
डॉनल्ड ट्रंप पर महाभियोग का कितना खतरा
ट्रंप के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि उनके इन करीबियों ने अदालत में गंभीर आरोपों में अपनी संलिप्तता स्वीकारी है. कोहेन ने कहा कि उन्होंने अपने उम्मीदवार (ट्रंप) के निर्देश पर मुख्य रूप से चुनाव को प्रभावित करने के मकसद से ही ऐसा किया था. कोहेन द्वारा को स्वीकार की गई बातों का संबंध ट्रंप के कथित पोर्न स्टार से संबंधों को लेकर उसे पैसे देकर चुप कराने के मामले से है. कोहेन ने प्रचार अभियान के दौरान दो महिलाओं को ट्रंप के साथ उनके कथित प्रेम-संबंधों को गुप्त रखने के एवज में 2.80 लाख डॉलर देने की बात स्वीकार की है. कोहेन-मैनफोर्ट को लंबी सजा मिलने की संभावना है.