आलेख

क्या मान लें कि 2020 का 5 अगस्त भारतीय गणतंत्र के दूसरे संस्करण का जन्म दिवस है?

August 10, 2020

अपूर्वानंद नेहरू ने गाँधी की विशेषता बताते हुए कहा था कि सबसे अद्भुत काम उन्होंने यह किया कि अंग्रेज़ी हुकूमत के भारत पर काबिज रहते हुए भी भारतीय खुद को आज़ाद महसूस करने लगे। भारतीयता का एक अर्थ निर्भीकता भी है। यह निडरता लेकिन उद्धतपन नहीं। यह निडरता हमेशा अपनी क़ीमत पर हासिल की जाती […]

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केन्द्रीय विश्वविद्यालय: वर्चस्वशाली जातियों के नए ठिकाने ?- सुभाष गाताडे

August 7, 2020

अगर हम प्रोफेसरों के पदों की बात करें तो यूजीसी के मुताबिक अनुसूचित जाति से आने वाले प्रत्याशियों के लिए आरक्षित 82.82 फीसदी पद, अनुसूचित जनजाति तबके से आने वाले तबकों के लिए आरक्षित 93.98 फीसदी पद और अन्य पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षित 99.95 फीसदी पद आज भी खाली पड़े हैं। असोसिएट प्रोफेसर के […]

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साष्टांग चौथे खंभे के बीच टेलीग्राफ़ ने दिखाया मोदी का दूसरा चेहरा !

August 6, 2020

 संजय कुमार सिंह एक तरफ तो अखबार अपना काम नहीं कर रहे हैं और दूसरी तरफ प्रचारक राम को नरेन्द्र मोदी से यह कहते हुए दिखा रहे हैं, 2022 तक तुम सभी को घर देने वाले थे, मुझे नहीं पता था मेरा भी घर हो जाएगा। पर मुद्दा यह है कि भगवान को भी घर […]

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हागिया सोफिया का संग्रहालय से मस्जिद बनना: बदल रहा है समय- राम पुनियानी

August 1, 2020

कुछ दशक पहले तक साम्राज्यवादी ताकतें ‘मुक्त दुनिया बनाम एकाधिकारवादी शासन व्यवस्था (समाजवाद)’ की बात करतीं थीं. 9/11 के बाद से ‘इस्लामिक आतंकवाद’ उनके निशाने पर है. इस समय पूरी दुनिया में अलग-अलग किस्म के कट्टरपंथियों का बोलबाला है. वे प्रजातंत्र और मानव अधिकारों को कमज़ोर कर रहे हैं. पिछले तीन दशकों में वैश्विक राजनैतिक […]

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गैर-द्विज बौद्धिक पूँजी’ से सहमी व्यवस्था के आईने में हैनी बाबू की गिरफ़्तारी

July 30, 2020

प्रमोद रंजन “2018 में जब केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आरक्षण रोस्टर में बदलाव कर दिया गया, जिससे दलित व अन्य पिछड़ा वर्ग की हजारों सीटें कम हो गईं तो उसके विरोध को व्यवस्थित करने में हैनी बाबू का बहुत बड़ा योगदान था। इन संघर्षों ने उन्हें आरक्षण संबंधी जटिल नियमों का […]

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सरकार 23 सार्वजनिक कंपनियाँ बेचेगी, आप स्वागत नहीं करेंगे तो क्या करेंगे- रवीश कुमार

July 29, 2020

“मोदी सरकार की यही ख़ूबी है। उनकी समर्थक जनता हर फ़ैसला का समर्थन करती है। वरना 23 सरकारी कंपनियों के विनिवेश का फ़ैसला हंगामा मचा सकता था। अब ऐसी आशंका बीते दिनों की बात हो गई है। सरकार की दूसरी खूबी है कि अपने फ़ैसले वापस नहीं लेती है। सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों में भी मोदी […]

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नामवरी जीवन और एकांत भरा अंतिम अरण्य- जीवेश प्रभाकर

July 28, 2020

नामवर सिंह के जन्मदिवस पर पूर्व प्रकाशित लेखः साहित्य अकादमी पुरस्कार, शलाका सम्मान (हिंदी अकादमी, दिल्ली), , शब्दसाधक शिखर सम्मान, महावीरप्रसाद द्विवेदी सम्माम आदिआदि कई सम्मानें के ऊपर हिन्दी साहित्य प्रमियों और पाठकों के दिलों में लगातार सम्मान पाना उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही।आज उनके जन्मदिवस पर उन्हे याद करना प्रगतिशील आंदोलन के स्वर्णिम युग […]

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दो मंदिरों की कहानी – प्रेमकुमार मणि

July 24, 2020

अयोध्या का राम मंदिर और तिरुअनंतपुरम का पद्मनाभस्वामी मंदिर अलग-अलग कारणों से पिछले हप्ते समाचारों की सुर्ख़ियों में रहे हैं. यह भारत में ही संभव है कि महामारी के इस भयावह काल में भी हम स्वास्थ्य सेवाओं और मानव जीवन से अधिक मंदिरों की चिंता में डूबे हैं. भारत की कार्यपालिका और न्यायपालिका के केंद्र […]

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देश में मंदिरों के मालिकाना हक को लेकर कुछ जरूरी सवाल!

July 24, 2020

अजय कुमार केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन और उसकी संपत्तियों के अधिकारी को लेकर 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया और मंदिर के प्रबंधन का अधिकार त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार को दिया है। इतिहास को सपाट तौर पर समझने वाले कहेंगे कि मंदिर राजाओं ने बनवाई थी। लेकिन असलियत यह है […]

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नए भारत के मर्दाना राम!

July 23, 2020

सत्यम श्रीवास्तव अब गर्भ गृह में भी पुरुषों का कब्ज़ा होगा। यह ‘साभ्यतिक और सांस्कृतिक शिफ्ट’ है। कौन कहता है कि सत्ता केवल जनमानस की भावनाओं से जुड़कर ही पायी जा सकती है। उनसे भरपूर खिलवाड़ करके भी आप सत्ता हथियाते रह सकते हैं। ख़बर है कि 5 अगस्त 2020 को संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष लोकतान्त्रिक गणराज्य के प्रधानमंत्री नरेंद्र […]

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