छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ भिलाई दुर्ग के तत्वावधान में प्रख्यात साहित्यकार ,संपादक ज्ञानरंजन के निधन पर शोकसभा का आयोजन किया गया। इस आयोजन में छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ, छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन,इप्टा, जनवादी लेखक संघ,जन संस्कृति मंच सहित प्रबुद्ध वर्ग एवं सुधिजनों ने भागीदारी की।
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ भिलाई दुर्ग के तत्वावधान में प्रख्यात साहित्यकार ,संपादक ज्ञानरंजन के निधन पर शोकसभा का आयोजन सेक्टर 5 में प्रगतिशील लेखक संघ भिलाई दुर्ग के अध्यक्ष परमेश्वर वैष्णव के निवास साहित्य परिसर में किया गया ।
वरिष्ठ साहित्यकार रवि श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित इस आयोजन में छत्तीसगढ़ प्रगतिशील लेखक संघ, छत्तीसगढ़ हिंदी साहित्य सम्मेलन,इप्टा, जनवादी लेखक संघ,जन संस्कृति मंच के साहित्यकार,छत्तीसगढ़ आजतक,छत्तीसगढ़ आसपास के संपादक पत्रकार, लेखक व प्रबुद्ध जन उपस्थित थे ।
सभी साहित्यकारों ने ज्ञानरंजन को साठोत्तरी पीढ़ी का प्रमुख कथाकार बताते हुए उनके निधन को अपूर्णीय क्षति निरूपित किया ।
वरिष्ठ कथाकार लोकबाबू ने कहा ज्ञानरंजन ने कहानी को नई दिशा दी। साहित्यिक पत्रिका पहल के संपादक के रूप में भी वैचारिक स्तर को बनाए रखने के साथ युवा रचनाकारों को प्रोत्साहित किया ।मेरे उपन्यास बस्तर बस्तर के लिए लिखी उनकी भूमिका के कारण मैं आगे बढ़ सका ।
वरिष्ठ कवि रवि श्रीवास्तव ने कहा ज्ञानरंजन ने एक बड़े कथाकार ही नहीं बल्कि प्रगतिशील आंदोलन के अगुवा भी थे । 1965 में लिखी उनकी कहानी पिता और मृत्य अद्भुत है । लोग 125 कहानी लिखकर बड़े साहित्यकार नहीं बन पाते पर ज्ञानरंजन मात्र 26 कहानी लिखकर बड़े साहित्यकार बन गए । पहल पत्रिका ने तो उन्हें अमर कर दिया ।
वरिष्ठ कथाकार गुलवीर भाटिया ने कहा आज जब विचारधारा पर हमले हो रहे हैं ,ऐसे निर्मम दौर में ज्ञानरंजन जैसे वैचारिक और चिंतनशील साहित्यकार का निधन दुखदायी है ।
कवि शरद कोकास ने कहा युवा लेखकों से मिलकर हरिशंकर परसाई की तरह ज्ञानरंजन खुश होते थे । वे कहते साहित्य में शॉर्टकट नहीं मेहनत की जरूरत होती है पहल की गुणवत्ता को उन्होंने आखिर तक बनाए रखा।
व्यंग्यकार विनोद साव ने कहा हिंदी साहित्य के एक बड़े बौद्धिक वैचारिक व्यक्ति थे । वे निर्भीक लेखक तो थे ही उनमें रचना और लेखक के विश्लेषण की गहरी समझ थी । कवि परमेश्वर वैष्णव ने कहा वे अन्वेषक साहित्यकार,संपादक थे पहल पत्रिका के माध्यम से उन्होंने हिंदी साहित्य की प्रयोगशाला का 125 अंक तक सफल संचालन किया । उन्होंने रचना प्रकाशन को लेकर कभी कोई समझौता नहीं किया वे प्रतिबद्ध संपादक थे ।
शायर मुमताज ने कहा ज्ञानरंजन सिद्धांतवादी व्यक्ति थे बड़े लेखक बड़े इंसान थे । पहल पत्रिका के माध्यम से उन्होंने निष्पक्ष संपादकीय समझ दी ।
कथाकार विजय वर्तमान ने कहा हिंदी साहित्य में जो साथ महावीर प्रसाद द्विवेदी का था वही हैसियत ज्ञानरंजन की थी । वे हिंदी कहानी के महत्वपूर्ण स्तंभ थे । डॉ नलिनी श्रीवास्तव ने कहा ज्ञानरंजन अपने कालखंड के ऐसे बड़े लेखक संपादक थे जिन्होंने पहल में प्रकाशित करके कई लेखकों कवियों को समृद्ध किया ।
कवि अंजन कुमार ने कहा ज्ञानरंजन ने साहित्य को समृद्ध करने के साथ युवा कहानीकारों की एक फौज तैयार की हमने एक बड़े वैचारिक सांगठनिक व्यक्ति को खो दिया है ।श्रमिक नेता विनोद सोनी ने कहा हमें ज्ञानरंजन के सिद्धांतों पर चलकर अन्याय के खिलाफ वैज्ञानिक समाजवाद को बढ़ावा देना होगा । वरिष्ठ कवयित्री संतोष झांझी ,पत्रकार सहदेव देखमुख ,प्रधान संपादक छत्तीसगढ़ आसपास प्रदीप भट्टाचार्य ,छत्तीसगढ़ इप्टा के अध्यक्ष मणिमय मुखर्जी ने भी विचार व्यक्त करते हुए कथाकार ज्ञानरंजन को प्रखर निर्भीक संपादक व कालजयी लेखक बताया ।
कार्यक्रम का संचालन प्रलेस भिलाई दुर्ग अध्यक्ष परमेश्वर वैष्णव ने व आभार प्रदर्शन सचिव विमल शंकर झा ने किया ।
इस अवसर पर राष्ट्रीय इप्टा सचिव राजेश श्रीवास्तव,लखन वर्मा, कमला वैष्णव, बसंत कुमार उईके,शिव नारायण, सुंदर लाल आदि साहित्यकार सुधीजन उपस्थित थे ।
