साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद और अन्तर्धार्मिक विवाह – राम पुनियानी

July 15, 2021

पिछले कुछ दशकों से ‘लव जिहाद’ के नाम पर समाज को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकृत किया जा रहा है और महिलाओं और लड़कियों को उनकी जिंदगी के बारे में स्वयं निर्णय लेने से रोका जा रहा है. साम्प्रदायिक राजनीति अपने पितृ सत्तात्मक एजेंडे को आक्रामक ढंग से लागू कर रही है। कानपुर में एक हिन्दू […]

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जनसंख्या नियंत्रण कानून: योगी पर उल्टा पड़ सकता है ध्रुवीकरण का यह दांव

July 13, 2021

अनिल जैन योगी सरकार ने अपने अभी तक के कार्यकाल में आम तौर पर अपना हर कदम ध्रुवीकरण को ध्यान में रख कर ही उठाया है। जनसंख्या नियंत्रण कानून के जरिए भी वह यही करने जा रही है। इस काम में ढिंढोरची मीडिया भी उसका मददगार बना हुआ है। उत्तर प्रदेश में पिछले साढ़े चार साल […]

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बिमल रॉय ने हिंदुस्तानी सिनेमा के साथ-साथ हॉलीवुड को भी प्रेरित किया था

July 13, 2021

अनुराग भारद्वाज  महान फिल्मकार बिमल रॉय अपने आप में एक संस्था थे जिन्होंने हिंदी सिनेमा को सलिल चौधरी, ऋषिकेश मुखर्जी, ऋत्विक घटक और गुलज़ार जैसे कई नायाब लोग दिए सन 1953 में आई ‘दो बीघा ज़मीन’ ने दुनिया भर के फ़िल्मकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा था. इस फिल्म के जरिये पहली बार हिंदुस्तानी सिनेमा […]

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मंत्रिमंडल के फेरबदल में किसकी भलाई?

July 8, 2021

अजय कुमार राजनीतिक समीकरण के आधार पर कुछ लोग कुछ दिन मंत्री रहते हैं उसके बाद बदल दिए जाते हैं। बाकी सब जस का तस रहता है। जनता को कोई फायदा नहीं होता।मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में फेरबदल हो गया है। कुछ नए मंत्री आए हैं और कुछ पुराने मंत्री चले गए हैं। मोदी सरकार […]

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फ़ादर स्टैन की मौत स्वाभाविक नहीं, हत्या है!

July 8, 2021

प्रेम कुमार क्या फ़ादर स्टैन स्वामी की मौत स्वाभाविक है? अगर फ़ादर स्टैन की गिरफ़्तारी नहीं हुई होती, वे अपने घर में होते तो क्या उनकी मौत होती? आखिर किस गुनाह के लिए वे अपने जीवन के अंतिम 217 दिन जेलों में रहे? न चार्जशीट दायर हुई, न ट्रायल हुआ। न समय पर इलाज मिला और […]

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दिलीप कुमार न होते तो अमिताभ, शाहरुख और आमिर भी ऐसे न होते

July 8, 2021

प्रियदर्शन  दिलीप कुमार ने हिंदी फिल्मों में अभिनय की सबसे मज़बूत और समृद्ध विरासत दी है.फिल्मी दुनिया में अगर दिलीप कुमार न होते तो? तो शायद अमिताभ, शाहरुख़, आमिर भी वैसे अभिनेता न होते जैसे वे हैं. वे किसी और ढंग से नाराज़ हुआ करते, किसी और तरह से खुश होते, किसी और तरह से […]

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लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं और कश्मीर की गुत्थी -राम पुनियानी

July 5, 2021

सन 2019 के पांच अगस्त को राष्ट्रपति ने एक अध्यादेश जारी कर कश्मीर को स्वायत्तता प्रदान करनी वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया. यह अनुच्छेद कश्मीर के भारत में विलय का आधार था और कश्मीर को रक्षा, संचार, मुद्रा और विदेशी मामलों के अतिरिक्त अन्य सभी क्षेत्रों में स्वात्तता प्रदान करता था. […]

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फिल्म और कलम उनके लिए क्रांति के औजार थे – विनीत तिवारी

July 5, 2021

महान फिल्म निर्देशक, फिल्म-लेखक, कहानीकार-उपन्यासकार, पत्रकार कितनी ही प्रतिभाओं के धनी ख्वाजा अहमद अब्बास की रचनात्मकता और सामाजिक चिंताओं को उनकी फ़िल्मों के माध्यम से समझने के लिए भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की केन्द्रीय इकाई ने 3 जुलाई 2021 को ज़ूम के माध्यम से एक कार्यक्रम श्रृंखला की शुरुआत की।  कार्यक्रम में सीएसडीएस, दिल्ली […]

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भारत में बुद्धिजीवियों के लिए इतनी नफरत क्यों दिखने लगी है?

July 4, 2021

विकास बहुगुणा  इन दिनों समाज के एक बड़े तबके में बुद्धिजीवी निंदा और कटाक्ष का विषय हैं  ‘एक वक्त था, जब मूर्ख होना गाली था. अब बुद्धिजीवी होना गाली है…. बात गाली तक होती तब भी ठीक था. समाज में बुद्धिजीवियों से नफरत इस तरह है कि उन्हें मिटाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं.’एक व्यंग्य में […]

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On Restoring Growth of Indian Economy

July 2, 2021

by Atul Sarma & Shyam Sunder In one of her interviews with the media around the release of the fourth quarter growth of 2020-21 at 1.6% by the NSO, the Finance Minister asserted that all that need to be done for restoring growth has already been done in terms of budget proposals under Union Budget […]

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