सम्पादकीय

कहानीः पुर्जा – ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग

November 29, 2020

ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग  ( 22 जनवरी 1849 – 14 मई 1912 ) ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग को स्वीडिश उपन्यास का जनक माना जाता है। अनेक चर्चित नाटक, उपन्यास, कहानियों के साथ ही निबंध एवं आलोचना के क्षेत्र में भी प्रतिष्ठित रहे । आज पढ़ें उनकी कहानी- पुर्जा – सामान की आखिरी खेप जा चुकी थी। किराएदार, क्रेपबैंड हैटवाला जवान […]

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कहानीः ‘लव जिहाद’ लाइव – कैलाश बनवासी

November 25, 2020

कैलाश बनवासी की कहानियां आम आदमी और दैनिन्दिन घटनाओं के ईर्दगिर्द बुनी होती हैं और बहुत सहजता से वे अपनी बात पाठकों तक पहुंचाते हैं । ‘लक्ष्य तथा अन्य कहानियाँ ‘ ‘बाजार में रामधन’, ‘पीले कागज की उजली इबारत ‘ कहानी संग्रह एवं ‘लौटना नहीं है ‘उपन्यास  प्रकाशित हो चुके हैं । वे श्याम व्यास पुरस्कार, […]

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कहानीः निंदक- अंतोन चेखव

November 24, 2020

अंतोन पावलेविच चेखव (1860-1904) –  रूसी कथाकार और नाटककार अंतोन पावलेविच चेखव  विश्व के सबसे महत्वपूर्ण लेखकों में से एक हैं।  चेखव के लेखन में अपने समय का जैसा गहन और मार्मिक वर्णन मिलता है। चेखव की संवेदना में मानवीयता का तत्व बहुत गहरा है । चेखव की कला में सादगी एक असाधारण शक्ति के रूप में उभरी है […]

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इप्टा द्वारा जनगीतों के ज़रिये मज़दूरों-किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपील

November 23, 2020

संदीप चक्रवर्ती  81 साल के लोकशिल्पी(जन कवि) देवीदास तरफ़दार के अनुसार 26 नवंबर की देश्वयापी हड़ताल की तैयारी में सलिल चौधरी, हेमंगा विश्वास और हेमंता के हिंदी जनवादी गाने और साथ ही परंपरागत संगीत हवाओं में गूँज रहे हैं । इप्टा के हावड़ा शिवपुर क्षेत्र के एक और संगीतकार अमल नायक ने भी ऐसे […]

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शेख़ इब्राहिम ‘ज़ौक़’: बहादुर शाह ज़फर का वो उस्ताद जिसके चलते कई लोग उन्हें शायर ही नहीं मानते

November 22, 2020

अनुराग भारद्वाज ज़ौक, बहादुर शाह ज़फर के उस्ताद, न तो शायरी में किसी से कम थे और न मुफ़लिसी में. पर उन्होंने न तो कभी ग़ालिब की तरह अपनी ग़ुर्बत का ढोल पीटा और न वजीफ़े के लिए हाथ-पैर मारे बादशाह को किसी राह चलते कोई जुमला पसंद आ गया तो उसे पूरा करने की […]

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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, जिन्हें लिखने के लिए जेल में डाला गया

November 20, 2020

रमाशंकर सिंह जो इश्क़ करते हैं, बेड़ियों को तोड़ना चाहते हैं, दुनिया को बदलना चाहते हैं, उन्हें आज भी फ़ैज़ की ज़रूरत है. गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौबहार चलेचले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले क़फ़स उदास है, यारो सबा से कुछ तो कहोकहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज ज़िक्र-ए-यार चले कभी तो सुब्ह तेरे कुंज-ए-लब […]

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कहानीः क्लॉड ईथरली – मुक्तिबोध

November 12, 2020

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ (१३ नवंबर १९१७-११ सितंबर १९६४) प्रगतिशील आंदोलन के प्रमुख व अग्रणी साहित्यकार।  ताउम्र वामपंथी विचारधारा से जुड़े रहे । कविता संग्रह : चाँद का मुँह टेढ़ा है, भूरी भूरी खाक धूल तथा तारसप्तक में रचनाएं; कहानी संग्रह : काठ का सपना, विपात्र, सतह से उठता आदमी; उपन्यास: विपात्र; आलोचना : कामायनी : […]

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कहानी : एक औरत- राजेन्द्र सिंह बेदी

November 11, 2020

 तरक्की पसंद उर्दू कथाकारों में राजिंदर सिंह बेदी का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है. कहानियों के साथ ही फिल्मों से भी उनका काफी गहरा संबंध रहा। उनकी कहानिया जमीन से जुड़ी होती हैं। उनकी कहानियों से गुजरते हुए हमारी अपनी संजीदगी बेदी की संजीदगी से एकमेक हो उठती है. उनकी शैली तथा […]

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पटकथा : धूमिल की यह कविता अभी ठीक से पढ़ी जानी बाकी है – प्रियदर्शन

November 10, 2020

आधी सदी पहले सुदामा पांडेय यानी धूमिल ने ‘पटकथा’ नाम की वह कविता लिखी थी जिसने तार-तार होते हिंदुस्तान को इस तरह देखा जैसे पहले किसी ने नहीं देखा था मुक्तिबोध की अंतर्घनीभूत पीड़ा से बिल्कुल अलग धूमिल का बेहद मुखर आक्रोश कुछ इस तरह फूटता और हमसे टकराता है कि हम अपने भीतर एक […]

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अगर श्रीलाल शुक्ल ने राग दरबारी न लिखा होता तो…

October 28, 2020

अनुराग शुक्ला अगर राग दरबारी न लिखा गया होता शिवपालगंज के आत्मविश्वास से भरे गंजहे न होते, तो किसानों को उन्नत कृषि सिखाने आए वैज्ञानिकों को मूर्ख मानने का साहस कौन जुटा पाता. अगर गंजहों का दिया सहज ज्ञान न होता तो यह ज्ञान कौन देता कि पुनर्जन्म का ईजाद भारत की दीवानी अदालतों से […]

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