मनोरंजन

स्मिता पाटिल : एक ऐसी अभिनेत्री जिसे लेकर सभी ने जिंदगी सोची, व्यर्थ के दिवास्वप्न नहीं जिए

October 17, 2020

स्मिता पाटिल पर यह लेख दिग्गज साहित्यकार शरद जोशी ने 1986 में नवभारत टाइम्स के लिए लिखा था  स्मिता अभिनय में अपनी उम्र से बड़ी हो जाती थी. वह केवल गहरे अहसास की मदद से अपनी अनुभव-सीमा को लांघ जाती थी. इस मामले में वह अपनी समकालीन भारतीय अभिनेत्रियों से बड़ी थी  स्मिता समझदार अभिनेत्री […]

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‘कोई हमदम न रहा, कोई सहारा न रहा’ जैसे कालजयी गीत के पहले गायक किशोर नहीं, अशोक कुमार थे!

October 16, 2020

कहा जाता है कि इस गीत के अस्तित्व में आने के वक्त किशोर कुमार सिर्फ पांच वर्ष के थे लेकिन यह गाना उनके जेहन में ऐसा बसा कि जब उन्होंने फिल्मों में अभिनय करना और गीत गाना शुरू किया तो यह गाना अशोक कुमार से जबरदस्ती मांग लिया. यह कहकर कि मैं तुमसे तो इसे […]

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‘मुझे लगा कि मैं एक बेमतलब का मसखरा हूं’-

October 13, 2020

किशोर कुमार द्वारा 60 के दशक में फिल्मफेयर के लिए लिखा गया यह लेख एक बहुमुखी प्रतिभा की दुर्लभ आत्मस्वीकृति है जब मैंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था तो मैं एक दुबला-पतला गंभीर नौजवान था. मुझ पर अच्छा गाने का जुनून था. मेरे आदर्श केएल सहगल और खेमचंद प्रकाश जैसे नाम थे. परंपराओं के […]

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मंच पर एक जगजीत वो भी थे जो सिर्फ चित्रा के होते थे

October 11, 2020

अंजलि मिश्रा लोगों से बोलते, हंसते, चुटकुले सुनाते और चित्रा पर चुटकियां लेते जगजीत सिंह इस तरह अपनी गायकी में कई और रंग भर देते थे. यह उस ज़माने की बात है जब जगजीत सिंह बांके नौजवान हुआ करते थे और खूबसूरत चित्रा ने गायकी में उनका साथ देना शुरू ही किया था. 1980 के […]

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गुरु दत्त की बेचैनी ने उनकी फिल्मों को अमरता दी और उन्हें मौत

October 11, 2020

कविता दुनिया के सर्वकालिक महान फिल्मकारों में शुमार गुरु दत्त को जिस जिद और बैचैनी ने बनाया उसने ही उनका सबसे ज्यादा नुकसान भी किया गुरुदत्त की जिंदगी पर जब भी बात की जाए, अकेले की जानी असंभव है. एक प्रेम त्रिकोण सा इसमें आना ही आना है. इस त्रिकोण के तीन सिरे गुरुदत्त, गीता […]

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‘मेरी दादी छोटी जाति से थी, इसलिए आज तक समाज ने हमें नहीं अपनाया’-नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी

October 9, 2020

उनलोगों के ये फर्क नहीं पड़ता कि आप बॉलीवुड एक्टर हैं या धनपति? उन्हें जातियों से मतलब है. अभिनेता ने कहा, “आज भी हम चाहें कि जो हमारे ममेरे रिश्तेदार हैं, उनकी शादी पैतृक रिश्तेदारों में कराऊं तो ये संभव नहीं है.” बॉलीवुड अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी  ने समाज में फैली जाति की जकड़बंदी को तोड़ने की […]

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लोकप्रिय आध्यात्मिकता की आड़ में पूंजी, सियासत और जाति-अपराधों के विमर्श का ‘आश्रम’

October 4, 2020

जैनबहादुर फिल्मों के माध्यम से समाज में प्रचलित कई प्रकार के सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक मुद्दों और विमर्शों को भी दिखाया जाता है, भले ही वे आधे-अधूरे, सत्य-असत्य, उचित-अनुचित के घालमेल से लबरेज़ हों। आजकल वेब सिरीज़ के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर से लेकर स्थानीय राजनीति, सामाजिक मुद्दों और विमर्शों पर फ़िल्म बनायी जा रही […]

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राजा रवि वर्मा न होते तो हमारे देवी-देवता होते जरूर, पर कैसे होते कहना मुश्किल है

October 2, 2020

चंदन शर्मा राजा रवि वर्मा ऐसे पहले चित्रकार थे जिन्होंने हिंदू देवी-देवताओं को आम इंसान जैसा दिखाया. आज हम फोटो, पोस्टर, कैलेंडर आदि में सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा, राधा या कृष्ण की जो तस्वीरें देखते हैं वे ज्यादातर राजा रवि वर्मा की कल्पनाशक्ति की ही उपज हैं. उनके सबसे मशहूर चित्रों में ‘सरस्वती’ और ‘लक्ष्मी’ के […]

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मजरूह सुल्तानपुरी : जिनके गाने सहगल ने गाए और सलमान ने भी

October 1, 2020

कविता मशहूर शायर मजरूह सुल्तानपुरी हिंदी फिल्म उद्योग में सबसे लंबे समय तक सक्रिय रहे गीतकार भी थे बतौर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी से जुड़ी एक बेहद खास बात यह है कि उनका सफर तो नौशाद-कारदार-सहगल के जमाने से शुरू हुआ था लेकिन उन्होंने बीते दशक के कुछ जाने माने संगीतकारों जैसे अनु मलिक, जतिन ललित […]

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‘लता जी का गाना भीतर से निकली हुई इबादत की तरह है’ – गुलज़ार

September 28, 2020

लता मंगेशकर के गाने को सुनकर ऐसा नहीं कह सकते कि ‘अरे यार, क्या कमाल का गाती हैं.’ उनके संगीत के लिए इज्जत की भावना अपने-आप मन में उठती हैउन्होंने अरेबियन नाइट्स की कहानियों की तरह आवाज का ऐसा जादुई कालीन अपने गीतों के बहाने बिछाया हुआ है जिस पर पिछले पचास-साठ साल से न […]

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