कौशिक बसु, पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहाःदेश 70 साल की कमाई गंवा रहा है

इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट की चर्चा में बात करते हुए प्रोफेस बसु ने राजनीतिक सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से बात की.वर्ल्ड बैंक के पूर्व चीफ इकनॉमिस्ट और भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार प्रोफेसर कौशिक बसु का कहना है कि पिछले 70 साल में भारत ने जो कमाया था वो अब गंवा रहा है. अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बसु ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि उत्तर प्रदेश की हालत बिगड़ रही है. उनना कहना है कि वो इस राज्य में धार्मिक उन्माद बढ़ने से चिंतित हैं.

कौशिक बसु ने बाताया कि 2003 से लेकर 2008 तक भारत की ग्रोथ रेट में लगातार तेजी देखने को मिली लेकिन भारत की ग्रोथ रेट पिछले सालों में लगातार तेजी से गिरी है. साल 2016-17 में भारत की ग्रोथ रेट 8.2% थी, जो 2019-20 में गिरकर 4.2% पर आ गई थी. लेकिन अब कोरोना संकट के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि ये गिरकर -5.8% पर आ चुकी है. जो कि चिंता का विषय है. इसके पीछे उन्होंने कई कारण भी गिनाए:

कोरोना संकट काल में सरकार की नीतियों मे कमी

कौशिक बसु कहते हैं कि इस दौरान सरकार की नीतियों में कमी है. कोरोना संकट के बाद प्रधानमंत्री ने जिस पैकेज की घोषणा की थी. जब ऐलान हुआ तो बहुत खुशी हुई कि इतना बड़ा पैकेज सरकार दे रही है लेकिन जब पूरी तस्वीर सामने आई तो निराशा हुई.

इकनॉमिक ग्रोथ के लिए भरोसा जरूरी

कौशिक कहते हैं कि भारत में संस्थाओं की स्थिति खराब हो रही है. अगर ये ऐसे ही चलता रहा तो ये भारत के लिए अच्छा नहीं होगा. इकनॉमिक की कामयाबी के लिए भरोसे की जरूरत होती है.

उन्होंने कहा, निवेश का सीधा संबंध समाज में भरोसे से है. तो निवेश में जो भयानक गिरावट हुई है उसके पीछे भरोसे में गिरावट भी एक बड़ा कारण है. पिछले दिनों में आम लोगों में असुरक्षा का भाव आया है और उनका भरोसा टूटा है.

सरकार को धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र से ऊपर उठकर काम करना चाहिए

पिछले सालों में कश्मीर में कई सारी उठापटक हुई हैं. कौशिक बसु कहते हैं कि बतौर भारतीय मैं चाहता हूं कि कश्मीर भारत का हिस्सा रहे, लेकिन मैं कश्मीरी लोगों के दिल में अपनी जगह बनाते हुए ऐसा करना चाहता हूं.

बतौर सरकार हमें धर्म, जाति, रंग, भाषा, क्षेत्र इन सब से ऊपर उठकर सभी के प्रति समान बर्ताव रखना चाहिए. ये सारी बातें इकनॉमिक ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी हैं

यूपी में बिगड़ी कानून-व्यवस्था ने बढ़ाई चिंता

अर्थशास्त्री कौशिश बसु उत्तर प्रदेश की स्थिति को लेकर काफी चिंतित हैं. वो कहते हैं कि ‘उत्तर प्रदेश एक ताजा उदाहरण है, जहां पर पिछले दिनों में सामाजिक ताने बाने पर बुरा असर पड़ा है. ये भारत की वैश्विक छवि पर विपरीत असर डाल रहा है.

उन्होंने कहा, पिछले 2-3 साल में उत्तर प्रदेश में जो हुआ है वो काफी निराशाजनक है. कानून-व्यवस्था की बिगड़ती हुई स्थिति, धार्मिक उन्माद का बढ़ता स्तर, अल्पसंख्यकों के प्रति बढ़ती नफरत, राय अलग हुई तो चुप कराया जाना, ये सब भारत की परंपरा के खिलाफ है.

हालांकि उन्होंने माना कि आर्थिक मोर्चे पर गलतियां हुई हैं इससे कोई इनकार नहीं कर सकता. 2006 तक भारत दुनिया की 3 सबसे तेजी से आगे बढ़ने वाली इकनॉमी में शामिल था. लेकिन 2016 के बाद भारत ढलान की तरफ बढ़ रहा है और ये अभी शुरू नहीं हुआ. इस मोदी सरकार आने के पहले से ही ये होना शुरू हो गया था.

एजेंसियां

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