हिन्दू कालेज दिल्ली में वेबिनारः सबके भीतर होती है कल्पना- प्रो हेमंत द्विवेदी

नई दिल्ली/उदयपुर।  कला और साहित्य दो भिन्न क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि एक – दूसरे से गहरे स्तर तक जुड़े हुए हैं। ऐसी कोई भी महीन या बारीक रेखा नहीं है,जो इन्हें अलगाती हो।  कला और साहित्य की अंतःसूत्रता को समझने के लिए, दोनों का  सूक्ष्म निरीक्षण बेहद जरूरी है। गहरी अंतर्दृष्टि के संभव होने पर ही कला और साहित्य का वास्तविक रसास्वादन करने की अर्हता अर्जित की जा सकती है। सुविख्यात चित्रकार और उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो हेमंत द्विवेदी ने उक्त विचार हिन्दू कालेज की हिंदी साहित्य सभा द्वारा आयोजित एक वेबिनार में व्यक्त किए।

प्रो द्विवेदी ने ‘कला और साहित्य का अंतर्संबंध’ विषय पर  कहा कि कल्पना कुछ विशेष लोगों को प्राप्त होने वाली प्राकृतिक शक्ति नहीं है,बल्कि यह सबके भीतर होती है। इस शक्ति के लिए लिए भावक को निरंतर अभ्यासरत रहने की आवश्यकता होती है। निरंतर अभ्यास से अर्जित कल्पना से उपजी कला या साहित्य ही आस्वादकों को प्रभावित कर सकते हैं। प्रो  द्विवेदी ने अपने पसंद के रंगों और विषयों की चर्चा करते हुए कहा कि कलाकार अपने स्वभाव के अनुसार इन सबका चयन करता है जो हमेशा एक जैसा नहीं रह सकता।  प्रो द्विवेदी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कला वर्ग जहां साहित्य से गहरे स्तर पर जुड़ा है, वहीं पिछले कुछ दशकों से साहित्य वर्ग,कला के प्रति कुछ उदासीन सा रहा है। उन्होंने इस सम्बन्ध में अज्ञेय का उदाहरण देते हुए  कहा कि उनके लिए कविता और कला दोनों एक साथ चिंतन के विषय थे। प्रो द्विवेदी ने अज्ञेय की प्रसिद्ध पुस्तक भारतीय कला दृष्टि का भी उल्लेख किया और कहा कि साहित्य तथा कला से जुड़े सभी लोगों के लिए यह अनिवार्य पुस्तक है। 

आयोजन के दूसरे भाग में प्रश्न काल का संयोजन विभाग के प्राध्यापक नौशाद अली और साहित्य सभा के संयोजक हर्ष उरमलिया ने किया। इससे पहले विभाग के प्रभारी डॉ पल्लव ने हिंदी साहित्य सभा की गतिविधियों का परिचय दिया और कोरोना के दौरान भी सभा की सक्रियता के सम्बन्ध में अतिथियों को जानकारी दी।  विभाग के प्राध्यापक डॉ विमलेन्दु तीर्थंकर ने प्रो द्विवेदी का परिचय देते हुए बताया कि हिन्दू कालेज की हिंदी नाट्य संस्था का लोगो डिजायन करने वाले वाले प्रो द्विवेदी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के चित्रकार हैं जिनकी अनेक एकल तथा सामूहिक प्रदर्शनियाँ विश्व की विख्यात कला-गैलेरियों में हो चुकी हैं। अंत में साहित्य सभा की सचिव दिशा ग्रोवर ने धन्यवाद ज्ञापन किया। वेबिनार में विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ रामेश्वर राय, डॉ रचना सिंह, डॉ हरींद्र कुमार एवं दूसरे विश्वविद्यालयों के अध्यापक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद रहे। 

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