मनोरंजन

बंसी कौल : संकुचित होते रंगकर्म की एक और भयानक क्षति

February 7, 2021

अनिल शुक्ल ​बंसी कौल ने अंततः ड्रामा स्कूल से निकलने के 11 साल बाद भोपाल में जमने का फ़ैसला करते हैं। यहाँ 1984 में उन्होंने ‘रंग विदूषक‘ नाट्य संस्था की स्थापना की। …ऐसे दौर में जबकि हिंदी रंगकर्म का आकार निरंतर संकुचित होता जा रहा है और ज़रूरत उसके भीतर लोक नाट्य के नए-नए तत्वों […]

Read More

अल्लाह जिलाई बाई : जिनकी वजह से ‘केसरिया बालम’ दुनिया को राजस्थान का न्योता बन गया

February 2, 2021

पुलकित भारद्वाज ढोला-मारू की प्रेम कहानी से जुड़ा यह लोकगीत सदियों से राजस्थान की मिट्टी में बसा है, लेकिन इसे सम्मान के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचाया अल्लाह जिलाई बाई ने । सुनिए नग्मा- आसमान तक ऊंचे रेत के धोरे और रेत की ही सुनहरी चादर में लिपटी जमीन. दूर-दूर तक दिखता रेत का अनंत सैलाब […]

Read More

ओपी नैयर : जो तालियों, सीटी और घोड़े की टापों से संगीत निकालते थे

January 29, 2021

अंजलि मिश्रा अक्खड़पन और स्वछंदता ओपी नैयर की पहचान थी और शायद इसी असर ने उनके संगीत को इतना लोकप्रिय बनाया यदि विद्रोह किसी के व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है तो उसका जिद्दी होना भी कोई असामान्य बात नहीं है. नैयर जिद्दी भी खूब थे. तभी तो लता मंगेशकर जैसी गायिका से कभी न गवाने […]

Read More

‘तांडव’ हिंदू विरोधी नहीं बल्कि कुछ जगहों पर प्रो-हिंदू है

January 22, 2021

शुभम उपाध्याय भगवान शिव वाले सीन से जुड़े अनावश्यक विवाद में कोई तांडव के उस पक्ष की ओर क्यों नहीं देखता जो प्रो-हिंदू है? एक लोकतांत्रिक किरदार जिसका नाम शिवा है वह अपनी पार्टी खड़ी करते वक्त कहता है कि ‘हम सबके अंदर एक गुस्सा है. बहुत सारा गुस्सा… और मेरा तो नाम ही शिवा […]

Read More

वंशवादी राजनीति, आज़ादी के नारों के बीच ‘तांडव’

January 16, 2021

दीपाली श्रीवास्तव ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़ॉन प्राइम वीडियो पर पॉलिटिकल ड्रामा वेब सीरीज़ ‘तांडव’ रिलीज़ हो चुकी है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था। सीरीज़ की कहानी दो तरह की राजनीति के ईर्द-गिर्द घूमती है। एक तरफ़ प्रधानमंत्री की कुर्सी को पाने के लिए दांव-पेंच लगाये जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी राजनीति कॉलेज कैंपस […]

Read More

फ़िल्मकार सईद मिर्ज़ाः इंसानियत की तलाश में एक शख्सियत का नाम है

January 15, 2021

गोपाल नायडू इंटरनॅशनल कल्चरल आर्टिफॅक्ट फिल्म फेस्टिव्हल  (ICA ) का आयोजजन पुणे, महाराष्ट्र में  प्रति वर्ष होता है। इस साल यह फेस्टीवल 17 से 31 जनवरी के बीच आयोजित किया जा रहा है।  इस साल इंटरनॅशनल कल्चरल आर्टिफॅक्ट फिल्म फेस्टिव्हल में लेखक-निर्देशक सईद मिर्जा को जीवनगौरव पुरस्कार से  सन्मानित किया जाएगा. इस मौके पर सईद मिर्जा के व्यक्तित्व और कृतित्व […]

Read More

वेब सीरीज़ क्रिमिनल जस्टिस: धारणाओं, पूर्वाग्रहों को चुनौती देता एक सघन अनुभव

January 13, 2021

सत्यम श्रीवास्तव  ‘क्रिमिनल जस्टिस’ सीजन -1, ऐसे तो कानूनी पेचीदगियों से भरी एक कहानी है लेकिन यह दर्शकों को खुद जासूस हो जाने का मौका मुहैया कराती है और शायद यही वजह है कि लगभग आठ घंटे की इस वेब सीरीज़ को एक बार देखना शुरू करने पर आप अंत देखे बगैर उठ नहीं पाते. […]

Read More

बिमल रॉय : एक महान फिल्मकार जिसने हिंदुस्तानी सिनेमा के साथ-साथ हॉलीवुड को भी प्रेरित किया

January 10, 2021

अनुराग भारद्वाज रबींद्रनाथ टैगोर के ‘जन गण मन’ के राष्ट्रीय गान बनने से पहले बिमल रॉय ने इसे 1945 में आई अपनी फ़िल्म ‘हमराही’ में पहली बार पेश किया था समाजवाद से प्रेरित और सिनेमा से सर्वहारा की आवाज़ उठाने वाले बिमल दा पर कमर्शियल यानी व्यावसायिक फ़िल्में बनाने का ज़बरदस्त दवाब था. उनका कमाल […]

Read More

फिल्म संगीत को अगर दो युगों में बांटा जाए तो एक पंचम दा के पहले का होगा और दूसरा उनके बाद का

January 7, 2021

शुभम उपाध्याय आरडी बर्मन यानी पंचम दा को ऐसा संगीतकार कहा जा सकता है जिन्होंने फिल्म संगीत के मिजाज और व्याकरण को बदलकर एक नया दौर शुरू किया था राहुल देव बर्मन को आप संगीतकारों की दुनिया का गुलजार भी कह सकते हैं. राहुल देव बर्मन को आप संगीतकारों की दुनिया का गुलजार भी कह […]

Read More

‘हर चीज इडियट-प्रूफ बनानी पड़ती है’—गुलजार ने कहा अब कला पर भय का माहौल हावी है

December 31, 2020

शुभांगी मिश्रा गुलज़ार ने अपनी नई किताब ‘ अ पोएम अ डे ‘ के बारे में बात की, जो भारत की 34 भाषाओं में 279 कवियों द्वारा 365 कविताओं का एक संकलन है.कवि और लेखक गुलजार का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदियां बढ़ गई हैं. गुलजार ने कहा […]

Read More