18 मई,1974 को गांव में उस रात आंगन में खुले आसमान के नीचे खाट पर बैठे हम लोग चौंक गये थे कि तभी एक वाक्य की अप्रत्याशित घोषणा रेडियो से गूंजी, “भारत ने अज्ञात स्थान पर एक सफल परमाणु परीक्षण किया है”। दुनिया भर के खुपिया तंत्र को धता बताते हुये उस अप्रत्याशित समाचार पर हम सब ही नहीं, सारा विश्व स्तब्ध हुआ था। वैश्विक महाशक्तियां तो जैसे ठगी सी रह गई थीं।
18 मई,1974 को गांव में उस रात के आकाशवाणी समाचार प्रतीक्षा का वक्त याद है। ट्रांजिस्टर पर अभी एक गाना चल रहा था। सहसा गाना बीच में रोक कर एक मुनादी गूंजी थी – “एक महत्वपूर्ण सूचना की प्रतीक्षा करें” और उसके बाद अंतराल धुन बजने लगी। आंगन में खुले आसमान के नीचे खाट पर बैठे हम सब लोग चौंके हो गये थे कि तभी एक वाक्य की अप्रत्याशित घोषणा रेडियो से गूंजी, “भारत ने अज्ञात स्थान पर एक सफल परमाणु परीक्षण किया है”। दुनिया भर के खुपिया तंत्र को धता बताते हुये उस अप्रत्याशित समाचार पर हम सब ही नहीं, सारा विश्व स्तब्ध हुआ था। वैश्विक महाशक्तियां तो जैसे ठगी सी रह गई थीं।
उक्त एलान के पीछे की कहानी की परतें तो बरसों बाद एक एक कर खुलीं। मई 17, 1974 को लंदन बैठे प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के प्रधान सचिव पी.एन. हक्सर जब अपने उच्चायुक्त बी.के.मेनन से रह रह कर पूछ रहे थे कि दिल्ली की कोई खबर आई क्या, तो मेनन समझ नही पा रहे थे कि आखिर हक्सर साहब को कैसी खबर का इंतजार है ? वस्तुत: उससे चार दिन पूर्व ही 14 मई की रात को पोखरन में परमाणु विस्फोट की डिवाइस एसेंबल कर L आकार की शाफ्ट में डाली जा चुकी थी। परमाणु ऊर्जा आयोग अध्यक्ष होमी सेठना के नेतृत्व में सब कुछ हो चुका था और किसी को कानों कान भनक तक नहीं थी। दूसरे दिन 15 मई को तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार सेठना साहब दिल्ली पहुंच कर रात में प्रधान मंत्री इन्दिरा गांधी से मिले तो सीधा बोला कि, “जैसा आप चाहती थीं, हम पूर्णतः तैयार हैं। हमने डिवाइस को शाफ्ट में डाल भी दिया है और अब यदि निकालने को आप कहेंगी, तो वह संभव नहीं होगा”। ढाई साल पहले ही बंगलादेश निर्माण कराकर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की दुनिया की सबसे बड़ी सामरिक विजय भारत के खाते में दर्ज कराने वाली शेरनी जैसी प्रधानमंत्री ने तब मुस्कुरा कर कहा था, “डर रहे हो क्या ? गो अहेड”।
लक्ष्य संधान करो, यह दो-टूक निर्देश देश के राजनीतिक महानायक से लेकर डा. सेठना 16 मई को फिर वापस पोखरन पहुंच गये। आपरेशन की अपनी टीम से वहां सीधा सवाल किया कि, “परीक्षण असफल हुआ, तो सिर किसका कलम होगा ?” किसी से पहले डिवाइस डिजाइनर राजगोपाल चिदंबरम बोले, “मेरा”। टीम के डिप्टी लीडर आयंगार ने कहा, “असफलता का प्रश्न ही नहीं, यदि भौतिक शास्त्र के स्थापित सिद्धांत सही हैं तो”।
पोखरन के उस रेगिस्तानी परीक्षण स्थल से दो तीन किमी दूर कंट्रोल टावर और उसके कुछ दूर एक मचान पर दूरबीन के साथ डटे परमाणु ऊर्जा आयोग अध्यक्ष डा. सेठना, डा. राजा रमन्ना, थल सेनाध्यक्ष जनरल बेवूर, ‘रा’ के श्रीधर उपाध्याय सहित तैनात वैज्ञानिकों की पूरी टीम। तय समय से पूर्व वीरेन्द्र सिंह सेठी अंतिम मुआयने के लिये विस्फोट की निर्धारित साइट पर जाते हैं। सब ठीक ठाक देखकर लौटने को होते हैं, तो जीप दगा दे जाती है। बड़ी कोशिशों के बाद भी जीप स्टार्ट नहीं होती। लोग उनके न लौटने से परेशान थे। वो दो किमी से ज्यादा पैदल चलकर लौटे। सेनाध्यक्ष से पूछा जीप का क्या करें ? उत्तर था उसे भी विस्फोट में खत्म होने दें। देर हो रही थी, मचान के लाउड स्पीकर से उल्टी गिनती शुरू हो गई। गिनती का उलट क्रम पूरा ही होने वाला था कि डिवाइस से गलत सिग्नल आने लगा। सबने माना कि गड़बड़ हो गई, गिनती भी थम गई। उसी समय एक ओर खड़े वेंकटेश्वरन विष्णु सहस्त्र नाम जप कर रहे थे और तात्कालिक निराशा के बीच सबकी उम्मीद के विपरीत दस्तीकार ने निर्धारित रात के 8.05 बजे यह मान कर बटन दबा ही दिया कि शाफ्ट में आर्द्रता आ जाने के कारण गलत सिग्नल आने की त्रुटि भी हो सकती है।
थोड़ा रुक कर आई विस्फोट की आवाज के पहले ही मचान से लोगों ने देखा कि रेत के गुबार की धुंध का कोई पहाड़ सामने उग आया है। डा.रमन्ना ने लिखा है कि लगा जैसे कृष्ण द्वारा उठाया गया कोई गोवर्धन पर्वत हो। डा.सेठना एवं जनरल बेवूर गले लिपटे ही थे कि उसी बीच इतना तेज कंपन उठा कि मचान ही टूट कर गिर गया। सब गिरे, एक वैज्ञानिक के पांव में मोच आ गई। कंट्रोल रूम से प्रधानमंत्री निवास तक हाट लाइन फोन लगा था और थोड़ी कोशिश के बाद मिल भी गया, लेकिन डा.सेठना इतना ही कह पाये थे कि, "इवरी थिंग हैज गान..." कि तब तक फोन लाइन भी दगा दे गई। एक जीप से वे लोग पोखरन कस्बे की ओर लपके। वहां टेलीफोन एक्सचेंज पहुंच कर एक्सचेंज वाले को पीएम हाउस, नई दिल्ली ट्रंकाल मिलाने को कहा। पहले तो 'आप लोग कौन' जैसे सवालों के साथ उसने हीला हवाली की, पर जल्द ही लाइन पर भी आ गया और लाइन मिला भी दी। फोन मिलते ही डा.सेठना ने सीधे बुद्ध पूर्णिमा की उस रात का पूर्व निर्धारित कोडवर्ड ही बोला, "बुद्धा इज स्माइलिंग"। अलग बात है कि इस आधिकारिक सूचना के चंद लम्हे पहले स्थल सेनाध्यक्ष की सूचना दिल्ली में प्रधानमंत्री निवास पहुंच चुकी थी।
उक्त घटनाक्रम के बाद कुछ ही मिनटों में प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के कार्यालय के माध्यम से इस खबर का सार्वजनिक शंखनाद कराया गया कि भारत ने अपना प्रथम सफल परमाणु परीक्षण सम्पन्न किया है। रात पौने नौ बजे के आकाशवाणी के नियमित समाचार की तो हम प्रतीक्षा कर ही रहे थे, कि उससे जरा सा पहले ही रेडियो में बज रहा गाना “हम तुम एक कमरे में बंद हों और….” सहसा रोककर ब्रेंकिंग न्यूज में भारत की इस महान उपलब्धि की उद्घोषणा कर दी गई थी। परिवार में हम सब रेडियो समाचार पर कान लगायें बैठे सब सुन रहे थे। चाचाजी ने कहा कि इन्दिरा जी ने एक और इतिहास रच दिया।
(सतीश कुमार की पोस्ट से साभार)
