सम्पादकीय

कविताएंः आनंद बहादुर

July 8, 2020

1 हम पहाड़ हैं  हमारे अंदर से  वे कंदराएं बोलती है जिन्हें प्रेम ने वहां सिरज रखा है  उन फिसलनदार चट्टानों से आती है आवाजें  जो घृणा से उपजी हैं  किसी हावभाव से  किसी गुमनाम भूआकृति का मिलता है आभास  झलकने लगती हैं असंख्य दरारों से निकलकर  इधर-उधर बहने वाली छोटी छोटी नदियां  हमारे सारे […]

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कहानीः डॉक्टर के शब्द – आर. के. नारायण

July 5, 2020

आर॰ के॰ नारायण (10अक्टूबर 1906- 13म, 2001)   – साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित आर के नारायण अंग्रेजी साहित्य के भारतीय लेखकों में महत्वपूर्ण नाम है। मुख्यतः उपन्यास तथा कहानी विधा में  गंभीर यथार्थवाद के माध्यम से मानवीय मूल्यों  को सरल व सहज तरीके से अभिव्यक्त किया है। मालगुड़ी डेज़ घारावाहिक और फिल्म ‘गाइड’  से उन्हें हिन्दी क्षेत्रों में काफी लोकप्रि.ता मिली । आज पढिए उनकी […]

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कहानीः गुलाम रसूल- जितेन ठाकुर

June 28, 2020

     ऑंखें कुछ अभ्यस्त हुईं तो सड़क के दोनों तरफ खड़े हुए पेड़ों, टीलों और उनके पीछे के पहाड़ों की आकृतियाँ दिखलाई देने लगीं। अलबत्ता, घने अंधेरे के कारण इन आकृतियों की तराश अब भी दिखलाई नहीं दे रही थी। हवा न चलने के कारण सब कुछ स्थिर था, जिसने सन्नाटे को और अधिक गहरा […]

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सेठ संपादक के कूड़ेदान में फेंके गए प्रेमचंद

June 26, 2020

अनिल शुक्ल हंस संपादक संजय सहाय ने एक बयान देकर प्रेमचंद पर विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रेमचंद की 20-25 कहानियों को छोड़ बाक़ी सब ‘कूड़ा’ हैं। क्या संजय सहाय को यह नहीं पता है कि प्रेमचंद आधुनिक विश्व साहित्य के उँगलियों पर गिने जाने वाले उन कथाकारों में हैं जिनकी […]

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काली लड़कियों वाला घर – अमिताभ मिश्र

June 22, 2020

            राजीव अब फिर से पीछे की खिड़की से उस काले सौंदर्य को उसी तरह निहारने में लग गया था । राजीव शहर के जिस इलाके में रहता है वह ने शहर में है। ने शहर के भी जिस हिस्से में उसका घर है वह घनी आबादी का हिस्सा है। […]

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स्वतन्त्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना स्मृति सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित

June 20, 2020

चित्तौड़गढ़ । साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत संस्थान ’संभावना’ ने अपने संरक्षक और सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना के नाम पर दिए जाने वाले वार्षिक सम्मान के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की हैं। ।उल्लेखनीय है कि वियोगी हरि, ठक्कर बापा और माणिक्यलाल वर्मा के निकट सहयोगी रहे रामचन्द्र नन्दवाना का यह जन्म शताब्दी वर्ष […]

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कहानीः थोड़ा-सा प्रगतिशील- ममता कालिया

June 14, 2020

ममता कालिया सुपरिचित वरिष्ठ लेखिका हैं। वे साहित्य की सभी विदाओं- कहानी, नाटक, उपन्यास  कविता सहित पत्रकारिता में भी प्रमुख दकल रखती हैं । हिन्दी साहितय के परिदृश्य पर उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति सातवें दशक से निरन्तर बनी हुई है। आज पढ़ें उनकी कहानी- थोड़ा-सा प्रगतिशील विनीत ने अपनी सहपाठी चेतना दीक्षित के साथ दोस्‍ती, मुहब्‍बत […]

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जब लेखक के अंदर उसका रचनाकार होना ही उसे तोड़ने लगे…- प्रियंवद

June 13, 2020

वह स्थिति सबसे जटिल होती है जब लेखक के अंदर उसका रचनाकार होना ही उसको तोड़ने लगता है। अवसाद और बेचैनी, लम्बे समय तक कुछ भी नहीं लिख पाना, जो भी हो, लब्बोलुआब यह कि यह समझ लें कि कभी उत्तेजना और आवेग में लंबे समय तक नहीं लिखना है। यह खतरे को निमंत्रण देना […]

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सबके हबीब – जीवेश चौबे

June 8, 2020

पुष्यतिथि पर – अलग राज्य बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ में उपेक्षा व अनदेखी से वे खून का घूंट पीकर मध्यप्रदेश के भोपाल मे विस्थापित हो गए । आज भी सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ मे इस महान रंगकर्मी को वो सम्मान व स्थान नही दिया जा रहा है जिसके वे हकदार हैं । हालांकि रंगकर्म से […]

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कम्युनिस्ट आंदोलन: व्यंग्य कथाएं- असग़र वजाहत

June 6, 2020

कोई 10-15 साल पहले मैंने कम्युनिस्ट आंदोलन पर कुछ व्यंग्य कथाएं लिखी थीं।  वे बहुत कम  छपी है। उनमें से एक कथा भाषा पर भी है।उस कथा को फेसबुक पर लगाने की बात सोच रहा था कि ध्यान आया दरअसल वह एक पूरी सीरीज़ है और उस पर समग्रता में ही बात हो सकती है। […]

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