सम्पादकीय

कहानीः एक बूढ़े की मौत– शशिभूषण द्विवेदी

May 8, 2020

शशिभूषण द्विवेदी ( 26 जुलाई 1975-7 मई 2020) 26 जुलाई 1975 को उत्तर प्रदेश के  सुल्तानपुर में जन्मे शशिभूषण द्विवेदी का 7 मई 2020 को आकस्मिक निधन हो गया । वे 45 वर्ष के थे।  ‘एक बूढ़े की मौत’, ‘कहीं कुछ नहीं’, ‘खेल’,  ‘खिड़की’, ‘छुट्टी का दिन’ और ‘ब्रह्महत्या’ जैसी कहानियों से हिंदी कथा साहित्य को […]

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दूसरे देश में- अर्नेस्ट हेमिंग्वे

May 7, 2020

शरत् ऋतु में भी वहाँ युद्ध चल रहा था, पर हम वहाँ फिर नहीं गए। शरत् ऋतु में मिलान बेहद ठंडा था और अँधेरा बहुत जल्दी घिर आया था। फिर बिजली के बल्ब जल गए और सड़कों के किनारे की खिड़कियों में देखना सुखद था। बहुत सारा शिकार खिड़कियों के बाहर लटका था और लोमड़ियों […]

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शंकरानंद की कविताएं-

April 30, 2020

1-भरोसा कोई अगर आंख बंद किए चल रहा है हाथ पकड़ कर तो उसके रास्ते के पत्थर देखना संभालना गिरने से पहले जब भी वह कुछ कहे तो सुनना देखना कि उसकी आंखें क्या देखना चाहती हैं सुनना उसकी हर आवाज जो कहने से पहले रुक जाए कंठ में बहुत मुश्किल से मिलता है वह […]

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व्यंग्य: कोरोना काल में पूछना ताऊ के हालचाल – जीवेश चौबे

April 29, 2020

कोरोना का कहर है और देश  क्या पूरे संसार में बहुतई मारा मारी मची पड़ी है । ऐसा समय है कि जान पहचान वाले क्या दोस्त यार मां बाप- बेटे- बेटी से लेकर प्रेमी प्रेमिका तक मिल नहीं पा रहे । अब विदेशियों का क्या वो तो पहले ही परिवार से दूर रहते हैं, तकलीफ […]

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किस्सागो के संस्मरण -पल्लव

April 24, 2020

वे बोले, ”ठीक है। केवल इस बात का ध्‍यान रखना कि जो कुछ भी लिखो, वह अधिकतर तुम्‍हारे अपने ही अनुभवों के आधार पर हो। व्यर्थ की कल्‍पना के चक्कर में कभी न पड़ना।”  (शरत के साथ बिताया कुछ समय – अमृतलाल नागर )  एक समय था जब अमृतलाल नागर को हिंदी कथा लेखन का आखिरी मुग़ल […]

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अकाल मृत्यु- स्वयं प्रकाश

April 20, 2020

स्वयं प्रकाश हिन्दी साहित्य का चिरचरिचित नाम है । समाज को जड़ता से बाहर निकाल उसे  प्रगतिशील मूल्यों की तरफ चलने को प्रेरित करती सामाजिकता के सरोकार से भरी उनकी कहानियाँ  पढने में जितनी सरलता का बोध कराती है उतनी ही ज्यादा वे भीतर से झकझोरती हैं । स्वयं प्रकाश की कहानियाँ पूरे भारतीय समाज […]

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नंद चतुर्वेदी की जयंती 21 अप्रैल पर उनकी कुछ कविताएंः

April 20, 2020

21 अप्रैल, 1923 को जन्मे साहित्यकार नंद चतुर्वेदी को लोग प्यार से नंद बाबू कहते थे । ब्रजभाषा से कविताई आरंभ करने वाले  नंद बाबू एक कवि के साथ ही बहुत अच्छे गद्यकार भी थे। एक कवि के रूप में नंदबाबू की दृष्टि प्रगतिगामीऔर वैश्विक थी । निबंध संग्रह‘शब्द संसार की यायावरी’ और कविता संग्रह-यह समय मामूली नहीं जैसी […]

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आखिरी पत्ता-ओ हैनरी

April 18, 2020

मशहूर कहानीकार ओ. हेनरी की विश्वविख्यात कृति ‘ दी लास्ट लीफ ‘ का हिंदी रूपांतरण।यह कहानी एक शराबी, बूढ़े असफल चित्रकार की है जो अपनी अंतिम मास्टरपीस कलाकृति- आखिरी पत्ते को पेंट करके, एक मासूम लड़की की जान बचाता है।  वाशिंगटन चौक में गलियां पागलों की तरह इधर-उधर दौड़ती हुई जमीन को छोटे-छोटे पट्टों में […]

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एक आदिम रात्रि की महक — फणीश्वरनाथ ‘रेणु’

April 13, 2020

यह वर्ष  फणीश्वरनाथ रेणु की जन्मशताब्दी वर्ष है। हमारी कोशिश होगी कि हम लगातार उनकी रचनाओं को आपके लिए लेकर आएं। आज पढिए कहानी – एक आदिम रात्रि की महक -(संपादक) .न …करमा को नींद नहीं आएगी। नए पक्के मकान में उसे कभी नींद नहीं आती। चूना और वार्निश की गंध के मारे उसकी कनपटी […]

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मुख्य मंत्री को हर जमात के साथ दृढ़तापूर्वक खड़े होना ही चाहिए – जीवेश चौबे

April 12, 2020

हर राज्य प्रमुख यानि मुख्य मंत्री को हर समुदाय , जमात और जमातियों  के साथ मजबूती से खड़े होना ही चाहिए, हां ये ज़रूर है कि वो किसी भी समुदाय या जमात के उत्पातियों  के साथ नहीं हो सकता। और ये तो सच है ही कि हर समुदाय और जमात में उत्पाती होते ही हैं। […]

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