सम्पादकीय

कहानीः स्वार्थी राक्षस – ऑस्कर वाइल्ड

October 7, 2020

ऑस्कर वाइल्ड (15 अक्टूबर 1854-30 नवम्बर 1900-पेरिस) – अद्भुत कल्पनाशीलता और प्रखर विचारों के धनी ऑस्कर वाइल्ड ने कई उल्लेखनीय  कविता, कहानी,उपन्यास और नाटक लिखे। अँग्रेजी साहित्य में उनका नाम प्राथमिकता से लिया जाता है। विश्व की कई भाषाओं में उनकी कृतियाँ अनुवादित हो चुकी हैं। ‘द बैलेड ऑफ रीडिंग गोल’ और ‘डी प्रोफनडिस’, ‘द […]

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कहानीः कुल कलंक- इतालो काल्विनो

October 4, 2020

इतालो काल्विनो (1923-1985) – क्यूबा में जन्मे इतालो काल्विनो प्रसिद्ध इतालवी पत्रकार और कथाकार थे जिन्हे विश्वयुद्ध के बाद के सर्वश्रेष्ठ कहानीकारों में शामिल किया जाता है। उन्हें उनकी अद्भूत किस्सागोई के लिए जाना जाता है. आज पढें उनकी  चर्चित कहानी ‘दि ब्लैक शीप’ जिसका हिंदी अनुवाद (कुल कलंक) युवा कथाकार चंदन पांडेय ने किया है.– […]

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कहानीः बगावत की वजह- इतालो काल्विनो

September 30, 2020

इतालो काल्विनो (1923-1985) – क्यूबा में जन्मे इतालो काल्विनो प्रसिद्ध इतालवी पत्रकार और कथाकार थे जिन्हे विश्वयुद्ध के बाद के सर्वश्रेष्ठ कहानीकारों में शामिल किया जाता है।उन्हें उनकी अद्भूत किस्सागोई के लिए जाना जाता है.उन्होने जितना लिखा है सब प्रतिनिधि है. आलोचकों का मानना है कि काजुओ इशिगुरो और ओरहान पामुक जैसे लेखकों में अक्सर काल्विनो […]

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मुल्क राज आनंद : जिन्हें अंग्रेजी भाषा का प्रेमचंद भी कहा जा सकता है

September 29, 2020

अनुराग भारद्वाज मुल्क राज आनंद पहले अंग्रेज़ी लेखक भी कहे जा सकते हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं में हिंदी और पंजाबी शब्दों का प्रयोग किया जो भारतीय समाज प्रेमचंद के ‘कफ़न’ या ‘गोदान’ में नज़र आता है, या जयशंकर प्रसाद की कहानियों में झलकता है, वही समाज और उसका दर्द, अंग्रेज़ी के लेखक मुल्क राज आनंद […]

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कपिला वात्स्यायन के निधन ने साबित किया है कि संस्कृति की असल पहचान से ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवादी’ कितने दूर हैं

September 26, 2020

शंकर शरण सांस्कृतिक राष्ट्रवादियों की दृष्टि अपनी पार्टी का प्रचार, पार्टी नेताओं की पूजा-आरती और दूसरों की निंदा से आगे कभी नहीं जा सकी. यदि वे धर्म और संस्कृति को सर्वोपरि समझते तो उनका रिकॉर्ड बहुत भिन्न रहा होता. कपिला वात्स्यायन जैसी अनूठी विदुषी के निधन पर राष्ट्रीय नेताओं की चुप्पी ने ध्यान खींचा. इसलिए भी क्योंकि […]

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कहानीः उड़ान- कृष्ण बलदेव वैद

September 25, 2020

कृष्ण बलदेव वैद (27 जुलाई 1927 – 6 फ़रवरी 2020) हिन्दी के आधुनिक गद्य-साहित्य में सब से महत्वपूर्ण लेखकों में गिने जाने वाले साहित्यकार कृष्ण बलदेव वैद ने डायरी लेखन, कहानी और उपन्यास विधाओं के अलावा नाटक और अनुवाद के क्षेत्र में भी अप्रतिम योगदान दिया। कृष्ण बलदेव वैद की लेखनी में मनुष्य जीवन के […]

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जिसे न दे मौला, उसे दे आसफ़ुद्दौला

September 24, 2020

अनुराग भारद्वाज नवाब आसफ़ुद्दौला अवध का एक रंगीन मिज़ाज और दरियादिल नवाब था जिसने एक दफ़ा तो अपने खानसामे को वज़ीर बना दियाशुजाउद्दौला के बाद नवाब आसफ़ुद्दौला को फ़ैज़ाबाद की गद्दी मिली थी. वह अवध की राजधानी को फ़ैज़ाबाद से लेकर लखनऊ आया. इसके अलावा भी आसफ़ुद्दौला को कई खास बातों के लिए याद किया जाता […]

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कहानीः दो बूंद आंसू- इवान सर्जीविच तुर्गनेव

September 22, 2020

इवान सर्जीविच तुर्गनेव  – (1818-1883)  रूसी कथाकार  इवान सर्जीविच तुर्गनेव यथार्थवादी लेखक थे। उनकी रचनाओं में प्रेम प्रमुख रूप से शामिल रहता था। यही उनकी रचनाओं  की सबसे बड़ी ताकत थी। ऐसा कहा जाता है कि इवान सर्जीविच तुर्गनेव यूरोप का पहला आधुनिक कथाकार था। आज पढ़ें उनकी कहानी दो बूंद आंसू- इवान सर्जीविच तुर्गनेव वह […]

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जब दिनकर ने लिखा, ‘मानवता की जो कब्र वही गांधी की भी होगी समाधि…’

September 22, 2020

अव्यक्त असली वीरता और छद्म वीरता के जिस फर्क को रामधारी सिंह दिनकर ने अपने काव्य संग्रह ‘बापू’ के जरिए समझाया था, उसे आज और गहराई से समझने की जरूरत हैआज रामधारी सिंह दिनकर को याद करने का दिन है. सब उन्हें उनकी ओजमयी कविताओं के माध्यम से याद कर रहे हैं. जैसे महात्मा गांधी […]

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मीर तक़ी मीर : शायरी का ख़ुदा जिसकी निगहबानी में उर्दू जवान हुई

September 20, 2020

अनुराग भारद्वाज अली सरदार जाफ़री ‘दीवाने मीर’ में लिखते हैं, ‘यद्यपि आज आम लोकप्रियता के विचार से ग़ालिब और इक़बाल, मीर से कहीं आगे हैं फिर भी ग़ालिब और इक़बाल की शायराना महानता को इनकार करने वाले मौजूद हैं. मगर मीर की उस्तादी से इनकार करने वाला कोई नहीं है. ‘रेख्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं […]

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