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Year: 2020

खास रिपोर्ट: पंजाब में वापस लौटने लगे प्रवासी मजदूर

अमररीक जालंधर। कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से पूरब का पंजाब से रिश्ता एकबारगी टूट गया था। यहां रोजी-रोटी कमा रहे दस लाख से ज्यादा मजदूर वापस उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड लौट गए थे। इतने बड़े पैमाने पर हुए प्रवासी श्रमिक पलायन ने सूबे के किसानों और उद्योगपतियों को गहरी चिंता में डाल…

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सोनिया गांधी का पत्र: यह वक्त दलगत बयानबाज़ी का नहीं बल्कि लोगों का जीवन बचाने का है

(कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मनरेगा स्कीम को लेकर एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि देश पर कोरोना का महासंकट छाया हुआ है और उसके चलते भूख और गरीबी दावानल के आग की तरह बढ़ती जा रही है। ऐसे मौके पर उससे लड़ने के लिए मनरेगा सबसे कारगर हथियार के तौर पर…

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रंगकर्मी हबीब तनवीर की पुण्यतिथिः एक लोकधर्मी आधुनिक नाटककार –

जाहिद खान आधुनिक रंगमंच में हबीब तनवीर की पहचान लोक को पुनर्प्रतिष्ठित करने वाले महान रंगकर्मी की है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 1 सितम्बर, 1923 को जन्मे हबीब तनवीर, रंगमंच में अपने आगाज से लेकर अंत तक उन सांस्कृतिक मूल्यों-रंगों को बचाने में लगे रहे, जिनसे हमारे मुल्क की मुकम्मल तस्वीर बनती है। उर्दू…

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बड़े गुलाम अली खान की यह प्रस्तुति बताती है कि भारतीय संस्कृति है क्या और वह क्या नहीं हो सकती है- रामचंद्र गुहा

बड़े गुलाम अली खान की यह प्रस्तुति एक अद्भुत गायन होने के साथ-साथ हमारी सांस्कृतिक विविधता और सभ्यता को एक शानदार श्रद्धांजलि भी है- https://www.youtube.com/watch?v=VWXVj2Xus7E&feature=youtu.be अक्सर ही ऐसा होता है कि मैं काम से फारिग होकर शाम के खाने से पहले करीब एक घंटे तक भारतीय शास्त्रीय संगीत सुनता हूं. पहले मेरा सहारा वे कैसेट…

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कालों के रोष प्रदर्शन की प्रतिक्रिया में गोरों का जवाबी प्रदर्शन क्यों नहीं? -अपूर्वानंद

एक गोरा पुलिस अधिकारी एक ग़रीब काले की गर्दन को अपने घुटने से दबाता चला जाता है, अपने पेशे का अधिकार मानकर, उसकी घुटी चीख़ों को अनसुना करते हुए और उसके साथी अधिकारी ऐसा करने में उसे बाधा न हो, इसलिए घेरा देकर खड़े रहते हैं, यह चित्र अमेरिका की आत्मछवि पर एक कलंक है।…

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सबके हबीब – जीवेश चौबे

अलग राज्य बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ में उपेक्षा व अनदेखी से वे खून का घूंट पीकर मध्यप्रदेश के भोपाल मे विस्थापित हो गए । आज भी सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ मे इस महान रंगकर्मी को वो सम्मान व स्थान नही दिया जा रहा है जिसके वे हकदार हैं । हालांकि रंगकर्म से जुड़े लोग, संस्थाएं…

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सावरकर, द्विराष्ट्र सिद्धांत और हिंदुत्व -राम पुनियानी

 गत 28 मई, 2020 को विष्णु दामोदर सावरकर चर्चा में थे. उस दिन जहां कर्नाटक में विपक्षी दलों ने येलाहंका फ्लाईओवर का नामकरण सावरकर के नाम पर करने का विरोध किया वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सावरकर को  श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अनेक व्यक्तियों को स्वाधीनता संग्राम में भाग लेने की…

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द हैप्पी बड्डे ऑफ़ सुमन चौधरी- अंजू शर्मा

अंजू शर्मा की  कहानियां पिछले कई वर्षों से प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं. सुंदर कथा शिल्प और अलग-अलग पृष्ठभूमि और भाषाई प्रयोगों के माध्यम से लिखी गईं इन सभी कहानियों में अपने समय की अनुगूंज है . कहानी संग्रह ‘एक नींद हज़ार सपने’ है और हाल ही में उनका कहनी संग्रह ‘सुबह ऐसे…

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ऐसे थे अपने बासुदा : अशोक मिश्र

 ‘बसु’ का अर्थ होता है, प्रतिभा, प्रकाश, समृद्ध! अपने बासुचटर्जीदा तीनों थे ! उनकी फिल्मों के बारे में सब जानते हैं लेकिन उनके व्यक्तित्व के बारे में जितना जानो उतना कम. सामान्य सी बुश्शर्ट जो ज्यादातर सफ़ेद होती और फुलपेंट. आप उनके घर पहुंच जाओ तो लुंगी और सफ़ेद कुरते में नज़र आते. जूता शायद…

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आज भी अधूरे हैं मार्टिन लूथर किंग के सपने

एल. एस. हरदेनिया वर्ष 1963 में अगस्त 29 को अमरीका की राजधानी वाशिंगटन में एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन का नेतृत्व मार्टिन लूथर किंग जूनियर कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी ‘हमें सम्मान और काम चाहिए’। इस प्रदर्शन में दो लाख लोग शामिल थे। प्रदर्शनकारियों में अश्वेत और श्वेत दोनों शामिल थे। अश्वेत90 प्रतिशत और श्वेत 10 प्रतिशत थे। प्रदर्शनकारियों…

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