सम्पादकीय

माखनलाल चतुर्वेदी ने लिखा था- पुलिस,वजीर सब किसान की कमाई का खेल

April 5, 2021

एम.ए. समीर किसान-कवि, लेखक और निर्भीक पत्रकार माखनलाल चतुर्वेदी राजद्रोह में जेल गए, CM पद ठुकराया और सम्मान लौटाया शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसने स्कूली शिक्षा के दौरान या फिर साहित्य-अध्ययन के दौरान ‘पुष्प की अभिलाषा’ कविता न पढ़ी हो. चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूंथा जाऊं, चाह नहीं प्रेमी-माला में […]

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साहिर शताब्दीः पल, दो पल का शायर

April 3, 2021

रज़ा नईम साहिर लुधियानवीः 1921-1980-  “साहिर लुधियानवी की शायरी में अपने वक्त और आम आदमी के हक-हुकूक की आवाज खुलकर उठी” सौ साल पहले मार्च में लुधियाना के एक पंजाबी जमींदार परिवार में जन्मे अब्दुल हई बाद में साहिर लुधियानवी नाम से मशहूर हुए। 1980 में मुंबई में उनका निधन हुआ। वे धनी-मानी जमींदार के […]

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मोतियों की हाट और चिनगारियों का एक मेला-प्रियदर्शन

March 27, 2021

कई अर्थों में महादेवी वर्मा हिंदी की विलक्षण कवयित्री हैं। उनमें निराला की गीतिमयता मिलती है, प्रसाद की करुण दार्शनिकता और पंत की सुकुमारता- लेकिन इन सबके बावजूद वे अद्वितीय और अप्रतिम ढंग से महादेवी बनी रहती हैं। उनके गीतों से रोशनी फूटती है, संगीत झरता है। शब्द उनके यहाँ जैसे कांपते हुए फूल हो […]

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किताबख़ानाः वन अरेंज्ड मर्डर- ‘जब प्यार में आप किसी को गुझिया बुलाने लगें तो ज़रा रुककर सोचना चाहिए’

March 21, 2021

वेस्टलैंड पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित, चेतन भगत की किताब ‘वन अरेंज्ड मर्डर’ का अंश हाय, मेरा नाम केशव राजपुरोहित है और मैं बहुत अच्छा इंसान नहीं हूं. मैं इमोशनल भी नहीं हूं. प्यार-व्यार में मुझको भरोसा नहीं. मैं टिंडर का इस्तेमाल करके लड़कियों से मिलता तो हूं, लेकिन केवल उनके साथ सेक्स करने के मक़सद से. […]

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अनामिका को उनके संग्रह ‘टोकरी में दिगंत’ पर साहित्य अकादमी सम्मानः ये कविताएं नहीं, सभ्यता की अनसुनी आवाज़ें हैं – प्रियदर्शन

March 13, 2021

अनामिका को साहित्य अकादेमी सम्मान मिलने की घोषणा के साथ ही हिंदी के सोशल मीडिया संसार में जैसे जश्न शुरू हो गया है। मुझे याद नहीं आता, हिंदी में किसी पुरस्कार पर ऐसे सामूहिक उल्लास का माहौल पहले कब बना था। यह उनको हासिल व्यापक स्वीकृति और स्नेह का सूचक है। इसका श्रेय जितना अनामिका […]

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सुरेश स्वप्निलः‘ समय के विरुद्ध’ जीने वाला शख़्स

March 10, 2021

शरद कोकास आज 10 मार्च, सुरेश स्वप्निल का जन्मदिन है । सुरेश स्वप्निल से मेरी पहली मुलाकात मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा, जानकी रमण महाविद्यालय बलदेव बाग, जबलपुर में आयोजित दस दिवसीय कविता रचना शिविर के प्रथम दिन अर्थात 21 मई 1984 को हुई थी । उन दिनों छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश अलग अलग नहीं हुआ था […]

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“जो नहीं बदला है वह है ‘राजनैतिक हिंदुत्व’!”

March 9, 2021

वंदिता मिश्रा नामवर सिंह जैसे दिग्गज साहित्यकार के मार्गदर्शन में काम कर चुके पुरुषोत्तम अग्रवाल की नयी पुस्तक ‘कौन हैं भारत माता?’ प्रकाशित हुई। उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सम्बंध में मिथकों को तोड़ने, सत्य को उभारने और प्रकाश को सही जगह डालने की भरपूर कोशिश की है। पुस्तक में वो नेहरू […]

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रज़ा शताब्दी वर्षः सैय्यद हैदर रज़ा साहब के चित्रों को देखते हुए

February 27, 2021

मुकेश बिजौले भारतीय दर्शन में रज़ा साहब का गहरा विश्वास रहा है यही कारण है कि वे आंतरिक स्तर पर  आध्यात्मिक यात्रा करते हुए विंदु पर एकाग्र हो जाते हैं जो उनकी कला यात्रा का महत्वपूर्ण केंद्रीय रूपाकार है, बल्कि रंग और रूपों के माध्यम से भारतीयता को महसूस कराते हैं। रज़ा साहब भारतीय कला परम्परा […]

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अमृतलाल नागर: हाईस्कूल पास एक साहित्यकार जिसे दुनिया पढ़ती है

February 24, 2021

एम.ए. समीर हिंदी साहित्य में महान कथाकार अमृतलाल नागर का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है अगर यह कहा जाए कि उपन्यास-सम्राट प्रेमचंद की अमर कृति ‘गोदान’ की तुलना का कोई उपन्यास है तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह उपन्यास महान साहित्यकार अमृतलाल नागर का ‘मानस का हंस’ है. हिंदी साहित्य […]

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ये हमारी चॉइस नहीं है कि हमें एक्टिविस्ट बनना है : राजवीर कौर

February 24, 2021

नाज़मा ख़ान ”ये हमारी चॉइस नहीं है कि हमें एक्टिविस्ट बनना है, लेकिन अगर आपको जीना है, तो हर ग़लत के ख़िलाफ़ खड़ा होना होगा।” यह कहना है नौदीप की बहन  राजवीर कौर का। नाज़मा ख़ान ने उनसे मुलाकात और बात की।  मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं […]

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