आलेख

‘मन की बात’ करने वाले ‘मनरेगा’ की बात क्यों करने लगे?

May 20, 2020

By- हृदयेश जोशी मनरेगा को नाकामियों का स्मारक बताने वाले अचानक से मनरेगा में अपने मुक्ति का मार्ग क्यों खोजने लगे हैं? बात मनरेगा के बहाने सामाजिक सुरक्षा की, आखिर क्यों पूरी दुनिया में धुर पूंजीवाद की वकालत करने वाले शासक भी संकट के समय साम्यवादी हो जाते हैं. 20 लाख करोड़ के विशेष पैकेज […]

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Azim Premj : The interests of workers, businesses are deeply aligned, especially in these times of crisis

May 20, 2020

By-Azim Premji Sixteen young men were mowed down by a train. The details are still being investigated. But we do know the basic truth. Like millions of others who lost their livelihood, they were starving. So, they decided to walk a few hundred kilometres to their homes and slept on the tracks assuming no trains […]

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बिगाड़ के डर से ईमान की बात न करना ‘विवेक’ का विपथ होना है

May 19, 2020

By- सत्यम श्रीवास्तव देश का संविधान क्या अपने नागरिकों की इस दुर्दशा पर आपसे आँखें मूँद लेने की उम्मीद करता है या देश का संविधान अपने नागरिकों के गरिमामय जीवन की रक्षा के लिए प्रतिबद्धता को बार बार स्थापित किए जाने के लिए आपके न्यायालय का रास्ता नागरिकों को दिखाता है? माननीय सर्वोच्च न्यायालय से […]

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आज भारत को टुकड़ों में किसने बाँट दिया?- अपूर्वानंद

May 18, 2020

रेल मंत्री चुन कर उन राज्यों पर आक्रमण करें जहाँ उनके दल की सरकार नहीं है, वह भी इस विपदा की घड़ी में, इससे ज़ाहिर होता है कि भारतीयता जैसी कोई उदात्त भावना नहीं जो राजनीति से ऊपर उठाने की ताक़त रखती हो। “चारों दिशाओं से चारों दिशाओं में  उजड़े घर छोड़कर  दूसरे उजाड़ों में […]

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21 लाख करोड़ कोरोना पैकेज़ में राहत के सिर्फ़ 2 लाख करोड़?

May 18, 2020

मुकेश कुमार सिंह – दरअसल, प्रधानमंत्री जानते थे कि देश की माली हालत ऐसी नहीं है कि वो दिल खोलकर मदद बाँट सकें। लिहाज़ा, उन्होंने ‘भाषणं किम् दरिद्रतां’ यानी ‘भाषण देने में भी कंजूरी क्यों करें’ वाली रणनीति बनायी। इसीलिए राहत का ऐलान हुआ 2 लाख करोड़ रुपयेका, लेकिन भाषणबाज़ी हुई 21 लाख करोड़ रुपये […]

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कला, युद्ध और फासीवाद– वाल्टर बेंजामिन

May 17, 2020

वाल्टर बेंजामिन (जन्म : 15 जुलाई 1892 – निधन : 26 सितंबर 1940 ) वाल्टर बेंजामिन जर्मन के एक दार्शनिक, सांस्कृतिक आलोचक और निबंधकार थे. बेंजामिन ने सौंदर्य सिद्धांत एवं साहित्यिक आलोचना   के लिए प्रभावशाली योगदान दिया. आधुनिक समाज में सर्वहारा वर्ग का बढ़ना और जनता का बढ़ना, दोनों एक ही प्रक्रिया के दो पहलू हैं। फासीवाद की […]

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कानून के चाबुक से जिहाद पर बदले सुरः असली अर्थ को समझने की ज़रुरत-राम पुनियानी

May 16, 2020

जिहाद और जिहादी – इन दोनों शब्दों का पिछले दो दशकों से नकारात्मक अर्थों और सन्दर्भों में जम कर प्रयोग हो रहा है. इन दोनों शब्दों को आतंकवाद और हिंसा से जोड़ दिया गया है. 9/11 के बाद से इन शब्दों का मीडिया में इस्तेमाल आम हो गया है. 9/11/2001 को न्यूयार्क में वर्ल्ड ट्रेड […]

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कौन थीं संत कोरोना

May 16, 2020

कोरोना वायरस से फैली महामारी के दौर में जर्मनी की संत कोरोना चर्चा में आ गई हैं. जर्मनी के आखेन कैथीड्रल उनका अस्थि अवशेष रखा है. कोरोना वायरस से फैली महामारी के कारण अब तक दुनिया भर में लाखों लोगों की जान जा चुकी है. इस कठिन दौर में लोगों का ध्यान ईसाई संत कोरोना […]

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करोड़ों युवाओं ने गंवाई नौकरी

May 14, 2020

प्रवासी मजदूरों के पलायन के बीच एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है कि देश में करोड़ों शिक्षित युवा बेरोजगार हो गए हैं जिनकी उम्र 20 से 30 साल के बीच हैं, सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमीकी रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल महीने में देश के 2.7 करोड़ युवाओं की नौकरी चली गई, ये युवा 20 […]

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अंबेडकर को याद करें हम भारत के लोग — प्रियदर्शन

May 12, 2020

 ‘हम भारत के लोग’- यहां से शुरू होने वाली भारतीय संविधान की प्रस्तावना में यह ‘हम’ कौन है? यह सवाल कुछ वैसा ही है जैसा रघुवीर सहाय ने अपनी मशहूर कविता में पूछा था- ‘जन गण मन में भला कौन यह भारत भाग्य विधाता है / फटा सुथन्ना पहने जिसके गुण हरचरना गाता है।’ लेकिन […]

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