सम्पादकीय

कहानीः बुलबुल और गुलाब – ऑस्कर वाइल्ड

February 6, 2021

ऑस्कर वाइल्ड (15 अक्टूबर 1854-30 नवम्बर 1900-पेरिस) – अद्भुत कल्पनाशीलता और प्रखर विचारों के धनी ऑस्कर वाइल्ड ने कई उल्लेखनीय  कविता, कहानी,उपन्यास और नाटक लिखे। अँग्रेजी साहित्य में उनका नाम प्राथमिकता से लिया जाता है। विश्व की कई भाषाओं में उनकी कृतियाँ अनुवादित हो चुकी हैं। ‘द बैलेड ऑफ रीडिंग गोल’ और ‘डी प्रोफनडिस’, ‘द […]

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जयशंकर प्रसाद साहित्य जगत के बुद्ध थे

February 1, 2021

कविता बनारस ज्ञान, भोग और भक्ति का संगम है तो यहां जन्मे जयशंकर प्रसाद ज्ञान, अध्यात्म और देशभक्ति का संगम थे कुछ एक शहरों के लिए कहा जा सकता है कि वे एक जगह थमे हैं तो उतने प्रवाहमान भी हैं. बनारस इन्हीं में से एक है. अपनी सांस्कृतिक पहचान, जिसमें उसका भदेसपन शामिल है, […]

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किताबखा़नाः नए संदर्भों में सफदर

January 31, 2021

फरीद खान हर दिल अजीज रंगकर्मी सफदर हाशमी के जिक्र से कई सियासी सूत्र खुलते हैं” जब लोकतांत्रिक अधिकारों पर कई तरह के पहरे मढ़े जा रहे हों तो हर दिल अजीज रंगकर्मी सफदर हाशमी के जिक्र से कई सियासी सूत्र खुलते हैं। रंगकर्मी, सफदर के अभिन्न मित्र और उनकी हत्या के चश्मदीद गवाह सुधन्वा […]

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कमलेश्वर की कलम पानी जैसी थी, वे उसे जिस विधा में रख देते वह उसी के रंग में ढल जाती थी

January 28, 2021

कविता कहानी और उपन्यास के अलावा सम्पादन, पत्रकारिता, अनुवाद, फिल्म पटकथा और संवाद लेखन कमलेश्वर के व्यक्तित्व के बिलकुल अलग-अलग आयाम रहे मनोहर श्याम जोशी ने अपने विभिन्न विधाओं में समानांतर आवागमन पर किए गए सवालों पर बड़े स्पष्ट लहजे में कभी कहा था, ‘जो भी विधा मुझे अपने पास बुलाएगी, मैं वहां चला जाऊंगा…’ […]

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कृष्णा सोबती: लोकतंत्र की हिफाजत में प्रतिरोध की एक बुलंद आवाज

January 25, 2021

अमरीक सिंह कृष्णा सोबती उन लोगों में शामिल नहीं थीं जो यह मानते हैं कि एक लेखक का काम सिर्फ लिखना होता है साहित्य-संस्कृति के इतिहास ने कृष्णा सोबती के नाम बहुत कुछ दर्ज किया है. उनके लिखे अल्फाज जिंदगी के हर अंधेरे कोने में दिया बनके कंदीलें जलाने को तत्पर मिलते हैं. फूलों को […]

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कहानीः उज्ज्वल भविष्य- स्वयं प्रकाश

January 20, 2021

स्वयं प्रकाश हिन्दी साहित्य का चिरचरिचित नाम है । समाज को जड़ता से बाहर निकाल उसे प्रगतिशील मूल्यों की तरफ चलने को प्रेरित करती सामाजिकता के सरोकार से भरी उनकी कहानियाँ  पढने में जितनी सरलता का बोध कराती है उतनी ही ज्यादा वे भीतर से झकझोरती हैं । स्वयं प्रकाश की कहानियाँ पूरे भारतीय समाज को अपने दायरे में लेती हैं […]

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सआदत हसन मंटो : जो खुद को अपनी ही जेब काटने वाला जेबकतरा मानते थे

January 19, 2021

कविता सआदत हसन मंटो के ही शब्दों में कहें तो उन्होंने अफसाने नहीं लिखे थे, बल्कि अफसानों ने उन्हें लिखा वे जानते थे शायद नेकनामी की तरफ जाने वाले रास्ते की पहली सीढ़ी बदनामी ही है. उनके प्रिय दोस्त और शायर साहिर लुधियानवी के शब्दों में कहें तो मंटो मानते थे-‘बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं […]

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मार्टिन लूथर किंग जूनियर : जिनके लिए ईसा मसीह प्रेरणास्रोत थे और महात्मा गांधी मार्गदर्शक

January 16, 2021

अव्यक्त ‘गांधी का संदेश इतना गहरा और विचारोत्तेजक था कि उस सभास्थल से मैं निकला और सीधे जाकर गांधी के जीवन और कार्यों के बारे में आधा दर्जन किताबें खरीद लाया.’ अपनी आत्मकथा में उन्होंने अपने विचारों और कार्यों पर महात्मा गांधी के प्रभाव के बारे में विस्तार से लिखा है. चार जुलाई, 1965 को […]

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हालात की कोख से जन्मी समझ से ही मज़बूत होगा अवामः कैफ़ी आज़मी

January 14, 2021

प्रभात  ज़िंदगी भर लाल परचम लिए घूमते रहे कैफ़ी की अवाम, उसमें निहित ऊर्जा और उसकी सत्ता में अगाध आस्था है. इसी अवाम के लिए वह सिर्फ शब्दों से आस्था नहीं गढ़ते रहे, उसके संघर्षों में लगातार साथ होकर जूझते भी रहे. सफलता-असफलता की उन्हें कोई परवाह नहीं थी. उनका दृढ़ मत रहा कि देर-सबेर […]

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कहानीः छिपा हुआ निशानची – लायम ओ’ फ़्लैहर्टी

January 10, 2021

लायम ओ’ फ़्लैहर्टी ( 28 अगस्त 1896- 7 सितंबर 1984)ः मशहूर आयरिश लेखक। आज पढ़ें उनकी कहानी The Sniper का अनुवाद- (अनुवाद सुशांत सुप्रिय) छिपा हुआ निशानची जून की शाम का लम्बा झुटपुटा रात में विलीन हो गया। डब्लिन अँधेरे के आवरण में लिपटा था, हालाँकि चाँद की मद्धिम रोशनी ऊन जैसे बादलों के बीच से झाँककर […]

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