सम्पादकीय

दारा शिकोह: वो मुग़ल शहज़ादा जिसकी क़ब्र तलाश कर रही मोदी सरकार

January 7, 2021

शकील अख्तर भारत सरकार इन दिनों 17वीं शताब्दी के मुग़ल शहज़ादे दारा शिकोह की क़ब्र तलाश रही है.भारत में दारा शिकोह को एक उदार चरित्र माना जाता है.यह नैरेटिव बनाने की कोशिश हो रही है कि वर्तमान मुसलमानों की तुलना में दारा शिकोह भारत की मिट्टी में ज़्यादा घुल मिल गए थे. मुग़ल बादशाह शाहजहाँ […]

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कहानीः चप्पल – कमलेश्वर

January 6, 2021

कमलेश्वर (6 जनवरी1932-27 जनवरी 2007) हिन्दी के प्रमुख लेखकों में से एक । वे ‘सारिका’ ‘धर्मयुग’, ‘जागरण’ और ‘दैनिक भास्कर’ जैसे प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं के संपादक रहे। उन्होंने कहानी, उपन्यास, पत्रकारिता, स्तंभ लेखन, फिल्म पटकथा जैसी अनेक विधाओं में लिखा।  उनके उपन्यासों `आंधी’, ‘मौसम (फिल्म)’, ‘सारा आकाश’,  आदि पर फिल्में भी बनी । उन्होंने  ‘रजनीगंधा’, ‘छोटी […]

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सफ़दर हाशमी : किसान और मज़दूरों के लिए आवाज़ उठाने वाले बागी कलाकार

January 5, 2021

ईशा सफ़दर हाशमी एक कम्युनिस्ट आर्टिस्ट, अभिनेता, कवि, गीतकार और सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनका जन्म 12 अप्रैल 1954 को दिल्ली में हुआ था। उनके माता-पिता भी कम्युनिस्ट विचारधारा से तालुक्क रखते थे और एक प्रगतिशील वामपंथी माहौल में ही सफ़दर की परवरिश हुई। दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ने के दौरान वह […]

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मोहन राकेशः एक लेखक का अपना रेगिस्तान – कमलेश्वर

January 4, 2021

राकेश की ज़िंदगी एक खुली किताब रही है. उसने जो कुछ लिखा और किया – वह दुनिया को मालूम है. लेकिन उसने जो कुछ जिया – यह सिर्फ़ उसे मालूम था ! अपनी सांसों की कहानी उसने डायरियों में दर्ज की है.राकेश की ये डायरियां – उसकी अपनी रिपोर्टें हैं, जो उसने अपने लिए तैयार […]

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वामिक़ जौनपुरीः भूका बंगाल नज़्म होने से पहले का वह ख़ौफ़नाक ख़्वाब

January 2, 2021

उर्दू की प्रगतिशील धारा के कवियों में जनाब वामिक़ जौनपुरी एक रौशन मीनार की तरह दीप्तिमान हैं. वामिक जौनपुरी के ख़्वाब के तजुर्बे बहुत दिलचस्प भी हुआ करते. उन्होंने कई ऐसे ख़्वाबों के बारे में लिखा है जो हर रोज़ रात को वहाँ से शुरू होते, जहाँ सुबह आँख खुलने पर छूट गए थे. उनकी मशहूर […]

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कहानीः आशा की यातना – विलिए दि ल’आइल-एदम

December 31, 2020

विलिए दि ल’आइल-एदम.    ( 7 नवंबर 1838 – 19 अगस्त 1889)   फ्रेंच. लेखक ।  कहानी, उपन्यास एवं नाटक की रचना । सूरज डूब चुका था। सारागोसा का वयोवृद्ध धर्माधिकारी पेड्रो अर्बुएज डि’एस्पिला अँधेरी सीढ़ियों से उतर रहा था। उसके पीछे-पीछे एक जल्लाद और आगे-आगे लालटेनें लिए हुए दो सेवक चल रहे थे। वह एक गुप्त […]

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क्या महामारी की आड़ में भारत के ‘कम जनतंत्र’ की ओर उन्मुख होने के रास्ते को सुगम किया जा रहा है? – सुभाष गाताडे

December 29, 2020

विश्वप्रसिद्ध रचना ‘रॉबिन्सन क्रूसो’ के लेखक डैनियल डेफो, (1660 -1731) बहुआयामी किस्म के व्यक्ति थे, व्यापारी थे, पत्रकार थे, लेखक थे, पर्चे भी लिखते थे। लंदन के निवासी रहे डैफो ने उनके जमाने में आए प्लेग की महामारी – जिसमें हजारों लोग मर गए थे – पर बाकायदा एक लम्बा पर्चा लिखा है- ‘ए जर्नल आफ द […]

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किसान आंदोलन में ‘ट्राली टाइम्स’: एक पत्रकार, एक सामाजिक कार्यकर्ता और कुछ जोशीले युवाओं का शाहकार

December 22, 2020

अवधेश कुमार सिंघु बॉर्डर परआंदोलन कर रहे किसानों के शुरुआती दिनों से ही मीडिया का एक तबका उनके खिलाफ दुष्प्रचार और फर्जी सूचनाएं फैलाता रहा. अब किसानों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है. किसानों ने “ट्राली टाइम्स” के नाम से किसानों का एक अखबार शुरू किया है. इस अखबार में पंजाबी और हिंदी भाषा […]

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कहानीः ज्योतिषी का एक दिन – आर. के. नारायण

December 19, 2020

आर॰ के॰ नारायण (10 अक्टूबर, 1906-  13 मई, 2001)  आर के नारायण का पूरा नाम रासीपुरम कृष्णस्वामी अय्यर नारायणस्वामी था। देवानंद की प्रसिद्ध फिल्म गाइड और लोकप्रिय टी वी सीरियल मालगुड़ी डेज़ के लिए हिन्दी जगत में लोकप्रिय हैं। आर॰ के॰ नारायण  के साथ मुल्कराज आनंद तथा राजा राव साहित्य में भारतीय अंग्रेजी लेखन के […]

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फॉर्म या कंटेंट के मुक़ाबले विचार हमेशा अहमः अहमद फ़राज़

December 17, 2020

प्रेम कुमार थॉट अपने साथ कंटेंट और फॉर्म भी लाता है. बाज़औक़ात एक शेर में अपने तजुर्बे का इज़हार हो जाता है और वो इतना मुक़म्मिल होता है कि उसको मजीद बढ़ाने की ज़रूरत नहीं होती. अमूमन ये शेर ग़ज़ल की फॉर्म अख़्तियार कर लेते हैं. बाज़ मौज़ूआत ऐसे होते हैं कि जो दो मिसरों […]

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