आलेख

फिल्म “वाय आई किल्ड गांधी” झूठ का पुलिंदा है- राम पुनियानी

February 15, 2022

फिल्म में गोडसे के बयान में सबसे बड़ा झूठ यह है कि गोडसे ने अकेले महात्मा गांधी की हत्या का षड़यंत्र रचा था. सरदार पटेल ने कहा था कि गांधीजी की हत्या की योजना हिन्दू महासभा ने बनाई थी. आगे चलकर जीवनलाल कपूर आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि ‘‘इन सभी तथ्यों को एकसाथ देखने से […]

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नफरत के दौर में सौहार्द्र की बातें -राम पुनियानी

January 22, 2022

पिछले माह मन को विचलित करने वाली अनेक घटनाएं हुई. ये घटनाएं हिंसा और स्त्रियों के प्रति द्वेष को बढ़ावा देने वाली, मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाने वाली और राष्ट्रपिता का अपमान करने वाली थीं. इसके साथ ही, ‘द वायर’ की शानदार खोजी पत्रकारिता से हमें ‘टेक फ्रॉग’ नामक खतरनाक मोबाइल एप के बारे में […]

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गाली देना, नफरत फैलाना, हिंसा भड़काना अब अपराध नहीं ! – राम पुनियानी

January 3, 2022

सूरजपाल अमु ने अत्यंत घटिया और नफरत फैलाने वाला भाषण दिया. उसके बाद उन्हें भाजपा की राज्य इकाई का प्रवक्ता बना दिया गया. गौरक्षा-बीफ के मुद्दे पर अखलाक की हत्या के आरोपियों में से एक की मौत हुई. एक तत्कालीन केंद्रीय मंत्री (महेश शर्मा) ने उसे श्रद्धांजलि दी और उसके शव को तिरंगे में लपेटा. […]

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मुनव्वर फारूकी का अपने काम को अलविदा कहना दुःखद है – राम पुनियानी

December 7, 2021

स्टेंडअप कामेडियन मुनव्वर फारूकी बंगलौर में एक परोपकारी संस्था के लिए अपना शो करने वाले थे. पूरे टिकट बिक चुके थे. फिर आयोजकों को यह सूचना दी गई कि उन्हें कार्यक्रम रद्द करना होगा. और कार्यक्रम रद्द हुआ. पुलिस ने इसका कारण यह बताया कि फारूकी एक विवादास्पद व्यक्ति हैं और उनके शो से कानून-व्यवस्था […]

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जिन्ना पर अखिलेश यादव की टिप्पणी: समकालीन राजनीति पर बढ़ता साम्प्रदायिकता का दबाव -राम पुनियानी

November 15, 2021

हमारे देश में जैसे-जैसे साम्प्रदायिकता का बोलबाला बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे राजनैतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सांप्रदायिक प्रतीकों और नायकों के इस्तेमाल का चलन भी बढ़ रहा है. अपने-अपने राजनैतिक एजेंडे की पूर्ति के लिए विभिन्न राजनैतिक शक्तियां अलग-अलग व्यक्तित्वों का इस्तेमाल कर रहीं हैं. लोगों को बांटने पर आधारित राजनीति का […]

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भागवत जी! मुसलमान सबसे पहले व्यापारी बन कर आये थे!

September 13, 2021

रविकान्त रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी चर्चित किताब ‘संस्कृति के चार अध्याय’ में लिखा है कि, “इसलाम जब  अपने निर्मल उत्कर्ष पर था, तब भी वह भारत में आ चुका था। किंतु, तब उसका आगमन मित्रता के नाते हुआ था। अरब, फ़लीस्तीन और मिस्र से भारत का प्राचीनतम व्यापारिक संबंध था। भारत और पश्चिम के […]

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वृद्धावस्था पेंशन में वृद्धि से इंकार, पूंजीपतियों पर देश न्यौछावर करती मोदी सरकार

September 9, 2021

प्रभात पटनायक केंद्र सरकार ने संसद में कहा है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता योजना के अंतर्गत बुजुर्गों को दी जाने वाली मासिक पेंशन की राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। इस समय इस योजना के अंतर्गत 60 से 79 साल तक उम्र वालों के लिए 200 रु महीना और 80 वर्ष और उससे अधिक आयु […]

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पांच सितम्बर शिक्षक दिवस उर्फ पोला दिवस – प्रभाकर चौबे

September 5, 2021

शीर्षक देखकर चौंकने की जरूरत नहीं है। दोनो की एक साथ याद यूं आई कि शिक्षक सरकार के सबसे बड़े पशुधन हैं। मराठी में बैल को पोल कहते हैं- हमारे यहां पोल आकर पोला हो गया। पोला है बैलों का त्यौहार। पोला के दिन बैलों को सजाते सँवारते हैं, उसकी पूजा करते हैं  कि हे […]

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विशेष: कृष्ण को कुछ इस तरह भी देखिए

August 30, 2021

अनिल जैन नज़रिया: हर समाज, देश और युग में कोई न कोई महानायक हुआ है जिसने अन्याय और अत्याचार के तत्कालीन यथार्थ से जूझते हुए स्थापित व्यवस्था को चुनौती दी है और सामाजिक न्याय की स्थापना के प्रयास करते हुए न सिर्फ अपने समकालीन समाज को बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी गहरे तक प्रभावित किया […]

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विभाजन की विभीषिका को क्यों याद करें हम?- राम पुनियानी

August 21, 2021

भारत का बंटवारा 20 वीं सदी की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था. बंटवारे के दौरान जितनी बड़ी संख्या में लोगों की जानें गईं और जिस बड़े पैमाने पर उन्हें अपने घर-गांव छोड़कर सैकड़ों मील दूर अनजान स्थानों पर जाना पड़ा, उस पैमाने की त्रासदी दुनिया में कम ही हुईं हैं. बंटवारे के घाव […]

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