मनोरंजन

ओपी नैयर : जो तालियों, सीटी और घोड़े की टापों से संगीत निकालते थे

January 29, 2021

अंजलि मिश्रा अक्खड़पन और स्वछंदता ओपी नैयर की पहचान थी और शायद इसी असर ने उनके संगीत को इतना लोकप्रिय बनाया यदि विद्रोह किसी के व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है तो उसका जिद्दी होना भी कोई असामान्य बात नहीं है. नैयर जिद्दी भी खूब थे. तभी तो लता मंगेशकर जैसी गायिका से कभी न गवाने […]

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‘तांडव’ हिंदू विरोधी नहीं बल्कि कुछ जगहों पर प्रो-हिंदू है

January 22, 2021

शुभम उपाध्याय भगवान शिव वाले सीन से जुड़े अनावश्यक विवाद में कोई तांडव के उस पक्ष की ओर क्यों नहीं देखता जो प्रो-हिंदू है? एक लोकतांत्रिक किरदार जिसका नाम शिवा है वह अपनी पार्टी खड़ी करते वक्त कहता है कि ‘हम सबके अंदर एक गुस्सा है. बहुत सारा गुस्सा… और मेरा तो नाम ही शिवा […]

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वंशवादी राजनीति, आज़ादी के नारों के बीच ‘तांडव’

January 16, 2021

दीपाली श्रीवास्तव ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़ॉन प्राइम वीडियो पर पॉलिटिकल ड्रामा वेब सीरीज़ ‘तांडव’ रिलीज़ हो चुकी है, जिसका सभी को बेसब्री से इंतज़ार था। सीरीज़ की कहानी दो तरह की राजनीति के ईर्द-गिर्द घूमती है। एक तरफ़ प्रधानमंत्री की कुर्सी को पाने के लिए दांव-पेंच लगाये जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी राजनीति कॉलेज कैंपस […]

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फ़िल्मकार सईद मिर्ज़ाः इंसानियत की तलाश में एक शख्सियत का नाम है

January 15, 2021

गोपाल नायडू इंटरनॅशनल कल्चरल आर्टिफॅक्ट फिल्म फेस्टिव्हल  (ICA ) का आयोजजन पुणे, महाराष्ट्र में  प्रति वर्ष होता है। इस साल यह फेस्टीवल 17 से 31 जनवरी के बीच आयोजित किया जा रहा है।  इस साल इंटरनॅशनल कल्चरल आर्टिफॅक्ट फिल्म फेस्टिव्हल में लेखक-निर्देशक सईद मिर्जा को जीवनगौरव पुरस्कार से  सन्मानित किया जाएगा. इस मौके पर सईद मिर्जा के व्यक्तित्व और कृतित्व […]

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वेब सीरीज़ क्रिमिनल जस्टिस: धारणाओं, पूर्वाग्रहों को चुनौती देता एक सघन अनुभव

January 13, 2021

सत्यम श्रीवास्तव  ‘क्रिमिनल जस्टिस’ सीजन -1, ऐसे तो कानूनी पेचीदगियों से भरी एक कहानी है लेकिन यह दर्शकों को खुद जासूस हो जाने का मौका मुहैया कराती है और शायद यही वजह है कि लगभग आठ घंटे की इस वेब सीरीज़ को एक बार देखना शुरू करने पर आप अंत देखे बगैर उठ नहीं पाते. […]

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बिमल रॉय : एक महान फिल्मकार जिसने हिंदुस्तानी सिनेमा के साथ-साथ हॉलीवुड को भी प्रेरित किया

January 10, 2021

अनुराग भारद्वाज रबींद्रनाथ टैगोर के ‘जन गण मन’ के राष्ट्रीय गान बनने से पहले बिमल रॉय ने इसे 1945 में आई अपनी फ़िल्म ‘हमराही’ में पहली बार पेश किया था समाजवाद से प्रेरित और सिनेमा से सर्वहारा की आवाज़ उठाने वाले बिमल दा पर कमर्शियल यानी व्यावसायिक फ़िल्में बनाने का ज़बरदस्त दवाब था. उनका कमाल […]

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फिल्म संगीत को अगर दो युगों में बांटा जाए तो एक पंचम दा के पहले का होगा और दूसरा उनके बाद का

January 7, 2021

शुभम उपाध्याय आरडी बर्मन यानी पंचम दा को ऐसा संगीतकार कहा जा सकता है जिन्होंने फिल्म संगीत के मिजाज और व्याकरण को बदलकर एक नया दौर शुरू किया था राहुल देव बर्मन को आप संगीतकारों की दुनिया का गुलजार भी कह सकते हैं. राहुल देव बर्मन को आप संगीतकारों की दुनिया का गुलजार भी कह […]

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‘हर चीज इडियट-प्रूफ बनानी पड़ती है’—गुलजार ने कहा अब कला पर भय का माहौल हावी है

December 31, 2020

शुभांगी मिश्रा गुलज़ार ने अपनी नई किताब ‘ अ पोएम अ डे ‘ के बारे में बात की, जो भारत की 34 भाषाओं में 279 कवियों द्वारा 365 कविताओं का एक संकलन है.कवि और लेखक गुलजार का कहना है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदियां बढ़ गई हैं. गुलजार ने कहा […]

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JNU के बाद अब उस पर बनी फिल्म राष्ट्रविरोधी! CBFC ने रोकी ‘वर्तमानम’ की स्क्रीनिंग

December 30, 2020

जेएनयू के छात्र आंदोलन पर बनी मलयालम फिल्म ‘वर्तमानम’ को सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) के क्षेत्रीय कार्यालय ने स्क्रीनिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इस फिल्म का निर्देशन प्रतिष्ठित फिल्मकार सिद्धार्थ शिवा ने किया है और पुरस्कार विजेता अभिनेत्री पार्वती तिरुवोत ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है.  इस फिल्म की कहानी […]

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कियरोस्तामी का सिनेमाः जहां हम सोने के लिए जाते हैं और जाग जाते हैं

December 28, 2020

सुदर्शन जुयाल ईरान सिनेमा के नक्शे पर था ही नहीं. तब ईरान, खोमैनी का ईरान बन चुका था यानि इस्लामिक ईरान. फ़्रेंच न्यू वेव और इटालियन सिनेमा हमारे ज़ेहन में ज़बरदस्त रूप से छाया हुआ था. साथ ही रूस, पोलैंड, हंगरी, चेकोस्लोवाकिया वगैरह के दमदार फ़िल्मकारों ने हमारे बम्बइया सिनेमा के असर को तार-तार कर […]

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